Budaun News: पावर कारपोरेशन के वर्कशॉप में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों ने पाया काबू
उसावां रोड किनारे सिविल लाइंस क्षेत्र में पावर कारपोरेशन का मुख्य कार्यालय है। उसके पीछे 25 केवीए, 63 केवीए और 100 केवीए के ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत के लिए अलग-अलग कार्यशालाएं हैं। बुधवार दोपहर यहां आग लग गई थी।
विस्तार
बदायूं में पावर कारपोरेशन की कार्यशाला (वर्कशॉप) में बुधवार की दोपहर भीषण आग लग गई। कड़ी मशक्कत के बावजूद फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां शाम पांच बजे तक आग नहीं बुझा सकीं। कार्यशाला में उस वक्त ट्रांसफॉर्मरों की वेल्डिंग का काम चल रहा था। अनुमान है कि शॉर्टसर्किट होने से आग लगी, लेकिन विभागीय अधिकारी कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। उनका कहना है कि आग बुझने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी। तब पता चलेगा कितना नुकसान हुआ और आग कैसे लगी थी।
उसावां रोड किनारे सिविल लाइंस क्षेत्र में पावर कारपोरेशन का मुख्य कार्यालय है। उसके पीछे 25 केवीए, 63 केवीए और 100 केवीए के ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत के लिए अलग-अलग कार्यशालाएं हैं। बताया जा रहा है कि दोपहर करीब एक बजे 25 केवीए की कार्यशाला में ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत चल रही थी। कुछ कर्मचारी नजदीक में खाना खाने गए थे, जबकि वसीम, शोएब और इरशाद आदि काम कर रहे थे। पास ही तेल का एक टैंक रखा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक स्पार्किंग होने की आवाज आई और केबल में आग लग गई।
कर्मचारियों के प्रयास रहे नाकाफी
कर्मचारियों ने शोर मचाया तो पूरा स्टाफ मौके पर पहुंच गया और तुरंत अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने में जुट गए। कर्मचारियों ने आग बुझाने की कोशिश में आठ-दस सिलिंडर खाली कर दिए, लेकिन कामयाब नहीं हुए। धीरे-धीरे आग खराब उपकरणों के गोदाम तक पहुंच गई। वहां ट्रांसफॉर्मरों की खराब कोर भरी हुई थी। कोर चूंकि तेल में भीगी रहती हैं, लिहाजा उसने भी तुरंत आग पकड़ ली।
आग के विकराल हो जाने पर कर्मचारियों ने तुरंत अधिकारियों और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। तुरंत ही तीन गाड़ियां लेकर दमकल कर्मी मौके पर पहुंच गए। शाम पांच बजे तक आग बुझाने का काम चलता रहा। क्रेन से गोदाम के नजदीक रखे ट्रांसफॉर्मर हटवाए गए। जला हुआ सामान भी हटवाया गया, तब कहीं आग पर काबू पाया जा सका। इसमें ट्रांसफॉर्मरों का कुछ नया सामान भी जला है। अभी नुकसान का आकलन नहीं हुआ है।
धोखा दे गए फायर हाइड्रेंट
कार्यशाला के नजदीक में ही विभाग का फायर हाइड्रेंट है। बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान ही उसे चलाने की कोशिश की गई, लेकिन हाइड्रेंट के टैंक में पानी नहीं था। तब तक फायर ब्रिगेड की तीनों गाड़ियों का पानी खर्च हो चुका था। आखिर में कर्मचारियों ने ट्यूबवेल चलाकर पहले टैंक भरा। तब कहीं गाड़ियों को पानी मिल सका।
... तो होता ज्यादा नुकसान
इस अग्निकांड में कितना नुकसान हुआ है, विभागीय अधिकारी अभी यह नहीं बता पा रहे हैं। हालांकि हालात देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर आग नए ट्रांसफॉर्मरों की ओर बढ़ जाती तो ज्यादा नुकसान होता। गनीमत रही कि आग खराब उपकरणों के गोदाम की ओर ही पहुंची।
कार्यशाला में आग कैसे लगी और कितना नुकसान हुआ, अभी यह पता पाना मुश्किल है। इसकी जांच कराई जाएगी। - दीपक कुमार, अधीक्षण अभियंता पावर कॉरपोरेशन

मरम्मत कार्यशाला में रखा तेल का टैंक।

वर्कशॉप में उठता धुआं