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डीएम ने सहायक आयुक्त को सौंपी हेराफेरी के आरोपी बैंक मैनेजर की जांच
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उझानी (बदायूं)। जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा में सहकारी क्रय-विक्रय समिति लिमिटेड के बचत खाते से करीब 15 लाख रुपये की हेराफेरी के मामले में बैंक के उपमहाप्रबंधक से जांच हटा दी गई है। समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा ने इसकी शिकायत डीएम से थी, साथ ही जांच अफसर की भूमिका पर शक जताया था। डीएम ने जांच की जिम्मेदारी सहायक आयुक्त/सहायक निबंधक सहकारिता को सौंप दी है।
हेराफेरी का मामला नवंबर-19 का था। जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा में चल रहे सहकारी क्रय-विक्रय समिति के बचत खाते से बैंक मैनेजर हजारी लाल ने 15 लाख रुपये सेवानिवृत्त सचिव श्याम सिंह के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे। पोल खुली तो मैनेजर को श्याम सिंह के खाते से पूरे रुपये समिति के खाते में लौटाने पड़ गए थे। इसके बाद समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा की शिकायत पर बैंक मैनेजर का उसहैत तबादला कर जांच बैंक के उपमहाप्रबंधक हरीबाबू भारती को सौंपी गई लेकिन भारती ने जांच को आगे बढ़ाने की बजाय आरोपी को ही क्लीनचिट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसकी भनक लगते ही चार दिन पहले सभापति ने डीएम को पत्र देकर जांच किसी अन्य अफसरों से कराने की मांग की थी। डीएम ने सहायक आयुक्त/ सहायक निबंधक सहकारिता के लिए पूरे मामले की जांच सौंप दी है। बता दें कि अगर हेराफेरी की पोल नहीं खुलती तो सेवानिवृत्त सचिव के जरिए समिति के 15 लाख रुपये का बंदरबांट हो जाता। सबसे अहम बात तो यह कि श्याम सिंह ने सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले अपने हस्ताक्षर वाला जो चेक बैंक मैनेजर को सौंपा था, उस पर सभापति के दस्तखत भी नहीं थे। चेक पर नियमानुसार दोनों के हस्ताक्षर होने चाहिए थे।
एसडीएम सदर की भी जांच पर रहेगी नजर
उझानी। डीएम ने जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा से हेराफेरी के मामले में हटाए बैंक मैनेजर हजारी लाल की जांच सहायक आयुक्त/ सहायक निबंधक सहकारिता को सौंपने के साथ उस पर नजर रखने के लिए एसडीएम सदर को अधिकृत किया है। एसडीएम सदर भी जांच से जुड़े बिंदुओं को संज्ञान में रखेंगे।
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हेराफेरी का मामला नवंबर-19 का था। जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा में चल रहे सहकारी क्रय-विक्रय समिति के बचत खाते से बैंक मैनेजर हजारी लाल ने 15 लाख रुपये सेवानिवृत्त सचिव श्याम सिंह के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे। पोल खुली तो मैनेजर को श्याम सिंह के खाते से पूरे रुपये समिति के खाते में लौटाने पड़ गए थे। इसके बाद समिति के सभापति किशनचंद्र शर्मा की शिकायत पर बैंक मैनेजर का उसहैत तबादला कर जांच बैंक के उपमहाप्रबंधक हरीबाबू भारती को सौंपी गई लेकिन भारती ने जांच को आगे बढ़ाने की बजाय आरोपी को ही क्लीनचिट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसकी भनक लगते ही चार दिन पहले सभापति ने डीएम को पत्र देकर जांच किसी अन्य अफसरों से कराने की मांग की थी। डीएम ने सहायक आयुक्त/ सहायक निबंधक सहकारिता के लिए पूरे मामले की जांच सौंप दी है। बता दें कि अगर हेराफेरी की पोल नहीं खुलती तो सेवानिवृत्त सचिव के जरिए समिति के 15 लाख रुपये का बंदरबांट हो जाता। सबसे अहम बात तो यह कि श्याम सिंह ने सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले अपने हस्ताक्षर वाला जो चेक बैंक मैनेजर को सौंपा था, उस पर सभापति के दस्तखत भी नहीं थे। चेक पर नियमानुसार दोनों के हस्ताक्षर होने चाहिए थे।
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एसडीएम सदर की भी जांच पर रहेगी नजर
उझानी। डीएम ने जिला सहकारी बैंक की स्थानीय शाखा से हेराफेरी के मामले में हटाए बैंक मैनेजर हजारी लाल की जांच सहायक आयुक्त/ सहायक निबंधक सहकारिता को सौंपने के साथ उस पर नजर रखने के लिए एसडीएम सदर को अधिकृत किया है। एसडीएम सदर भी जांच से जुड़े बिंदुओं को संज्ञान में रखेंगे।
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