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क्या करें साहब!..जो अस्पताल जोड़े, उन्होंने तोड़ा नाता
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बदायूं। केंद्र सरकार ने जिस उम्मीद से आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी, गरीबों को रोग मुक्त करने का सपना देखा था, जोर शोर से उसका प्रचार प्रसार किया। अलग-अलग जगह कार्यक्रम भी किए गए। कई प्राइवेट अस्पताल जोड़े गए, ताकि गरीब जनता अच्छा इलाज करा सके, लेकिन हकीकत पर गौर करें तो इसके हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। योजना के तहत जो अस्पताल जोड़े गए थे, उनमें अधिकतर अस्पतालों ने काम छोड़ दिया है। अब वे गोल्डन कार्ड से लोगों का इलाज नहीं कर रहे हैं। इससे गरीब जनता उसी जगह आकर खड़ी हो गई है, जहां योजना से पूर्व खड़ी थी।
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के आठ प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ा गया था। केंद्र सरकार का दावा था कि जिन अस्पतालों को जोड़ा गया है, उनमें गरीबों को उचित इलाज मिलेगा। जो लोग अब तक सरकारी अस्पतालों पर निर्भर थे और जो इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं होता था, वह कम से कम प्राइवेट अस्पताल में मिल सकेगा। इसके लिए गरीबों को रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। यह और बात है कि आज सरकारी अफसरों की लापरवाही से हालात बदल चुके हैं। जो प्राइवेट अस्पताल जोड़े गए थे, धीरे-धीरे करके वे काम छोड़ते जा रहे हैं। शुरुआत में राज नर्सिंग होम बिल्सी, डॉ. रामनिवास गुप्ता सहसवान, सिटी हॉस्पिटल बदायूं, जयश्री मैरीगोल्ड हॉस्पिटल, नैना आई केयर सेंटर, डॉ. सुधीर नर्सिंग होम, सांई हॉस्पिटल एंड हार्ट केयर सेंटर और डॉ. आशीष सारस्वत नर्सिंग होम आदि प्राइवेट अस्पतालों के नाम दिए गए थे। कहा गया था कि जिन लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं, वे इन अस्पतालों में जाकर अपना इलाज करा सकेंगे। आज नैना आई केयर सेंटर, डॉ. सुधीर नर्सिंग होम और डॉ. रामनिवास गुप्ता सहसवान ही बचे हैं, जो गरीबों का इलाज कर रहे हैं। बाकी अस्पताल पूरी तरह से काम छोड़ चुके हैं। खास बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इसके बाद न तो किसी प्राइवेट अस्पताल के संचालक से संपर्क किया और न ही कोई प्रयास किए। इससे जिन्हें काम छोड़ना था, उन्होंने बगैर किसी सूचना के इलाज बंद कर दिया। दोबारा कोई अधिकारी पूछने भी नहीं गया कि वो गोल्डन कार्ड के तहत इलाज क्यों नहीं कर रहे हैं।
एक साल बीता, सिर्फ 61911 कार्ड बने
आयुष्मान भारत योजना शुरू हुए करीब एक साल हो चुका है। विभाग के पास 186161 नामों की सूची भी है। इसके बावजूद अब तक 61911 लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं। गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य दोबारा तो शुरू कर दिया गया है, लेकिन जिस गति से काम चल रहा है, उससे लग रहा है कि पूरे कार्ड बनने में दो साल लग जाएंगे।
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जिन अस्पतालों को योजना के तहत जोड़ा गया था, उनके साथ एक मीटिंग की जाएगी। उन्हें क्या-क्या समस्याएं आ रहीं हैं, उस पर विचार किया जाएगा। अन्य नए प्राइवेट अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को फायदा मिल सके।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
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आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के आठ प्राइवेट अस्पतालों को जोड़ा गया था। केंद्र सरकार का दावा था कि जिन अस्पतालों को जोड़ा गया है, उनमें गरीबों को उचित इलाज मिलेगा। जो लोग अब तक सरकारी अस्पतालों पर निर्भर थे और जो इलाज सरकारी अस्पतालों में नहीं होता था, वह कम से कम प्राइवेट अस्पताल में मिल सकेगा। इसके लिए गरीबों को रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे। यह और बात है कि आज सरकारी अफसरों की लापरवाही से हालात बदल चुके हैं। जो प्राइवेट अस्पताल जोड़े गए थे, धीरे-धीरे करके वे काम छोड़ते जा रहे हैं। शुरुआत में राज नर्सिंग होम बिल्सी, डॉ. रामनिवास गुप्ता सहसवान, सिटी हॉस्पिटल बदायूं, जयश्री मैरीगोल्ड हॉस्पिटल, नैना आई केयर सेंटर, डॉ. सुधीर नर्सिंग होम, सांई हॉस्पिटल एंड हार्ट केयर सेंटर और डॉ. आशीष सारस्वत नर्सिंग होम आदि प्राइवेट अस्पतालों के नाम दिए गए थे। कहा गया था कि जिन लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं, वे इन अस्पतालों में जाकर अपना इलाज करा सकेंगे। आज नैना आई केयर सेंटर, डॉ. सुधीर नर्सिंग होम और डॉ. रामनिवास गुप्ता सहसवान ही बचे हैं, जो गरीबों का इलाज कर रहे हैं। बाकी अस्पताल पूरी तरह से काम छोड़ चुके हैं। खास बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इसके बाद न तो किसी प्राइवेट अस्पताल के संचालक से संपर्क किया और न ही कोई प्रयास किए। इससे जिन्हें काम छोड़ना था, उन्होंने बगैर किसी सूचना के इलाज बंद कर दिया। दोबारा कोई अधिकारी पूछने भी नहीं गया कि वो गोल्डन कार्ड के तहत इलाज क्यों नहीं कर रहे हैं।
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एक साल बीता, सिर्फ 61911 कार्ड बने
आयुष्मान भारत योजना शुरू हुए करीब एक साल हो चुका है। विभाग के पास 186161 नामों की सूची भी है। इसके बावजूद अब तक 61911 लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं। गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य दोबारा तो शुरू कर दिया गया है, लेकिन जिस गति से काम चल रहा है, उससे लग रहा है कि पूरे कार्ड बनने में दो साल लग जाएंगे।
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जिन अस्पतालों को योजना के तहत जोड़ा गया था, उनके साथ एक मीटिंग की जाएगी। उन्हें क्या-क्या समस्याएं आ रहीं हैं, उस पर विचार किया जाएगा। अन्य नए प्राइवेट अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को फायदा मिल सके।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ