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Budaun News: पहले चिमनी गिरी, फिर बॉयलर... दरोगा ने दर्ज किए बयान

Wed, 28 May 2025 01:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 28 May 2025 01:01 AM IST
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First the chimney fell, then the boiler... the inspector recorded the statement
मेंथा फैक्टरी में बाहरी छोर नतर आते तबाही के निशान। संवाद - फोटो : संवाद
उझानी। भारत मिंट एलाइड एंड केमिकल्स में सात दिन पहले भीषण अग्निकांड की जांच अग्निशमन विभाग ने शुरू कर दी है। मंगलवार दोपहर जांच टीम ने फैक्टरी के कर्मचारियों समेत मुनेंद्र यादव के भाई गजेंद्र के बयान दर्ज किए। दरोगा को उन्होंने बताया कि पहले चिमनी गिरी, फिर बॉयलर का मलबा मुनेंद्र के ऊपर गिर गया। जान बचाने के लिए मलबे में दबे मुनेंद्र को छोड़कर उन्हें भागना पड़ा।
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अग्निकांड में जिंदा जलकर मरे मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव बिचौला टप्पा जामिनी निवासी मुनेंद्र का भाई गजेंद्र बयान दर्ज कराते समय भावुक हो गया। करीब आधा घंटे के दौरान कई बार उसकी आंखें भर आईं। उसने बताया कि आंधी आने पर चिमनी गिरी और फैक्टरी में आग लग गई। इससे चीख- पुकार मच गई और सभी कर्मचारी जान बचाकर भागने लगे। वहां पर अफरा-तफरी मच गई। मुनेंद्र भी भागे तो उनके ऊपर बायलर गिर गया। उनके साथ गजेंद्र और पुष्पेंद्र भी थे। इन दोनों ने मुनेंद्र को बायलर के मलबे से बाहर खींचने की कोशिश भी लेकिन नाकाम रहे। तब तक फैक्टरी में आग तेजी से फैल गई। ऐसे में वह अपनी जान बचाकर भागे। जबकि मुनेंद्र वहीं पर दबा रहा और जलने से उसकी मौत हो गई।
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शोर तो सुनाई दिया... आगे क्या हुआ, हमें नहीं पता
- मेंथा फैक्टरी में हादसे के बाद मची चीख- पुकार के कई चश्मदीद हैं। चश्मदीदों में कुड़ा नरसिंहपुर की एक महिला ने बताया कि फैक्टरी से बचाओ- बचाओ की आवाज सुनाई दी। कई लोग दीवार फांदकर बाहर निकल गए। लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे। आग फैलते देख किसी ग्रामीण की हिम्मत नहीं पड़ रही थी उधर जाय।

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मलबा हटाने के लिए गाजियाबाद से आई टीम
फैक्टरी परिसर में लोहे और मशीनों के मलबे का ढेर है। सोमवार दोपहर क्रेन चालक बहेड़ी निवासी मोहम्मद मोइन ने दिक्कतें बताकर काम रोक दिया। उन्होंने कहा कि गैस कटर से काटने के बाद ही क्रेन के जरिये मलबा उठाया जा सकेगा। उसके बाद गाजियाबाद से आठ सदस्यीय टीम मंगलवार दोपहर बुलाई गई। उस टीम ने गैस कटर से गार्डर और पाइप काटने का काम शुरू कर दिया है।
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शव मिलने के इंतजार में फैक्टरी गेट पर डटे मुनेंद्र के परिजन
मुनेंद्र की पत्नी रेखा समेत परिवार की महिलाएं फैक्टरी के गेट पर पूरा दिन इसी इंतजार में रहीं कि शव मिल जाय। घर लौटने वाले हरेक व्यक्ति से यही पूछती हैं कि कुछ पता लगा। पूछते- पूछते सात दिन गुजर गए। इसके विपरीत फैक्टरी के आसपास डेरा जमाए बैठे परिजनों की दशा भी वैसी ही है। फैक्टरी के अंदर से कोई कर्मचारी या फिर पुलिस कर्मी बाहर निकलता दिखता है तो वह उन्हीं के पास जाकर पूछने लगती हैं।

मेंथा फैक्टरी में बाहरी छोर नतर आते तबाही के निशान। संवाद

मेंथा फैक्टरी में बाहरी छोर नतर आते तबाही के निशान। संवाद- फोटो : संवाद

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