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Budaun News: फिल्म न तकनीशियन... कैसे हो एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड

Sun, 07 Apr 2024 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2024 12:24 AM IST
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Film no technician... How about X-ray and ultrasound?
अजय कुमार
बदायूं। दातागंज, उझानी, वजीरगंज और बिल्सी सीएचसी में 40 लाख रुपये की लागत से चार साल पहले एक्स-रे मशीनें लगाई गईं थीं, जो तकनीशियन और एक्स-रे फिल्म न होने से बंद पड़ी हैं। उधर, कादरचौक, सैदपुर, सहसवान, ककराला, जगत, आसफपुर, वजीरगंज अस्पताल के लिए एक करोड़ रुपये से खरीदी गईं जांच मशीनें कमरों में बंद पड़ी हैं।
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स्थानीय स्तर पर अस्पतालों में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड न हो पाने पर रोगियों व गर्भवती महिलाओं को जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे जिला अस्पताल में एक्स-रे कराने वालों की भीड़ लगी रहती है। एक्स-रे के लिए रोगियों को तीन-तीन घंटे तक लाइन में लगना पड़ता है। जिले में 17 सीएचसी-पीएचसी और 43 न्यू पीएचसी हैं, लेकिन चार पर ही एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं, वे भी बंद पड़ी हैं। कादरचौक सीएचसी के लिए लाखों रुपये से खरीदी गईं जांच मशीनें बंद पड़ी हैं। हेल्थ एटीएम लगाया गया, वह भी शुरू नहीं हो सका है। एक्स-रे मशीन है पर शोपीस बनी हुई है। सीवीसी जांच की मशीन भी कमरे में बंद हैं। मरीजों को प्राइवेट सेंटरों पर 400 रुपये देकर सीबीसी की जांच करानी पड़ रही है।
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जिम्मेदारों की लापरवाही का यह है हाल
सहसवान सीएचसी पर 12 मार्च से एक्स-रे नहीं हो रहे। मशीन बंद होने से कबाड़ होती जा रही है। बावजूद इसके विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। पूछने पर बताया गया कि फिल्म उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए एक्स-रे नहीं हो पा रहे हैं। सिजेरियन डिलीवरी शुरू हो गई हैं, लेकिन ऑपरेशन के लिए कोई महिला डॉक्टर नहीं है।
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वजीरगंज सीएचसी पर 50 लाख से ज्यादा की खरीदी गई मशीनें बंद कमरे में धूल फांक रहीं हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है, लैब तकनीशियन परमानेंट नहीं है। जांचों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 10 बजे तक कई मरीज पहुंचे। इनमें सर्वाधिक संख्या महिलाओं की रही। गर्भवती महिलाओं ने अपनी दिक्कतें बताते हुए डॉ. हिना सबदर को दिखाया। एक्स-रे मशीन बंद मिली। बताया कि फिल्म के अभाव में करीब एक महीने से एक्स-रे नहीं हो रहे हैं। हेल्थ एटीएम भी खराब है।
सैदपुर सीएचसी पर मानक के अनुसार चिकित्साधीक्षक के अलावा सात एमबीबीएस डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र एक एमबीबीएस डॉक्टर विकास श्रीवास्तव थे। उनका भी ट्रांसफर हो गया है। अब कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। यहां एक्स-रे मशीन नहीं है। अन्य जांच मशीनें भी कबाड़ हो रही हैं।



मरीज बोले- समय और रुपये दोनों की होती है बर्बादी
फोटो- 21 हजरतपुर से जिला अस्पताल की दूरी 50 किलोमीटर है। 10 साल की बच्ची को चोट लग गई थी। एक्स-रे होना था। रास्ते में चार सीएचसी पड़ती हैं, लेकिन कहीं भी एक्स-रे की सुविधा नहीं हैं। लिहाजा 50 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला अस्पताल आए हैं। - रामौतार सिंह, हजरतपुर


बहन की पित्त की थैली में पथरी है। डॉक्टर ने एक्स-रे कराने के लिए लिखा था। आसपास कहीं भी सरकारी अस्पताल में एक्स-रे नहीं होते हैं। लिहाजा 30 किलोमीटर का सफर करके जिला अस्पताल आना पड़ा है। यहां भी तीन घंटे लाइन में लगने के बाद एक्स-रे हो सका है। - अजय कुमार, इस्लामगंज (जगत)



बेटी के हाथ में दर्द हो रहा था तो डॉक्टर ने एक्स-रे कराने की सलाह दी। ककराला क्षेत्र से 25 किलोमीटर की दूरी में कई सीएचसी हैं, लेकिन कहीं भी एक्स-रे नहीं होता है। ऐसे में जिला अस्पताल आना मजबूरी है। - ब्रह्मदेव, गभियाई नगला (अलापुर)




हाथ का एक्स-रे कराने आए हैं। सुबह नौ बजे आ गए थे। एक बजे एक्स-रे हो सका है। रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट लेने के लिए कल बुलाया है। अब 25 किलोमीटर दूर से दोबारा रिपोर्ट लेने आना पड़ेगा। - मिथलेश देवी, चांद बराई (उसहैत)

अजय कुमार

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