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Budaun News: सात वर्ष के बच्चे से कुकर्म के प्रयास में दोषी को पांच साल की सजा
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20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया, आधी धनराशि पीड़ित को देने का ओदश
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश दीपक यादव ने 10 वर्ष पुराने कुकर्म के प्रयास के मामले में दोषी को पांच साल की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए आधी धनराशि पीड़ित बच्चे को देने का आदेश दिया है ।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहने वाले व्यक्ति ने 18 अप्रैल 2014 को सात वर्ष के बच्चे के साथ कुकर्म करने के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसका बेटा घर के बाहर खेल रहा था कि मोहल्ले का ही रहने वाला आदर्श सक्सेना उसको अपने घर ले गया और उसके साथ कुकर्म का प्रयास करने लगा। बच्चे की चीख पुकार पर साथ खेलने वाले बच्चे मौके पर पहुंच गए। बच्चे ने कोर्ट में दिए बयानों में भी कुकर्म का प्रयास करने की बात कही थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। न्यायाधीश ने शनिवार को पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन कर विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद सजा सुनाई।
घृणित श्रेणी का अपराध
न्यायाधीश ने फैसला देते वक्त यह भी कहा की लगभग सात वर्षीय बालक के साथ प्रकृति विरुद्ध अपराध कारित करने का प्रयास किया गया है जो अत्यंत घृणित व निंदनीय कोटि का अपराध है। यह अपराध अभियुक्त की अप्राकृतिक काम पिपासा का परिणाम है। इस प्रकार के अपराधों से समाज में गलत संदेश जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश दीपक यादव ने 10 वर्ष पुराने कुकर्म के प्रयास के मामले में दोषी को पांच साल की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए आधी धनराशि पीड़ित बच्चे को देने का आदेश दिया है ।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहने वाले व्यक्ति ने 18 अप्रैल 2014 को सात वर्ष के बच्चे के साथ कुकर्म करने के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि उसका बेटा घर के बाहर खेल रहा था कि मोहल्ले का ही रहने वाला आदर्श सक्सेना उसको अपने घर ले गया और उसके साथ कुकर्म का प्रयास करने लगा। बच्चे की चीख पुकार पर साथ खेलने वाले बच्चे मौके पर पहुंच गए। बच्चे ने कोर्ट में दिए बयानों में भी कुकर्म का प्रयास करने की बात कही थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू की। न्यायाधीश ने शनिवार को पत्रावली पर साक्ष्यों का अवलोकन कर विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद सजा सुनाई।
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घृणित श्रेणी का अपराध
न्यायाधीश ने फैसला देते वक्त यह भी कहा की लगभग सात वर्षीय बालक के साथ प्रकृति विरुद्ध अपराध कारित करने का प्रयास किया गया है जो अत्यंत घृणित व निंदनीय कोटि का अपराध है। यह अपराध अभियुक्त की अप्राकृतिक काम पिपासा का परिणाम है। इस प्रकार के अपराधों से समाज में गलत संदेश जाता है।
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