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सीमित संसाधनों के साथ अग्निशमन विभाग मैदान में
अमर उजाला ब्यूरो/ बदायूं
Updated Thu, 06 Apr 2017 11:22 PM IST
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फायर सर्विस
- फोटो : अमर उजाला
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सीमित संसाधनों के साथ अग्निशमन विभाग मैदान में
जिले की पांच तहसीलों में सिर्फ दो अग्निशमन स्टेशन, बदायूं से भेजे जाते हैं बिसौली और दातागंज को वाहन
इस साल समय से पहले फायर सीजन शुरू हो गया है। अग्निशमन विभाग इस बार भी संसाधनों के अभाव का सामना करेगा। यह स्थिति तब है जब हर साल जिले में अग्निकांडों से भीषण तबाही होती है। पांच तहसील, 18 ब्लॉक और करीब 37 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ दो फायर स्टेशन हैं। सुदूर बिसौली, दातागंज और हजरतपुर में होने वाले अग्निकांडों पर काबू पाना भी बदायूं स्थित फायर स्टेशन की जिम्मेदारी है। जाहिर है कि बड़े अग्निकांडों पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग को इस बार भी चुनौतियों से जूझना होगा।
चालू साल में फायर सीजन शुरू होने से पहले ही जिले में एक दर्जन से ज्यादा अग्निकांड को चुके हैं। उसावां के गांव कमलयापुर में तो तीन साल के बच्चे की जिंदा जलकर मौत भी हो गई। उसहैत के गांव बौरा गौंतरा में एक दर्जन से घर राख हो गए। दातागंज, सहसवान, मुजरिया और अलापुर में भी अग्निकांडों में लाखों की संपत्ति राख हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि जिले की पांच तहसीलों में सिर्फ मुख्यालय और सहसवान में ही अग्निश्मन केंद्र हैं। सहसवान केंद्र के पास एक फायर ब्रिगेड वाहन और एक वाटर पंप है। बदायूं स्टेशन पर दो फायर ब्रिगेड वाहन हैं। यह भी जिले की आबादी के हिसाब से नाकाफी हैं। बिल्सी, दातागंज और बिसौली में लंबे समय से फायर स्टेशन खोलने की मांग हो रही है, लेकिन कार्रवाई सिफर है।
दातागंज, बिसौली, हजरतपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
बदायूं। अग्निकांडों के दौरान राहत पहुंचने में सबसे ज्यादा देर बिसौली, दातागंज और हजरतपुर में होती है। ऐसे में यहां अग्निकांड विकराल रूप ले लेते हैं। दातागंज और हजरतपुर कटरी क्षेत्र के इलाके हैं। यहां भी लंबे समय से फायर स्टेशन खोले जाने की मांग चल रही है। हालांकि विभाग ने बिसौली और दातागंज में एक-एक फायर ब्रिगेड वाहन की ड्यूटी लगा दी है। यह फायर ब्रिगेड वाहन 30 जून तक यहां तैनात रहेगा।
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ज्यादातर हाईड्रेंट हुए बंद
बदायूं। शहर में फायर ब्रिगेड वाहन में पानी भरने के लिए 18 हाईड्रेंट थे। इनमें से 10 अपना अस्तित्व खो चुके हैं। सिर्फ आठ हाईड्रेंट ऐसे हैं जो चालू हालत में हैं। ऐसे में कोई बड़ा अग्निकांड होने पर फायर ब्रिगेड को दिक्कत हो सकती है।
ओवरहैड टैंक पर निर्भरता बढ़ाई
बदायूं। फायर ब्रिगेड ने हाईड्रेंट बंद होने की स्थिति में नगर पालिका के नलकूपों और ओवरहैड टैंकों पर निर्भरता बढ़ा दी है। चीफ फायर आफीसर आरके वाजपेयी का कहना है कि नलकूप और ओवरहैड टैंक हाईड्रेंट के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक हैं।
ये हैं संसाधन
फायर ब्रिगेड- 4, मिनी वाटर टैंकर- 2, बोलेरो पंप- 3, हाईड्रेंट- 8
............
नए फायर स्टेशन बनाने संबंधी प्रस्ताव शासन को गए हुए हैं। इन पर विचार चल रहा है। सुदूर इलाकों में समय से राहत पहुंचे इसके लिए ड्यूटियां बांट दी गई हैं। यह भी जरूरी है कि आग लगने की सटीक सूचना दें। ताकि फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचने में अनावश्यक देरी न हो।
-आरके वाजपेयी, चीफ फायर ऑफीसर
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जिले की पांच तहसीलों में सिर्फ दो अग्निशमन स्टेशन, बदायूं से भेजे जाते हैं बिसौली और दातागंज को वाहन
इस साल समय से पहले फायर सीजन शुरू हो गया है। अग्निशमन विभाग इस बार भी संसाधनों के अभाव का सामना करेगा। यह स्थिति तब है जब हर साल जिले में अग्निकांडों से भीषण तबाही होती है। पांच तहसील, 18 ब्लॉक और करीब 37 लाख की आबादी वाले जिले में सिर्फ दो फायर स्टेशन हैं। सुदूर बिसौली, दातागंज और हजरतपुर में होने वाले अग्निकांडों पर काबू पाना भी बदायूं स्थित फायर स्टेशन की जिम्मेदारी है। जाहिर है कि बड़े अग्निकांडों पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग को इस बार भी चुनौतियों से जूझना होगा।
चालू साल में फायर सीजन शुरू होने से पहले ही जिले में एक दर्जन से ज्यादा अग्निकांड को चुके हैं। उसावां के गांव कमलयापुर में तो तीन साल के बच्चे की जिंदा जलकर मौत भी हो गई। उसहैत के गांव बौरा गौंतरा में एक दर्जन से घर राख हो गए। दातागंज, सहसवान, मुजरिया और अलापुर में भी अग्निकांडों में लाखों की संपत्ति राख हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि जिले की पांच तहसीलों में सिर्फ मुख्यालय और सहसवान में ही अग्निश्मन केंद्र हैं। सहसवान केंद्र के पास एक फायर ब्रिगेड वाहन और एक वाटर पंप है। बदायूं स्टेशन पर दो फायर ब्रिगेड वाहन हैं। यह भी जिले की आबादी के हिसाब से नाकाफी हैं। बिल्सी, दातागंज और बिसौली में लंबे समय से फायर स्टेशन खोलने की मांग हो रही है, लेकिन कार्रवाई सिफर है।
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दातागंज, बिसौली, हजरतपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
बदायूं। अग्निकांडों के दौरान राहत पहुंचने में सबसे ज्यादा देर बिसौली, दातागंज और हजरतपुर में होती है। ऐसे में यहां अग्निकांड विकराल रूप ले लेते हैं। दातागंज और हजरतपुर कटरी क्षेत्र के इलाके हैं। यहां भी लंबे समय से फायर स्टेशन खोले जाने की मांग चल रही है। हालांकि विभाग ने बिसौली और दातागंज में एक-एक फायर ब्रिगेड वाहन की ड्यूटी लगा दी है। यह फायर ब्रिगेड वाहन 30 जून तक यहां तैनात रहेगा।
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ज्यादातर हाईड्रेंट हुए बंद
बदायूं। शहर में फायर ब्रिगेड वाहन में पानी भरने के लिए 18 हाईड्रेंट थे। इनमें से 10 अपना अस्तित्व खो चुके हैं। सिर्फ आठ हाईड्रेंट ऐसे हैं जो चालू हालत में हैं। ऐसे में कोई बड़ा अग्निकांड होने पर फायर ब्रिगेड को दिक्कत हो सकती है।
ओवरहैड टैंक पर निर्भरता बढ़ाई
बदायूं। फायर ब्रिगेड ने हाईड्रेंट बंद होने की स्थिति में नगर पालिका के नलकूपों और ओवरहैड टैंकों पर निर्भरता बढ़ा दी है। चीफ फायर आफीसर आरके वाजपेयी का कहना है कि नलकूप और ओवरहैड टैंक हाईड्रेंट के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक हैं।
ये हैं संसाधन
फायर ब्रिगेड- 4, मिनी वाटर टैंकर- 2, बोलेरो पंप- 3, हाईड्रेंट- 8
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नए फायर स्टेशन बनाने संबंधी प्रस्ताव शासन को गए हुए हैं। इन पर विचार चल रहा है। सुदूर इलाकों में समय से राहत पहुंचे इसके लिए ड्यूटियां बांट दी गई हैं। यह भी जरूरी है कि आग लगने की सटीक सूचना दें। ताकि फायर ब्रिगेड को मौके पर पहुंचने में अनावश्यक देरी न हो।
-आरके वाजपेयी, चीफ फायर ऑफीसर