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Budaun News: हाईस्कूल की टॉपटेन में लड़कियों ने मारी बाजी तो इंटर में पीछे रह गई आधी आबादी
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बदायूं। यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम ने इस बार जिले की शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रख दी हैं। एक ओर हाईस्कूल में बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप सूची पर कब्जा जमाया, तो वहीं इंटरमीडिएट में लड़कों ने बाजी मारकर आधी आबादी को पीछे छोड़ दिया। यह अंतर न सिर्फ परिणामों में दिखा, बल्कि शिक्षा के बदलते रुझानों की ओर भी इशारा कर रहा है।
जिले में हाईस्कूल के परिणाम पर नजर डालें तो यहां बेटियों का दबदबा साफ तौर पर नजर आता है। जनपद की टॉप-10 सूची में कुल 15 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इनमें नौ लड़कियां और छह लड़के हैं। यह आंकड़ा बताता है कि शुरुआती स्तर पर बेटियां पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं।
टॉप दस सूची में श्वेता, अंजलि वर्मा, अर्चना, पायल धनगर, गौरी शर्मा, इसरा, प्रिया चौहान, प्रियांशी और मुस्कान जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। वहीं लड़कों में अभिषेक चौहान, पवन श्रीवास्तव, अमन राना, कार्तिक, हर्षवर्धन और लक्षित ने टॉप दस सूची में जगह बनाई, लेकिन संख्या के लिहाज से वे पीछे रह गए।
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इससे साफ है कि हाईस्कूल स्तर पर बेटियां पढ़ाई में आगे निकल रही हैं। इसके उलट इंटरमीडिएट के परिणामों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। यहां टॉप-10 सूची में कुल 14 छात्र-छात्राएं शामिल हैं, जिनमें 10 लड़के और सिर्फ चार लड़कियां हैं। टॉप-पांच में भी लड़कों का ही दबदबा रहा और केवल एक लड़की ही इस सूची में जगह बना सकी।
इंटरमीडिएट में निखिल, सुधांशु, महेश, उदित सक्सेना, सुरेंद्र, हिमांशु बघेल, प्रशांत शाक्य, हर्ष प्रताप सिंह, लक्ष्यपाल और अनुज कुमार ने टॉप सूची में स्थान हासिल किया। वहीं अंशी तिवारी, कनक शर्मा, शिवी वर्मा और कशिश पटेल ही इस सूची में अपनी जगह बना सकीं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाईस्कूल तक बेटियां पूरी लगन और निरंतरता के साथ पढ़ाई करती हैं, लेकिन इंटरमीडिएट स्तर पर पहुंचते-पहुंचते कई सामाजिक, पारिवारिक और संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां उनके सामने आ जाती हैं। इनमें पढ़ाई का दबाव, करियर को लेकर असमंजस और कई बार पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शामिल होती हैं, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।
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जिले में हाईस्कूल के परिणाम पर नजर डालें तो यहां बेटियों का दबदबा साफ तौर पर नजर आता है। जनपद की टॉप-10 सूची में कुल 15 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इनमें नौ लड़कियां और छह लड़के हैं। यह आंकड़ा बताता है कि शुरुआती स्तर पर बेटियां पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं।
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टॉप दस सूची में श्वेता, अंजलि वर्मा, अर्चना, पायल धनगर, गौरी शर्मा, इसरा, प्रिया चौहान, प्रियांशी और मुस्कान जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। वहीं लड़कों में अभिषेक चौहान, पवन श्रीवास्तव, अमन राना, कार्तिक, हर्षवर्धन और लक्षित ने टॉप दस सूची में जगह बनाई, लेकिन संख्या के लिहाज से वे पीछे रह गए।
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इससे साफ है कि हाईस्कूल स्तर पर बेटियां पढ़ाई में आगे निकल रही हैं। इसके उलट इंटरमीडिएट के परिणामों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। यहां टॉप-10 सूची में कुल 14 छात्र-छात्राएं शामिल हैं, जिनमें 10 लड़के और सिर्फ चार लड़कियां हैं। टॉप-पांच में भी लड़कों का ही दबदबा रहा और केवल एक लड़की ही इस सूची में जगह बना सकी।
इंटरमीडिएट में निखिल, सुधांशु, महेश, उदित सक्सेना, सुरेंद्र, हिमांशु बघेल, प्रशांत शाक्य, हर्ष प्रताप सिंह, लक्ष्यपाल और अनुज कुमार ने टॉप सूची में स्थान हासिल किया। वहीं अंशी तिवारी, कनक शर्मा, शिवी वर्मा और कशिश पटेल ही इस सूची में अपनी जगह बना सकीं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाईस्कूल तक बेटियां पूरी लगन और निरंतरता के साथ पढ़ाई करती हैं, लेकिन इंटरमीडिएट स्तर पर पहुंचते-पहुंचते कई सामाजिक, पारिवारिक और संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां उनके सामने आ जाती हैं। इनमें पढ़ाई का दबाव, करियर को लेकर असमंजस और कई बार पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शामिल होती हैं, जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं।