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पिता की मौत के बाद किसान बीमा को भटक रहा पुत्र

Tue, 07 Feb 2017 11:28 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Tue, 07 Feb 2017 11:28 PM IST
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Farmers Insurance wandering son to father's death
पिता की मौत के बाद किसान बीमा को भटक रहा पुत्र - फोटो : अमर उजाला
समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के लाभ न देने को टहला दिया विनोद को
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विधानसभा चुनाव के दंगल में उतरे राजनीतिक दल और उनके प्रत्याशी किसानों के हितों की तमाम बातें कर रहे हैं, लेकिन किसानों के लिए सरकारी योजनाएं महज दिखावे तक सीमित हैं। किसानों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उझानी क्षेत्र के गांव तेलिया नगला पिपरौल पुख्ता खास के किसान विनोद शाक्य इसका उदाहरण हैं। वह पिता की मौत सड़क दुर्घटना में हो जाने के बाद से समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा योजना का लाभ लेने के लिए सरकारी दफ्तरों में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कहीं उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारी और कर्मचारी उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में टरका दे रहे हैं। थक-हारकर विनोद ने सरकारी योजनाओं से कुछ हासिल होने की उम्मीद ही छोड़ दी है।

किसान विनोद शाक्य तेलिया नगला के गांव के भवानी प्रसाद का बेटा है। भवानी प्रसाद उसावां थाना क्षेत्र के गांव गौंतरा में सड़क दुर्घटना में 30 जुलाई 2016 को गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसकी एफआईआर थाने में दर्ज है। पहले उनका इलाज बदायूं जिला अस्पताल में कराया गया। वहां, हालत गंभीर होने पर बरेली के सिद्धिविनायक अस्पताल में लंबा इलाज चला। वहां भी सुधार न होने पर उनको दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां इलाज के दौरान भवानी की 27 सितंबर को उनकी मौत हो गई। भवानी किसान थे और परिवार की माली हालत कमजोर होने से उनके बेटे विनोद को नाते-रिश्तेदारों से काफी उधार लेना पड़ा। विनोद पर केसीसी और होमलोन का भी बकाया है। गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे विनोद ने आर्थिक राहत के लिए किसानों के लिए संचालित सरकारी बीमा योजनाओं का लाभ पाने को सरकारी दफ्तरों में रुख किया। समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा योजना से मदद के लिए ग्राम प्रधान, लेखपाल, तहसील और इंश्योरेंस कंपनियों के चक्कर काट चुका है, लेकिन सब जगह से उसको टहला दिया गया। इंश्योरेंस कंपनी की ओर से यह कहकर टहला दिया गया कि समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा योजना 14 सिंतबर 2016 को शुरू हुई और उनके भवानी की दुर्घटना तिथि 30 जुलाई की है इसलिए उनका इस योजना में दावा नहीं बनता है। जबकि मृतक किसान है कि इंश्योरेंस कंपनी वाले गुमराह कर रहे हैं। दुर्घटना बीमा उनके पिता की मृत्यु वाली तिथि 29 सितंबर से माना जाना चाहिए। भले ही दुर्घटना दो महीने पहले हुई लेकिन मृत्यु बीमा योजना शुरू होने के बाद ही हुई। भवानी की 21 वर्षीय बेटी विमला की शादी होनी है और पत्नी रामप्यारी की  तबियत भी ठीक नहीं रहती है। भवानी प्रसाद का कहना है कि सरकारें किसानों के लिए बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणाएं करके वोट पाना चाहती हैं लेकिन उन योजनाओं के लाभ के नाम पर किसानों को टहला दिया जाता है।
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