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Budaun News: अगेती के गेहूं के लिए नहीं मिली खाद, अब पछेती में भी पिछड़ रहे किसान

Fri, 29 Nov 2024 12:25 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2024 12:25 AM IST
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Fertilizer was not available for early wheat, now farmers are lagging behind in late wheat too
बंद पड़ी कादरचौक की समिति, खाद के लिए परेशान हो रहे किसान। स्रोत संवाद
बदायूं। अगेती गेहूं की बोआई का समय अब गुजर गया है। खाद की कमी के चलते किसान पछेती में भी पिछड़ रहे हैं। अमूमन 25 नवंबर तक अगेती गेहूं की बोआई हो जाती है। अभी जिले के करीब 40 फीसदी किसान ही गेहूं की बोआई कर सके हैं। डीएपी नहीं मिलने के चलते किसानों के खेत खाली पड़े सूख रहे हैं। किसानों का कहना है कि अब होने वाली गेहूं की बोआई में प्रति बीघा एक क्विंटल पैदावार की कमी आ सकती है। बुधवार को जिले की अधिकांश समितियों पर ताले लटके रहे।
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गेहूं की बोआई का सही समय 25 नवंबर तक माना जाता है। अगर सही समय पर बोआई होती है तो उसमें पैदावार अच्छी होती है। बदायूं जनपद के किसान तिलहन और धान की खेती के बाद गेहूं की बोआई करते हैं। ऐसे में किसानों के खेत काफी दिन से खाली पड़े सूख रहे हैं। उन्होंने अपने खेतों को तैयार कर रखा है, लेकिन डीएपी नहीं मिलने के चलते बोआई शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
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पिछले साल दो लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी गेहूं की बोआई
जिले में पिछले साल इन दिनों तक दो लाख हेक्टेयर गेहूं की बोआई हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष अब तक मात्र 80 हजार हेक्टेयर के करीब ही बोआई हो सकी है। बृहस्पतिवार की सुबह भी किसान डीएपी खरीदने के लिए समितियों पर पहुंचे, लेकिन उन्हें मायूस लौटना पड़ा। बृहस्पतिवार को उझानी में रैक पहुंचने से आज शुक्रवार को खाद मिलने की उम्मीद किसानों में जगी है।
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एनपीके डालकर इन प्रजातियों की कर सकते हैं बोआई
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक, जिन किसानों ने अब तक गेहूं की डीएपी न मिलने के चक्कर में बोआई नहीं की है वह किसान एनपीके डालकर पीबीडब्ल्यू 226, डीबीडब्ल्यू 303, डीबीडब्ल्यू 371 और राज 3765 प्रजाति गेहूं के बीज की बोआई कर सकते हैं। इन प्रजातियों की 15 दिसंबर तक बोआई की जा सकती है। यह प्रजाति 110 दिन में तैयार हो जाएगी। अगर डीएपी नहीं मिल रहा है तो किसान एनपीके भी इस्तेमाल कर सकते हैं। एनपीके से भी पैदावार पर कोई असर नहीं होगा। उनका कहना है कि किसान डीएपी के पीछे बेवजह न भागें।

किसान बोले, देर से बोया गेहूं होली बाद होता है तैयार
किसानों ने बताया कि जो लोग 25 नवंबर तक गेहूं की बोआई कर देते हैं वह गेहूं होली के आसपास तैयार हो जाता है। उसमें पैदावार भी अच्छी होती है। अब के बाद जो भी बोआई होगी वह गेहूं होली के बाद तैयार होगा। ऐसे में किसानों को होली के समय गेहूं में पानी देना पड़ेगा, जिससे उसकी लागत बढ़ जाएगी। वहीं उस दौरान पछुवा हवा भी चलती है। अगर गेहूं को पानी दिया तो गेहूं हवा के चलते गिर जाएगा। वहीं अगर सिंचाई नहीं की तो दाना कमजोर पड़ जाएगा। किसानों ने कहा कि दोनों ही परिस्थितियों में पैदावार पर असर पड़ना तय है। किसानों का कहना है कि समय पर बोआई न करने पर प्रति बीघा एक क्विंटल तक का नुकसान होता है।





किसानों की बात सही है, 25 नवंबर तक अगेती गेहूं की बोआई अमूमन हो जाती है। बाद में बोआई करने पर उसकी सिंचाई करनी होती है, जिससे गेहूं गिर जाता है। पैदावार में कमी आती है। - डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक





जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। एनपीके से भी पैदावार पर कोई असर नहीं होगा। अब तक 50 फीसदी बोआई हो भी चुकी है। 15 दिसंबर तक जिले में गेहूं की बोआई होती है। -डीके सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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