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फूड फॉरेस्ट बनने पर बढ़ेगा अमरूद का उत्पादन

Fri, 13 May 2022 01:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 01:39 AM IST
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Food Forest
ककराला स्थित अमरूद के बागान। फाइल फोटो - फोटो : BADAUN
बदायूं/ ककराला। ककराला फलपट्टी में अमरूद के बागान सूखने लगे हैं। करीब एक दशक पहले तक की बात करें तो कई हजार एकड़ अमरूद के हरे भरे बाग नजर आते थे, लेकिन वर्तमान में इनकी हालात खस्ता है। एक दशक में अमरूद की बागबानी को करीब 80 फीसदी तक का नुकसान हुआ है। अब शासन द्वारा फूड फॉरेस्ट के लिए जो 15 जिले चुने गए हैं, उनमें बदायूं का नाम भी शामिल है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसके बाद न केवल यहां हरियाली बढ़ेगी बल्कि अमरूद उत्पादन भी बढ़ेगा।
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ककराला का स्वादिष्ट अमरूद प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में पहचान रखता था। बागबानी करने वाले फीरोज खान, अफजल खां, मुसब्बे राना आदि बागबानों का कहना है कि सीजन में प्रतिदिन अकेले ककराला से करीब दो सौ से ढाई सौ ट्रक अमरूद देश की विभिन्न मंडियों में पहुंचता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। फल पट्टी घोषित किए जाने के बाद भी केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित कृषि से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी बागबानों तक नही पहुंच पाती। ऐसे में बागबान अमरूद की फसल से मुंह मोड़ रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यहां नेमाटोड और उकठा नामक बीमारी से फलपट्टी बुरी तरह ग्रसित है। दरअसल, फसल चक्र न होने के कारण भी यहां इस बीमारी ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। ऐसे में बागान सूख रहे हैं।
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इलाहबादी सफेदी की उम्र अधिकतम 20 साल
ककराला फलपट्टी में ज्यादातर अमरूद बागान इलाहाबादी सफेदी प्रजाति के हैं। जानकारों का कहना है कि यह प्रजाति करीब 20-22 साल ही उत्पादन देती है। इसके बाद इनकी उम्र खत्म हो जाती है। अमरूद की नवीन प्रजातियों की ओर ककराला फलपट्टी के बागबान ध्यान नहीं दे रहे। जो बागान सूख रहे हैं वहां वह बागान को खत्म कर दूसरी फसलों का उत्पादन शुरू कर देते हैं।
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क्या है उकठा रोग
उद्यान विभाग के अनुसार अमरूद में उकठा रोग फफूंद से फैलता है जिसमें विशेष रूप से फ्यूजेरियम स्पेसीज माक्रोफोमिना फासकोलिना और सेफालोस्पोरियम स्पेसीज प्रमुख हैं। इसकी रोकथाम के लिए सभी सूखे पौधे और सूखी टहनी को निकाल देना चाहिए। मार्च, जून और सितंबर माह में छंटाई करके प्रत्येक पौधे के थाले में बाविस्टीन डाली जानी चाहिए। रोग ग्रसित भाग को काट के बेनोमाईल कार्बेंडाजिम के 20 ग्राम को पानी में घोल बनाकर प्रति पौधा डाला जाना चाहिए।
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जुलाई से शुरू होगी फसल की बुआई
अमरूद की फसल की बुआई सामान्यत: जुलाई से अगस्त तक होती है। हालांकि जिन स्थानों पर सिंचाई की सुविधा होती है वहां फरवरी मार्च में भी पौधे लगाए जा सकते हैं। ऐसे में लगभग डेढ़ माह बाद जुलाई में बारिश के मौसम में इसे लगाना शुरू कर दिया जाएगा।

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फूड फॉरेस्ट बनने से निश्चित ही हरियाली में वृद्धि होगी, इससे ऑक्सीजन स्तर में सुधार होगा। अमरूद उत्पादन भी बढ़ेगा। फिलहाल शासन से अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं, कोई डिटेल्स भी अभी नहीं आई है, जैसे ही कोई निर्देश आते हैं, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।
-पूजा सक्सेना, उप निदेशक, उद्यान विभाग
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