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सरकारी आंकड़े सीमित, प्राइवेट लैब ही दिखा रहीं डेंगू-मलेरिया
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जिला अस्पताल में आयुष विंग के सामने तालाब में मच्छरों की नर्सरी पनप रही है। गौर करने वाली बात यह ह?
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले में एक महीने के भीतर डेंगू के रोगियों की संख्या 20 हो गई है। रविवार को भी दो नए रोगी मिले हैं। इनमें एक सिविल लाइंस और एक जगत ब्लॉक का है। दोनों की एलाइजा जांच शनिवार को हुई थी। जगत में रविवार को मलेरिया के दो रोगी भी मिले हैं। गौर करने वाली बात यह है कि निजी लैब भी बुखार पीड़ितों को एनएस-वन जांच के आधार पर डेंगू की पुष्टि कर रहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसे रोगियों को डेंगू पीड़ित नहीं मानता।
मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं लगातार हाईरिस्क श्रेणी में बना हुआ है। सितंबर मध्य से जानलेवा डेंगू के मामले भी सामने आने लगे। हाल ही में चार डेंगू के रोगी तो जिला अस्पताल परिसर में ही मिले हैं। अब तक जिले में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए सिर्फ एलाइजा जांच पर ही भरोसा करता है। अन्य किसी जांच से अगर रोगी को डेंगू की पुष्टि होती है तो उसे डेंगू रोगी की श्रेणी में नहीं रखा जाता। जिला अस्पताल की लैब में इन दिनों औसतन रोज 10-12 लोगों की एलाइजा जांच की जा रही है। यहां जिन लोगों को डेंगू की पुष्टि होती है उनको रिकार्ड में शामिल कर लिया जाता है। दूसरी ओर अगर बरेली और जिले की निजी लैबों की रिपोर्ट पर गौर करें तो यहां कितने डेंगू के रोगी मिले स्वास्थ्य विभाग के पास इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है।
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पहले की तरह बिगड़ सकते हैं हालात
जिले में साल 2019 में तीन सौ से ज्यादा लोगों की बुखार, मलेरिया और डेंगू से मौत हुई थी। जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी लैबों की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया जा रहा है वह खतरनाक साबित हो सकता है। निजी लैब जिन लोगों को डेंगू की पुष्टि कर रही है स्वास्थ्य विभाग उनकी एलाइजा जांच कराना भी जरूरी नहीं समझता।
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डेंगू की भरोसेमंद और विश्व स्तरीय जांच एलाइजा ही है। एंटीजन, एनएस-वन डेंगू की संभावित रिपोर्ट होती है इससे डेंगू की पुष्टि नहीं होती है। किसी को अगर डेंगू के लक्षण हैं तो वे जिला अस्पताल में बुखार आने के चौथे दिन बाद एलाइजा टेस्ट करा सकते हैं।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं लगातार हाईरिस्क श्रेणी में बना हुआ है। सितंबर मध्य से जानलेवा डेंगू के मामले भी सामने आने लगे। हाल ही में चार डेंगू के रोगी तो जिला अस्पताल परिसर में ही मिले हैं। अब तक जिले में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए सिर्फ एलाइजा जांच पर ही भरोसा करता है। अन्य किसी जांच से अगर रोगी को डेंगू की पुष्टि होती है तो उसे डेंगू रोगी की श्रेणी में नहीं रखा जाता। जिला अस्पताल की लैब में इन दिनों औसतन रोज 10-12 लोगों की एलाइजा जांच की जा रही है। यहां जिन लोगों को डेंगू की पुष्टि होती है उनको रिकार्ड में शामिल कर लिया जाता है। दूसरी ओर अगर बरेली और जिले की निजी लैबों की रिपोर्ट पर गौर करें तो यहां कितने डेंगू के रोगी मिले स्वास्थ्य विभाग के पास इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है।
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पहले की तरह बिगड़ सकते हैं हालात
जिले में साल 2019 में तीन सौ से ज्यादा लोगों की बुखार, मलेरिया और डेंगू से मौत हुई थी। जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी लैबों की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया जा रहा है वह खतरनाक साबित हो सकता है। निजी लैब जिन लोगों को डेंगू की पुष्टि कर रही है स्वास्थ्य विभाग उनकी एलाइजा जांच कराना भी जरूरी नहीं समझता।
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डेंगू की भरोसेमंद और विश्व स्तरीय जांच एलाइजा ही है। एंटीजन, एनएस-वन डेंगू की संभावित रिपोर्ट होती है इससे डेंगू की पुष्टि नहीं होती है। किसी को अगर डेंगू के लक्षण हैं तो वे जिला अस्पताल में बुखार आने के चौथे दिन बाद एलाइजा टेस्ट करा सकते हैं।
-डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ