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Budaun News: अस्पताल पंजीकरण में खेल... नाम किसी का, काम कर रहा दूसरा

Mon, 21 Oct 2024 04:18 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Mon, 21 Oct 2024 04:18 AM IST
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Games in hospital registration... one's name, someone else is working
बदायूं। सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी लैब का रजिस्ट्रेशन कराने में खूब खेल चल रहा है। पंजीकरण प्रक्रिया में जिन डॉक्टर, फार्मासिस्ट या लैब टेक्नीशियन के नाम दर्ज कराए जाते हैं, हकीकत में उन्हें सीएमओ कार्यालय बुलाया ही नहीं जाता। उनसे यह तक भी नहीं पूछा जाता कि वह संबंधित अस्पताल या अल्ट्रासाउंड सेंटर में काम कर रहे हैं या दूसरे में। बिना बुलाए ही उनका रजिस्ट्रेशन कर दिया जाता है।
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इसका खुलासा तब हुआ जब मंडी के पास एक अस्पताल के पंजीकरण के कागजों में ऐसे डॉक्टर का जिक्र था, जिसको बिना बताए ही रजिस्ट्रेशन में उनका नाम लिखवा दिया गया। सीएमओ कार्यालय में इस हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन की कॉपी भी मौजूद है। इस हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन करीब एक साल पहले हुआ था। तब से हॉस्पिटल चल रहा है। उसका नाम स्वास्थ्य विभाग की सूची में भी शामिल था। ऐसा ही दूसरा मामला लालपुल स्थित एक अस्पताल का सामने आया। जिस डॉक्टर का पंजीकरण में जिक्र किया गया वह आज तक बदायूं आए तक नहीं। उनको जब पता लगा तो उन्होंने सीएमओ कार्यालय में शिकायत की। इसके बाद रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया। अब वही अस्पताल फिर से संचालित हो रहा है।
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ऐसे ही कई मामले सामने आने के बाद भी सीएमओ कार्यालय का कोई जिम्मेदार यह पता करने अस्पताल तक नहीं पहुंचा कि जिन डॉक्टरों के नाम रजिस्ट्रेशन में दर्ज हैं, वो हॉस्पिटल में आ रहे हैं या नहीं। वहां प्रसव कौन चिकित्सक करता है, ऑपरेशन कौन करता है और कौन एनेस्थेसिया देता है। हालांकि जब हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत हो जाती है तो अस्पताल सील कर दिए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिन बाद इनको पुन: संचालित करा दिया जाता है।
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बाबू बोला- बुलाए नहीं जाते डॉक्टर, खुद आते हैं



सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों का पंजीकरण पटल देखने वाले लिपिक पारस का कहना है कि अस्पतालों के डॉक्टरों को बुलाया नहीं जाता है, वे खुद आते हैं। इनकी भी पिछले साल ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल हुई थी। अब वह पंजीकरण से लेकर झोलाछाप का भी पटल देख रहे हैं।



निजी अस्पताल के रजिस्ट्रेशन के समय जिस डॉक्टर का नाम लिखा होता है, उसकी जांच होनी चाहिए। एक बार मौके पर जाकर देखने का भी प्रावधान है। जो मामले आए हैं वह उनके समय के नहीं हैं। अगर ऐसा कोई मामला आता है तो जांच कर कठोर कार्रवाई कराई जाएगी। - डॉ.रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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