{"_id":"4372161815386114d925072e6dab4dba","slug":"flowers-palash-was-one-ember-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘फूला पलाश, वन हुआ अंगार’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘फूला पलाश, वन हुआ अंगार’
कादरचौक।
Updated Sat, 18 Apr 2015 08:06 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कहा जाता है कि पलाश के बगैर ऋतुराज बसंत की छटा पूर्ण नहीं होती। यदि बसंत कामदेव का सहायक है तो पलाश के फूल बसंत का श्रृंगार है। बसंत ऋतु में यह फूलने लगते हैं। दीपक की लौ के समान इनके फू ल दूर से ही दमकते हैं। लाल केसरिया रंग के फूल बसंत का रूप परिलक्षित करते हैं। पलाश, परसा, टेसू, किंशुक, टेसू एक ही वनस्पति के नाम है। किंशुक तोता का नाम है तोता की चोंच के समान फूल का आकार और रंग होने के कारण इसे किंशुक कहा जाता है। कादरचौक के ककोड़ा वन क्षेत्र में इस समय पूरा जंगल लालिमा से पूर्ण है। वन में गिरे फूलों से जमीन भी लाल नजर आती है। शास्त्रोक्त है कि चांदी के पात्र में भोजन करने जैसा वैज्ञानिक लाभ मिलता है। राज्य पुष्प है पलाश अपने महत्व के लिए डाक टिकिट पर भी अंकित है।
पलाश का महत्व
-पलाश (ढाक) के पत्ते से दावत की पत्तल का निर्माण होता है।
-फूलों से रंग बनता है और सजावट के काम आते हैं।
-पत्ताें के दोना (कटोरी) बनते हैं।
-जड़ों के रेशे से नाव के छेद बंद किए जाते हैं।
-इसका गाेंद पौरुष शक्ति बढ़ाने के काम आता है।
पौराणिक कथा में पलाश का महत्व
‘ढाक के तीन पात’ कहावत सर्व विदित है। कामदेव ने ढाक के पेड़ पर बैठकर शिव पर फूलों के वाण चलाए तो शिव ने तीसरा नेत्र खोला कामदेव भस्म होने लगा। तब पलाश भी जलने लगा। पलाश ने शिव से विनय की कि मेरा क्या दोष है जो कामदेव के साथ उसे भी जला दिया। तो शिव ने वरदान देकर उस पर लगी आग की लपटों को फू लों में बदलने का वरदान दे दिया। पत्तों को भी तीन नेत्रों के समान तीन होने का वरदान दे दिया।
अनदेखी से नष्ट हो रहा पलाश वन
सैकड़ों बीघा क्षेत्र में फैला वन का क्षेत्र लगातार ग्रामीणों द्वारा काटने या आग लगाने से घट रहा है। वहीं वन क्षेत्र में अवैध रूप से अतिक्त्रस्मण के कारण वन का स्वरूप लगातार बिगड़ रहा है।
विज्ञापन
उनके संज्ञान में नहीं है कि पलाश वन पर कोई अतिक्रमण है या इस क्षेत्र में लोग पलाश के वनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव पर सहमति होती है तो इस क्षेत्र का और अधिक ध्यान रखा जाएगा।
- समीर कुमार, डीएफओ
विज्ञापन
पलाश का महत्व
-पलाश (ढाक) के पत्ते से दावत की पत्तल का निर्माण होता है।
-फूलों से रंग बनता है और सजावट के काम आते हैं।
-पत्ताें के दोना (कटोरी) बनते हैं।
-जड़ों के रेशे से नाव के छेद बंद किए जाते हैं।
-इसका गाेंद पौरुष शक्ति बढ़ाने के काम आता है।
पौराणिक कथा में पलाश का महत्व
‘ढाक के तीन पात’ कहावत सर्व विदित है। कामदेव ने ढाक के पेड़ पर बैठकर शिव पर फूलों के वाण चलाए तो शिव ने तीसरा नेत्र खोला कामदेव भस्म होने लगा। तब पलाश भी जलने लगा। पलाश ने शिव से विनय की कि मेरा क्या दोष है जो कामदेव के साथ उसे भी जला दिया। तो शिव ने वरदान देकर उस पर लगी आग की लपटों को फू लों में बदलने का वरदान दे दिया। पत्तों को भी तीन नेत्रों के समान तीन होने का वरदान दे दिया।
विज्ञापन
अनदेखी से नष्ट हो रहा पलाश वन
सैकड़ों बीघा क्षेत्र में फैला वन का क्षेत्र लगातार ग्रामीणों द्वारा काटने या आग लगाने से घट रहा है। वहीं वन क्षेत्र में अवैध रूप से अतिक्त्रस्मण के कारण वन का स्वरूप लगातार बिगड़ रहा है।
विज्ञापन
उनके संज्ञान में नहीं है कि पलाश वन पर कोई अतिक्रमण है या इस क्षेत्र में लोग पलाश के वनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव पर सहमति होती है तो इस क्षेत्र का और अधिक ध्यान रखा जाएगा।
- समीर कुमार, डीएफओ