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नकली खाद की शिकायत पर छापा, गोदाम सील
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 14 May 2016 11:57 PM IST
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khad
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किसानों की शिकायत पर एसडीएम बिसौली ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन के वजीरगंज स्थित गोदाम पर छापा मारा। मौके से डीपीए खाद के खुले हुए कट्टे, भारी मात्रा में कच्चा माल व अन्य ऐसी सामग्री पायी गई, जिससे यहां नकली खाद बनाने की आशंका व्यक्त की गई। अधिकारियों ने सैंपल प्रयोगशाला भेजा है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
कृषि विभाग के अधिकारियों को लंबे समय से वजीरगंज समेत कई इलाकों में नकली डीएपी खाद की बिक्री की शिकायत मिल रही थी। शिकायत के आधार पर एसडीएम बिसौली गुलाब चंद्र, कृषि उप निदेशक आरपी चौधरी और जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने शनिवार को वजीरगंज स्थित फेडरेशन का गोदाम पर छापा मारा। अधिकारियों के आने के पूर्व ही गोदाम प्रभारी और स्टाफ के अन्य लोग भाग गए। अधिकारियों ने जब गोदाम के भीतर पड़ताल की तो वह दंग रह गए। गोदाम के भीतर इफ्को की डीएपी खाद के 380 कट्टे मिले। यह कट्टे सिले नहीं गए थे। डीएपी के 50 खाली कट्टे और 150 सुपर खाद के कट्टे भी मिले। नकली खाद बनाकर इसको तोलकर कट्टों में भरने के लिए यहां इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा भी मिला। इसके साथ कट्टा सिलने की मशीन भी मिली है। सैंपल लेने के बाद अधिकारियों ने गोदाम को सील कर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने फेडरेशन की आड़ में नकली खाद बनाने के रैकेट की आशंका व्यक्त की। हालांकि, प्रयोगशाला भेजे गए नमूने की रिपोर्ट आने के बाद ही खाद में मिलावट के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
बाक्स
ऐसे होता था मिलावट का खेल
बदायूं। सुपर खाद के एक कट्टा की कीमत बाजार में 300 रुपये है, जबकि डीएपी के एक कट्टा की कीमत 1200 रुपये। मिलावट का खेल करने वाले गोदाम के अंदर सुपर खाद में मिट्टी और बदरपुर मिलाकर इसको कट्टों में भरकर पैक कर दिया करते थे। यहां से इस मिलावटी खाद को सहकारी समितियों को भेज दिया जाता था। मिलावट का खेल करने वाले इस तरह से किसानों को चूना लगाकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। सूत्रों की मानें तो कुछ और लोग भी मिलावट के इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं।
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इस तरह सप्लाई होती है खाद
बदायूं। इफ्को खाद का वितरण पूरे जिले में प्रशासन, कृषि विभाग और सहकारी संघ के नियंत्रण में होता है। खाद की आपूर्ति इफ्को से यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन को दी जाती है। इसका स्टॉक फेडरेशन के गोदामों में ही होता है। इसके बाद सहकारी समितियों की मांग पर फेडरेशन के गोदाम से खाद की सप्लाई सहकारी समितियों के लिए की जाती है। जिले में सहकारी विभाग की कुल 132 समितियां हैं।
वर्जन-
गोदाम के भीतर से डीएपी खाद के 380 बिना सिले हुए और 50 खाली कट्टे मिले हैं। खाद में मिलावट करने के लिए रखा गया कुछ कच्चा माल भी मिला है। यहां से एक इलेक्ट्रानिक तराजू भी कब्जे में लिया गया है। खाद में मिलावट की बात से प्रथम दृष्टया इंकार नहीं किया जा सकता। नमूना जांच के लिए भेजा गया है।
-आरके सिंह, जिला कृषि अधिकारी
वर्जन-
डीएपी खाद का वितरण सहकारी समितियों के जरिए होता है। इसका स्टॉक यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन के गोदाम में किया जाता है। वहां क्या चल रहा था, मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है।
-एपी सिंह यादव, एआर कोऑपरेटिव
वर्जन
मुझे माह अक्तूबर 2015 में जिला पीसीएफ द्वारा बीज भंडारण के लिए अधिकृत किया गया था। दिसंबर 2015 में बीज का प्रेषण करने के बाद उस गोदाम से मेरी तैनाती स्वत: खत्म हो गई थी। इसके बाद में वहां क्या हो रहा है, मुझे नहीं पता।
-विजय सिंह, भंडार नायक, पीसीएफ
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कृषि विभाग के अधिकारियों को लंबे समय से वजीरगंज समेत कई इलाकों में नकली डीएपी खाद की बिक्री की शिकायत मिल रही थी। शिकायत के आधार पर एसडीएम बिसौली गुलाब चंद्र, कृषि उप निदेशक आरपी चौधरी और जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने शनिवार को वजीरगंज स्थित फेडरेशन का गोदाम पर छापा मारा। अधिकारियों के आने के पूर्व ही गोदाम प्रभारी और स्टाफ के अन्य लोग भाग गए। अधिकारियों ने जब गोदाम के भीतर पड़ताल की तो वह दंग रह गए। गोदाम के भीतर इफ्को की डीएपी खाद के 380 कट्टे मिले। यह कट्टे सिले नहीं गए थे। डीएपी के 50 खाली कट्टे और 150 सुपर खाद के कट्टे भी मिले। नकली खाद बनाकर इसको तोलकर कट्टों में भरने के लिए यहां इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा भी मिला। इसके साथ कट्टा सिलने की मशीन भी मिली है। सैंपल लेने के बाद अधिकारियों ने गोदाम को सील कर दिया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने फेडरेशन की आड़ में नकली खाद बनाने के रैकेट की आशंका व्यक्त की। हालांकि, प्रयोगशाला भेजे गए नमूने की रिपोर्ट आने के बाद ही खाद में मिलावट के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
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ऐसे होता था मिलावट का खेल
बदायूं। सुपर खाद के एक कट्टा की कीमत बाजार में 300 रुपये है, जबकि डीएपी के एक कट्टा की कीमत 1200 रुपये। मिलावट का खेल करने वाले गोदाम के अंदर सुपर खाद में मिट्टी और बदरपुर मिलाकर इसको कट्टों में भरकर पैक कर दिया करते थे। यहां से इस मिलावटी खाद को सहकारी समितियों को भेज दिया जाता था। मिलावट का खेल करने वाले इस तरह से किसानों को चूना लगाकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। सूत्रों की मानें तो कुछ और लोग भी मिलावट के इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं।
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इस तरह सप्लाई होती है खाद
बदायूं। इफ्को खाद का वितरण पूरे जिले में प्रशासन, कृषि विभाग और सहकारी संघ के नियंत्रण में होता है। खाद की आपूर्ति इफ्को से यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन को दी जाती है। इसका स्टॉक फेडरेशन के गोदामों में ही होता है। इसके बाद सहकारी समितियों की मांग पर फेडरेशन के गोदाम से खाद की सप्लाई सहकारी समितियों के लिए की जाती है। जिले में सहकारी विभाग की कुल 132 समितियां हैं।
वर्जन-
गोदाम के भीतर से डीएपी खाद के 380 बिना सिले हुए और 50 खाली कट्टे मिले हैं। खाद में मिलावट करने के लिए रखा गया कुछ कच्चा माल भी मिला है। यहां से एक इलेक्ट्रानिक तराजू भी कब्जे में लिया गया है। खाद में मिलावट की बात से प्रथम दृष्टया इंकार नहीं किया जा सकता। नमूना जांच के लिए भेजा गया है।
-आरके सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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डीएपी खाद का वितरण सहकारी समितियों के जरिए होता है। इसका स्टॉक यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन के गोदाम में किया जाता है। वहां क्या चल रहा था, मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है।
-एपी सिंह यादव, एआर कोऑपरेटिव
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मुझे माह अक्तूबर 2015 में जिला पीसीएफ द्वारा बीज भंडारण के लिए अधिकृत किया गया था। दिसंबर 2015 में बीज का प्रेषण करने के बाद उस गोदाम से मेरी तैनाती स्वत: खत्म हो गई थी। इसके बाद में वहां क्या हो रहा है, मुझे नहीं पता।
-विजय सिंह, भंडार नायक, पीसीएफ