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Budaun News: जिस घर में बेटियों का सम्मान, वहीं वास करते हैं देवी-देवता
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म्याऊं में रामकथा सुनाते पं.खुशीराम महाराज। संवाद
म्याऊं। कस्बे में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन रविवार को कथा वाचक खुशीराम महाराज ने शिव पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जिस घर में बेटियों का सम्मान होता है, वहां देवी-देवताओं का निवास होता है। बेटा तो केवल एक कुल का मान बढ़ता है, लेकिन बेटी दो कुलों का सम्मान बढ़ाती है। समाज में बेटियों की शादी में लोग दहेज की मांग करते हैं, जो उचित नहीं।
उन्होंने कहा कि नारद जी के कहने पर माता पार्वती ने वर्षों शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या की। जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवता, भूत, प्रेत अनेक रूप बनाकर हिमंचल के नगर की ओर शोर गुल मचाते हुए चल दिए। जब बरात राजा हिमंचल के नगर में प्रवेश करती है तो लोग इधर-उधर भागने लगते हैं।
शिव और उनके बरातियों को देख रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर जाती है। विकराल वेश में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगते हैं। मैनावती माता पार्वती को गोद में लेकर जोर से विलाप करने लगती हैं। कहती हैं कि इस पागल के साथ में अपनी बेटी का विवाह नहीं करुंगी, चाहे जो हो जाए।
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नारद जी आए और बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहीं हैं, वे शक्ति स्वरूपा हैं। विदाई के समय मैना रानी ने पार्वती से कहा कि हमेशा अपने पति के पद की सेवा करना। पतिव्रत धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है। प्रसंग सुनाकर श्रोता भाव विभोर हो गए।
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उन्होंने कहा कि नारद जी के कहने पर माता पार्वती ने वर्षों शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या की। जब शंकर जी दूल्हा बनकर चले तो उनके साथ देवता, भूत, प्रेत अनेक रूप बनाकर हिमंचल के नगर की ओर शोर गुल मचाते हुए चल दिए। जब बरात राजा हिमंचल के नगर में प्रवेश करती है तो लोग इधर-उधर भागने लगते हैं।
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शिव और उनके बरातियों को देख रानी मैनावती के हाथों से पूजा की थाली गिर जाती है। विकराल वेश में शंकर को देखकर सभी लोग नारद जी को दोष देने लगते हैं। मैनावती माता पार्वती को गोद में लेकर जोर से विलाप करने लगती हैं। कहती हैं कि इस पागल के साथ में अपनी बेटी का विवाह नहीं करुंगी, चाहे जो हो जाए।
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नारद जी आए और बताया कि जिसे आप अपनी बेटी समझ रहीं हैं, वे शक्ति स्वरूपा हैं। विदाई के समय मैना रानी ने पार्वती से कहा कि हमेशा अपने पति के पद की सेवा करना। पतिव्रत धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं। पत्नी के लिए पति से बड़ा संसार में कोई देवता नहीं है। प्रसंग सुनाकर श्रोता भाव विभोर हो गए।