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क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब चला रहे थे झोलाछाप, सात पर रिपोर्ट
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जिला अस्पताल में भर्ती मरीज। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिले में झोलाछाप के साथ अवैध पैथोलॉजी लैब और अस्पतालों का काकस टूटने का नाम नहीं ले रहा। गांव-गांव झोलाछाप दुकानें सजाए बैठे हैं, अवैध रूप से तमाम पैथोलॉजी लैब और अस्पतालों का संचालन हो रहा है। इसी क्रम में नींद से जागे स्वास्थ्य विभाग ने सात झोलाछाप के खिलाफ अलग-अलग थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बदायूं के समरेर, दातागंज, जगत और सालारपुर ब्लॉक संक्रामक के साथ मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। संक्रामक रोगों के सीजन में गांव-गांव झोलाछाप के क्लीनिकों के साथ अवैध लैब खुल गईं हैं। कई ऐसे अस्पताल हैं जो ऑपरेशन से प्रसव तक कराते हैं। पिछले दिनों इस्लामनगर में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला की मौत भी हो चुकी है। संक्रामक रोगों के सीजन में अवैध पैथोलॉजी लैबों ने बुखार पीड़ितों में प्लेटलेट के आधार पर डेंगू होने के बाबत रिपोर्ट देनी शुरू कर दी। अमर उजाला ने अवैध लैबों की गलत रिपोर्ट से फैल रहे खौफ संबंधी समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। झोलाछाप नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. मंजीत सिंह ने कई स्थानों पर छापा मारा। इस दौरान सहसवान के फाइव स्टार मार्केट में डॉ. हसनैन पैथोलॉजी लैब, कुंवरगांव के नंदगांव में विनोद कुमार, इस्लामनगर के अल्हैपुर समसपुर में जमील अहमद, बिल्सी के हैदलपुर में रामवीर, गोपाल, उघैती के खितौरा में योगेंद्रपाल, वजीरगंज के सोई में रमन विश्वास को अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय और पैथोलॉजी लैब संचालित करते पकड़ा। इन सभी के खिलाफ संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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संक्रामक रोगों का सही आंकड़ा न होने से रहता है खतरा
स्वास्थ्य विभाग के पास संक्रामक के साथ मच्छरजनित बीमारियों का पूरा ब्योरा रहता है। रजिस्टर्ड डॉक्टर और पैथोलॉजी लैबों के लिए भी निर्देश हैं कि वे प्रतिदिन की जांचों और रोगियों का ब्योरा स्वास्थ्य विभाग के लिए उपलब्ध कराएं। जिले के सरकारी अस्पतालों से ज्यादा रोगी निजी डॉक्टरों और झोलाछाप के पास पहुंचते हैं। इसी तरह सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी से ज्यादा जांचें निजी पैथोलॉजी लैब में होती हैं। निजी डॉक्टर और लैब स्वास्थ्य विभाग को ब्योरा ही नहीं देते। जिले में सिर्फ नौ पैथोलॉजी लैब हैं जो विभाग को जांचों का ब्योरा उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा जिले में करीब 300 पैथोलॉजी लैब पंजीकृत नहीं हैं। यही नहीं ऐसे झोलाछाप की संख्या का अनुमान नहीं है जो गांव-गांव क्लीनिक खोले बैठे हैं।
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झोलाछाप के रजिस्ट्रेशन का भी हो चुका है खुलासा
स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी बदनाम हो चुका है। पिछले वर्ष जिले में 300 से ज्यादा झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई हुई। गौर करने वाली बात यह है कि इसी दौरान उनके रजिस्ट्रेशन का खुलासा भी हुआ। इस मामले में शासन स्तर से जांच के बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी बदायूं डॉ. दीपक तोमर के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। यहां बता दें कि झोलाछाप के रजिस्ट्रेशन के बावत आयुष चिकित्सा अनुभाग- एक ने संज्ञान लिया था। मामले में जांच एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय बरेली के प्राचार्य प्रोफेसर डीके मौर्य ने की थी। जिसमें डॉ. दीपक सिंह तोमर दोषी पाए गए।
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अवैध रूप से संचालित लैब और झोलाछाप के खिलाफ टीमें बनाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप सें चिकित्सा व्यवसाय कर रहे सात लोगों को के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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बदायूं के समरेर, दातागंज, जगत और सालारपुर ब्लॉक संक्रामक के साथ मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। संक्रामक रोगों के सीजन में गांव-गांव झोलाछाप के क्लीनिकों के साथ अवैध लैब खुल गईं हैं। कई ऐसे अस्पताल हैं जो ऑपरेशन से प्रसव तक कराते हैं। पिछले दिनों इस्लामनगर में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला की मौत भी हो चुकी है। संक्रामक रोगों के सीजन में अवैध पैथोलॉजी लैबों ने बुखार पीड़ितों में प्लेटलेट के आधार पर डेंगू होने के बाबत रिपोर्ट देनी शुरू कर दी। अमर उजाला ने अवैध लैबों की गलत रिपोर्ट से फैल रहे खौफ संबंधी समाचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
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इसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। झोलाछाप नियंत्रण सेल प्रभारी डॉ. मंजीत सिंह ने कई स्थानों पर छापा मारा। इस दौरान सहसवान के फाइव स्टार मार्केट में डॉ. हसनैन पैथोलॉजी लैब, कुंवरगांव के नंदगांव में विनोद कुमार, इस्लामनगर के अल्हैपुर समसपुर में जमील अहमद, बिल्सी के हैदलपुर में रामवीर, गोपाल, उघैती के खितौरा में योगेंद्रपाल, वजीरगंज के सोई में रमन विश्वास को अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय और पैथोलॉजी लैब संचालित करते पकड़ा। इन सभी के खिलाफ संबंधित थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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संक्रामक रोगों का सही आंकड़ा न होने से रहता है खतरा
स्वास्थ्य विभाग के पास संक्रामक के साथ मच्छरजनित बीमारियों का पूरा ब्योरा रहता है। रजिस्टर्ड डॉक्टर और पैथोलॉजी लैबों के लिए भी निर्देश हैं कि वे प्रतिदिन की जांचों और रोगियों का ब्योरा स्वास्थ्य विभाग के लिए उपलब्ध कराएं। जिले के सरकारी अस्पतालों से ज्यादा रोगी निजी डॉक्टरों और झोलाछाप के पास पहुंचते हैं। इसी तरह सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी से ज्यादा जांचें निजी पैथोलॉजी लैब में होती हैं। निजी डॉक्टर और लैब स्वास्थ्य विभाग को ब्योरा ही नहीं देते। जिले में सिर्फ नौ पैथोलॉजी लैब हैं जो विभाग को जांचों का ब्योरा उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा जिले में करीब 300 पैथोलॉजी लैब पंजीकृत नहीं हैं। यही नहीं ऐसे झोलाछाप की संख्या का अनुमान नहीं है जो गांव-गांव क्लीनिक खोले बैठे हैं।
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झोलाछाप के रजिस्ट्रेशन का भी हो चुका है खुलासा
स्वास्थ्य विभाग झोलाछाप के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी बदनाम हो चुका है। पिछले वर्ष जिले में 300 से ज्यादा झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई हुई। गौर करने वाली बात यह है कि इसी दौरान उनके रजिस्ट्रेशन का खुलासा भी हुआ। इस मामले में शासन स्तर से जांच के बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी बदायूं डॉ. दीपक तोमर के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। यहां बता दें कि झोलाछाप के रजिस्ट्रेशन के बावत आयुष चिकित्सा अनुभाग- एक ने संज्ञान लिया था। मामले में जांच एसआरएम राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय बरेली के प्राचार्य प्रोफेसर डीके मौर्य ने की थी। जिसमें डॉ. दीपक सिंह तोमर दोषी पाए गए।
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अवैध रूप से संचालित लैब और झोलाछाप के खिलाफ टीमें बनाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप सें चिकित्सा व्यवसाय कर रहे सात लोगों को के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ