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सेटेलाइट की तस्वीर से सीमांकन में चूक से फंसा गंगा एक्सप्रेस-वे का काम
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गंगा एक्सप्रेस- वे। फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाले गंगा एक्सप्रेस का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा। दरअसल, एक्सप्रेस-वे के लिए सेटेलाइट तस्वीरों के जरिये सीमांकन करने के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) ने पिलर लगा दिए थे। सीमांकन में चूक के कारण विरोध होने लगा, इसके बाद जिले के 85 गांवों में नए सिरे से भूमि की पैमाइश का काम शुरू हुआ जो अब तक पूरा नहीं हो सका है।
मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाले 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेस बदायूं की चार तहसीलों के 85 गांवों से होकर गुजरते हुए यहां करीब 95 किमी दूरी तय करेगा। बिसौली के 38, दातागंज के 27, बदायूं के 17 और बिल्सी के दो गांवों में एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। कार्यदायी संस्था ने दस अप्रैल से एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए भूमि के समतलीकरण का काम शुरू किया तो विरोध होने लगा। दरअसल, जिन किसानों की भूमि का बैनामा कराया गया था उनके स्थान पर दूसरे किसानों के खेतों में पिलर लगा दिए गए थे। जितनी भूमि एक्सप्रेस-वे के लिए क्रय की गई उससे ज्यादा पर काम शुरू कर दिया गया। जिले भर में विरोध में बाद काम ठप हो गया। इसके बाद नए सिरे से पैमाइश का काम शुरू हुआ तब पता लगा कि सेटेलाइट तस्वीरों के जरिये किए गए सीमांकन में चूक हुई है। इसके बाद दातागंज के 27 में से 20 और बिसौली के 38 में से 29 गांवों में नए सिरे से पैमाइश का काम पूरा हो गया है।
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मानसून में प्रभावित होगा काम
मानसून सक्रिय होने के बाद भूमि समतलीकरण का काम और भी सुस्त हो जाएगा। दरअसल, आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होने वाला है। इसके बाद बारिश के कारण भूमि समतलीकरण के काम में रुकावट आनी तय है, क्योंकि गीली मिट्टी में कीचड़ आदि के कारण समतलीकरण का काम नहीं हो पाएगा, जिससे इस काम मेें अभी और देर होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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सेटेलाइट तस्वीरों के जरिये एक्सप्रेस-वे के सीमांकन में चूक हुई थी। गलत स्थानों पर पिलर लगा दिए गए थे। नए सिरे से पैमाइश का काम कराया जा रहा है। दातागंज के करीब 20 गांवों में पैमाइश हो चुकी है। पैमाइश के बाद विरोध जैसी कोई समस्या सामने नहीं आएगी।
-रामशिरोमणि, एसडीएम दातागंज
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मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाले 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेस बदायूं की चार तहसीलों के 85 गांवों से होकर गुजरते हुए यहां करीब 95 किमी दूरी तय करेगा। बिसौली के 38, दातागंज के 27, बदायूं के 17 और बिल्सी के दो गांवों में एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण किया गया है। कार्यदायी संस्था ने दस अप्रैल से एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए भूमि के समतलीकरण का काम शुरू किया तो विरोध होने लगा। दरअसल, जिन किसानों की भूमि का बैनामा कराया गया था उनके स्थान पर दूसरे किसानों के खेतों में पिलर लगा दिए गए थे। जितनी भूमि एक्सप्रेस-वे के लिए क्रय की गई उससे ज्यादा पर काम शुरू कर दिया गया। जिले भर में विरोध में बाद काम ठप हो गया। इसके बाद नए सिरे से पैमाइश का काम शुरू हुआ तब पता लगा कि सेटेलाइट तस्वीरों के जरिये किए गए सीमांकन में चूक हुई है। इसके बाद दातागंज के 27 में से 20 और बिसौली के 38 में से 29 गांवों में नए सिरे से पैमाइश का काम पूरा हो गया है।
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मानसून में प्रभावित होगा काम
मानसून सक्रिय होने के बाद भूमि समतलीकरण का काम और भी सुस्त हो जाएगा। दरअसल, आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होने वाला है। इसके बाद बारिश के कारण भूमि समतलीकरण के काम में रुकावट आनी तय है, क्योंकि गीली मिट्टी में कीचड़ आदि के कारण समतलीकरण का काम नहीं हो पाएगा, जिससे इस काम मेें अभी और देर होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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सेटेलाइट तस्वीरों के जरिये एक्सप्रेस-वे के सीमांकन में चूक हुई थी। गलत स्थानों पर पिलर लगा दिए गए थे। नए सिरे से पैमाइश का काम कराया जा रहा है। दातागंज के करीब 20 गांवों में पैमाइश हो चुकी है। पैमाइश के बाद विरोध जैसी कोई समस्या सामने नहीं आएगी।
-रामशिरोमणि, एसडीएम दातागंज