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Budaun News: चार करोड़ खपाने के बाद भी बाढ़ सुरक्षा के काम अधूरे, ग्रामीण चिंतित
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दातागंत के मकरंदापुर गांव के पास बाढ़ सुरक्षा को धता बताती रामगंगा। संवाद
दातागंज। रामगंगा ने गत वर्ष भी तबाही मचाई थी, इस वर्ष भी नदी का रुख देखकर लगता है कि पानी बढ़ा तो गांव मकरंदापुर व बिहारीपुर-छेमराव के डूबने का खतरा पैदा हो जाएगा। बाढ़ खंड को गत वर्ष इन गांवों को बचाने के लिए चार करोड़ रुपये मिले थे। रुपये खपाए जाने के बावजूद बाढ़ खंड अब तक बचाव का काम पूरा नहीं करा सका है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और चिंता है। इधर, जरतोली में रामगंगा अब भी कटान कर रही है। सरकारी स्कूल का भवन ढहने के कगार पर है। सिमरिया में भी रामगंगा कहर बरपा रही है।
मकरंदापुर गोटियां 20 वर्षों से बाढ़ का दंश झेलती रही है। 11वीं बार भी इस नई बसावन को खतरा पैदा हो गया है। कटान के कारण गत वर्ष से अबतक करीब 200 बीघा खेतिहर भूमि कटकर रामगंगा में समा चुकी है। गांव वालों ने बताया कि रामगंगा का रुख 20 वर्ष पूर्व शाहजहांपुर के गांव दभोरा में था, जो सात किमी करीब पीछे आकर उनके गांव के पास तक आ गई है।
बाढ़ खंड ने रामगंगा की बाढ़ से बचाव को जो नौ स्टड लगाए थे, कटान के कारण एक पानी में बह चुका है। बाढ़ आने पर जो बचाव कार्य किए गए हैं, उनका रहना भी मुश्किल होगा।
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इधर, जरतोली गांव में स्कूल भवन अब भी रामगंगा नदी में अटका हुआ है। स्कूल के पांच शौचालय रामगंगा में समा चुके हैं। कटान जारी रहने के कारण बाढ़ खंड के प्रयास यहां नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। सिमरिया के लोग भी बेहद डरे हुए हैं, यहां कटान रुकने का नाम नहीं ले पा रहा हैं।
-- -- -मकरंदापुर के ग्रामीणों ने बयां किया दर्द-- --
लालाराम ने बताया कि उनके मकान रामगंगा के बिल्कुल किनारे पर हैं, इसलिए सबसे ज्यादा डर उनके परिवार को है। बाढ़ सुरक्षा के काम ऐसे नहीं लगते कि बाढ़ आई तो उनको बचाया जा सके।
मनवीर ने कहा कि उनका गांव 11वीं बार बसा है। अब भी वह अपने को सुरक्षित नहीं मान रहे। कुछ पानी बढ़ा तो गांव को खतरा पैदा हो जाएगा। बाढ़ आई तो गांव को बचाना मुश्किल होगा। बाढ़ खंड से उनकोे सुरक्षा की उम्मीद नहीं है।
नरवीर ने बताया कि दो गांव मकरंदापुर और बिहारीपुर-छेमराव पानी से घिरे हुए हैं। रामगंगा कटान करती हुई बढ़ती जा रही है। दोनों गांवों को खतरा है। बाढ़ खंड के लोग अधिकारियों के आने में काम करते लोगों को दिखा देते हैं, बाद में मजदूर चले जाते हैं।
श्यामवीर ने कहा कि रामगंगा अब डराने लगी है। उनकी मुसीबत को अधिकारी समझ नहीं पाते हैं। अधिकारी तो कुछ समय के लिए इधर आते हैं, लेकिन उन लोगों को दिनरात यहीं रहकर रामगंगा के कटान और बाढ़ का डर सताता रहता है।
एडीएम के साथ हमने बाढ़ क्षेत्र का दौरा किया है, अभी गांवों को खतरा नहीं है। हां, कटान हो रहा है, उसकी रोकथाम के प्रयास जारी हैं। राजस्व और बाढ़ खंड के अधिकारी कर्मचारियों को हर वक्त सतर्क रहने के निर्देश दे दिए हैं। गांव वालों को ढांढस बंधाया है कि वे डरें नहीं, प्रशासन उनके साथ है। -विनोद कुमार सिंह, एसडीएम, दातागंज
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मकरंदापुर गोटियां 20 वर्षों से बाढ़ का दंश झेलती रही है। 11वीं बार भी इस नई बसावन को खतरा पैदा हो गया है। कटान के कारण गत वर्ष से अबतक करीब 200 बीघा खेतिहर भूमि कटकर रामगंगा में समा चुकी है। गांव वालों ने बताया कि रामगंगा का रुख 20 वर्ष पूर्व शाहजहांपुर के गांव दभोरा में था, जो सात किमी करीब पीछे आकर उनके गांव के पास तक आ गई है।
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बाढ़ खंड ने रामगंगा की बाढ़ से बचाव को जो नौ स्टड लगाए थे, कटान के कारण एक पानी में बह चुका है। बाढ़ आने पर जो बचाव कार्य किए गए हैं, उनका रहना भी मुश्किल होगा।
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इधर, जरतोली गांव में स्कूल भवन अब भी रामगंगा नदी में अटका हुआ है। स्कूल के पांच शौचालय रामगंगा में समा चुके हैं। कटान जारी रहने के कारण बाढ़ खंड के प्रयास यहां नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। सिमरिया के लोग भी बेहद डरे हुए हैं, यहां कटान रुकने का नाम नहीं ले पा रहा हैं।
लालाराम ने बताया कि उनके मकान रामगंगा के बिल्कुल किनारे पर हैं, इसलिए सबसे ज्यादा डर उनके परिवार को है। बाढ़ सुरक्षा के काम ऐसे नहीं लगते कि बाढ़ आई तो उनको बचाया जा सके।
मनवीर ने कहा कि उनका गांव 11वीं बार बसा है। अब भी वह अपने को सुरक्षित नहीं मान रहे। कुछ पानी बढ़ा तो गांव को खतरा पैदा हो जाएगा। बाढ़ आई तो गांव को बचाना मुश्किल होगा। बाढ़ खंड से उनकोे सुरक्षा की उम्मीद नहीं है।
नरवीर ने बताया कि दो गांव मकरंदापुर और बिहारीपुर-छेमराव पानी से घिरे हुए हैं। रामगंगा कटान करती हुई बढ़ती जा रही है। दोनों गांवों को खतरा है। बाढ़ खंड के लोग अधिकारियों के आने में काम करते लोगों को दिखा देते हैं, बाद में मजदूर चले जाते हैं।
श्यामवीर ने कहा कि रामगंगा अब डराने लगी है। उनकी मुसीबत को अधिकारी समझ नहीं पाते हैं। अधिकारी तो कुछ समय के लिए इधर आते हैं, लेकिन उन लोगों को दिनरात यहीं रहकर रामगंगा के कटान और बाढ़ का डर सताता रहता है।
एडीएम के साथ हमने बाढ़ क्षेत्र का दौरा किया है, अभी गांवों को खतरा नहीं है। हां, कटान हो रहा है, उसकी रोकथाम के प्रयास जारी हैं। राजस्व और बाढ़ खंड के अधिकारी कर्मचारियों को हर वक्त सतर्क रहने के निर्देश दे दिए हैं। गांव वालों को ढांढस बंधाया है कि वे डरें नहीं, प्रशासन उनके साथ है। -विनोद कुमार सिंह, एसडीएम, दातागंज

दातागंत के मकरंदापुर गांव के पास बाढ़ सुरक्षा को धता बताती रामगंगा। संवाद

दातागंत के मकरंदापुर गांव के पास बाढ़ सुरक्षा को धता बताती रामगंगा। संवाद

दातागंत के मकरंदापुर गांव के पास बाढ़ सुरक्षा को धता बताती रामगंगा। संवाद

दातागंत के मकरंदापुर गांव के पास बाढ़ सुरक्षा को धता बताती रामगंगा। संवाद

दातागंत के मकरंदापुर गांव के पास बाढ़ सुरक्षा को धता बताती रामगंगा। संवाद