ये विरोध थोड़ा अलग है: गुस्साए किसानों ने नगर पंचायत कार्यालय में बंद किए दर्जनों छुट्टा पशु, गेट पर जड़ा ताला
कछला इलाके में छुट्टा पशुओं को भीषण आतंक है। किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद करनी पड़ रही है। उन्होंने तमाम बार अधिकारियों से छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने की मांग की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
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बदायूं के कछला में छुट्टा पशुओं ने किसानों की रात की नींद और दिन का चैन उड़ा रखा है। फसल बचाने के लिए कड़ाके की ठंड में उन्हें रातभर जागकर खेतों पर रखवाली करनी पड़ रही है। बृहस्पतिवार सुबह किसानों का गुस्सा फूट पड़ा और वे चार दर्जन से ज्यादा पशुओं को घेरकर कछला नगर पंचायत कार्यालय ले गए। चौकीदार ने विरोध किया तो उसे खदेड़ दिया और गेट पर ताला डाल दिया। ईओ और चेयरमैन भी देर शाम तक किसानों को समझाने में असफल रहे।
कछला इलाके में छुट्टा पशुओं को भीषण आतंक है। किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद करनी पड़ रही है। उन्होंने तमाम बार अधिकारियों से छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने की मांग की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। लगातार हो रहे नुकसान पर बृहस्पतिवार को किसानों को गुस्सा फूट पड़ा।
सुबह से ही तमाम किसान लाठी-डंडे लेकर घर से निकल पड़े। उन्हें जहां भी छुट्टा पशु नजर आए घेरकर खदेड़ दिया। किसानों ने करीब चार दर्जन से ज्यादा छुट्टा पशुओं को खदेड़ते हुए कछला नगर पंचायत कार्यालय पहुंचा दिया। ऐसा उन्होंने दो-तीन बार किया गया। इसके बाद कार्यालय के गेट पर ताला डालकर बाहर खड़े हो गए।
मामले की सूचना पर चेयरमैन नरेश यादव और कई कर्मचारी मौके पर पहुंच। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। दोपहर बाद ईओ रतन कुमार पांडेय मौके पर पहुंचे तो उन्हें देख किसान भड़क गए। किसानों ने नगर पंचायत प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामा की वजह से शाम तक कार्यालय में बंद छुट्टा पशुओं को नहीं निकाला जा सका। किसान इस बाद पर अड़े थे कि पशुओं अस्थायी गोशाला बनवाकर वहां भेजा जाए लेकिन अफसर कह रहे थे इतनी बड़ी मात्रा में पशुओं को रखने के लिए न तो उनके पास गोशाला है न ही कोई इंतजाम। इसे लेकर देर शाम तक खींचतान चलती रही लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। किसानों ने भी नगर पंचायत कार्यालय का ताला नहीं खोला।
किसान रामसिंह और रामबाबू ने बताया कि छुट्टा पशुओं की वजह से आलू, सरसों समेत अन्य फसलों को काफी नुकसान हो चुका है। कड़ाके की ठंड में फसलों की रखवाली करना भी किसी जोखिम से कम नहीं है। इसकी शिकायत वह नगर पंचायत कार्यालय में भी कर चुके हैं। गंगाघाट पर भी छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। इस दौरान मेघपाल, पान सिंह, उदयवीर, गोविंद सिंह, आकाश, थान सिंह, सूरजपाल, कौशलेंद्र, महेशपाल, गोपाल सिंह आदि किसान मौजूद थे।
पशुओं की सामूहिक मौत के बाद बंद हो गई थी गोशाला
कछला में करीब चार साल पहले गोशाला थी। कड़ाके की ठंड के दौरान गोशाला में करीब एक दर्जन पशुओं की मौत हो गई थी। तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर गोशाला में बाकी बचे पशुओं को बिनावर क्षेत्र की गोशाला में शिफ्ट कर दिया गया था। इसके बाद से कछला में गोशाला नहीं है। हालांकि पशुधन विकास विभाग की ओर से वितरोई के पास एक बड़ी गोशाला के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन उसे बनने में अभी समय लगेगा।
कटरी में हजारों की संख्या में हैं छुट्टा पशु
ननाखेड़ा गांव के किसान चंद्रपाल के मुताबिक कटरी में तो जंगली सुअर भी हैं। छुट्टा गोवंशीय पशु तो हजारों की संख्या में हैं। जिन गांवों में गोशालाएं हैं, वहां पशुओं की देखरेख ठीक से नहीं की जाती है। किसान अगर पशुओं को गोशाला में पहुंचा भी देते हैं तो भी उन्हें चार-छह दिन बाद छोड़ दिया जाता है। कछला में भी ऐसे पशुओं की संख्या कम नहीं है।
कुछ लोगों ने छुट्टा पशु नगर पंचायत कार्यालय परिसर में लाकर बंद कर दिए थे। गेट पर ताला भी डाल दिया गया था, लेकिन वह खुलवाया जा चुका है। छुट्टा पशुओं की मौजूदा संख्या को देखते हुए अस्थायी गोशाला भी पर्याप्त साबित नहीं होगी। -रतन कुमार पांडेय, ईओ