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महिला अस्पताल में दो-दो लिफ्ट, फिर भी स्ट्रेचर खींचकर दूसरी मंजिल पर ले जाए जाते हैं मरीज

Fri, 31 Jan 2020 01:49 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jan 2020 01:49 AM IST
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Two-two lifts in women's hospital, yet stretchers pull patients to the second floor
बदायूं। जिला महिला अस्पताल ...जहां गर्भवती महिलाओं को उस नाजुक दौर में लाया जाता है, जब परिवार का हर सदस्य उनका बेहद ख्याल रखना चाहता है लेकिन इस अवस्था में भी उनसे या तो दो मंजिल जीना चढ़वाया जाता है या फिर उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर, दूसरी मंजिल तक खींचकर ले जाया जाता है। ऐसे में न सिर्फ तीमारदारों को परेशानी होती है, बल्कि उन्हें दूसरी मंजिल पर ले जाने वालों के भी पसीने छूट जाते हैं। जबकि अस्पताल के सौ शैया वार्ड में दो-दो लिफ्ट लगी हुई हैं। पांच-छह वर्षों में यह एक-दो माह ही चली होंगी।
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महिला अस्पताल में करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से सौ शैया वार्ड बना है। इसका निर्माण हुए करीब पांच-छह साल हो चुके हैं। निर्माण के डेढ़ साल बाद ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी शुरू की गई थी। तब से डॉक्टर पुरानी बिल्डिंग छोड़कर यहीं बैठ रहे हैं लेकिन पुरानी बिल्डिंग की जर्जर हालत देखते हुए एक साल पहले पहली मंजिल पर लेबर रूम, ऑपरेशन थियेटर, अल्ट्रासाउंड केंद्र और इमरजेंसी शिफ्ट कर दी गई, जबकि दूसरी मंजिल पर एमएनसीयू, कंगारू मदर लाउंज और प्राइवेट वार्ड पहुंच चुके हैं। इधर, तीसरी मंजिल पर पीएनसी वार्ड बनाया गया है। पूरे वार्ड में मरीजों को भर्ती करने से लेकर इलाज की सारी व्यवस्थाएं की गईं हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने ये नहीं सोचा कि नाजुक घड़ी में गर्भवती महिलाएं ऊपरी मंजिल पर कैसे पहुंचेंगीं। उन्हें ऊपरी मंजिल पर कौन ले जाएगा। वार्ड में अलग-अलग स्थानों पर दो लिफ्ट लगी हैं। ये लिफ्ट भी तभी लगी थीं, जब बिल्डिंग का निर्माण हुआ था। उसके दो-तीन साल तक इन्हें हाथ नहीं लगाया गया। कुछ समय पहले एक माह के लिए लिफ्ट चलीं थीं, लेकिन उसके बाद फिर खराब हो गईं। तब से गर्भवती महिलाओं को या तो जीना चढ़ाया जाता है या फिर उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर ऊपर ले जाया जाता है। जीना चढ़ते समय कोई बात हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लिफ्ट शुरू न कराने की लापरवाही मरीजों पर ही नहीं उनके तीमारदारों पर भी भारी पड़ रही है।
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-सौ शैया वार्ड में सर्विस एजेंसी ने लिफ्ट लगाकर दे दी हैं। अब ये चल रही हैं या नहीं चल रहीं हैं, ये तो सीएमएस ही बता सकतीं हैं। हमारे यहां से उसका कोई लेना देना नहीं है। इसे महिला अस्पताल की सीएमएस ही देखतीं हैं।
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डॉ. यशपाल सिंह, सीएमओ
-लिफ्ट की सर्विस होनी है, इसलिए नहीं चल रही है। हमने कंपनी को पत्र लिखा था, जिस पर कंपनी ने अपना स्टीमेट बनाकर दे दिया। अभी हमारे पास बजट नहीं है। बजट पास करने के लिए हमने शासन को पत्र भेज दिया है। जैसे ही बजट पास होता है। तभी हम कंपनी को बुलाकर लिफ्ट ठीक करा देंगे।
डॉ. रेखा रानी, सीएमएस महिला अस्पताल
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