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Budaun News: नालों पर कब्जे, इस बार भी सताएगा जलभराव
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नगर पालिका से छह सड़का तक बनी नाले पर दुकानें। संवाद
- फोटो : 1
बदायूं। मानसून की आहट के साथ ही शहर में जलभराव का खतरा फिर मंडराने लगा है। नगर पालिका प्रशासन भले ही तलीझाड़ नाला सफाई का दावा कर रहा हो, लेकिन अधिकांश बड़े नालों पर अतिक्रमण इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। नालों के ऊपर दुकानें, पक्के निर्माण और अस्थायी कब्जे होने के कारण कई स्थानों पर सफाई कार्य ढंग से नहीं हो पा रहा। ऐेसे में लोगों को एक बार फिर जलभराव से जूझना पड़ सकता है।
शहर में हालात यह हैं कि कचहरी से परशुराम चौक पर सड़क किनारे नाले पर दुकानें बनी हैं। यही हाल रोडवेज स्टैंड के सामने का है। इसके अलावा परशुराम चौक से जोगीपुरा रोड, शिव चौक से पनबाड़ी होते हुए सुभाष चौक पर नाले पर पूरी तरह से अतिक्रमण है। यही हाल चूना मंडी, छह सड़का आदि का है। यहां पर तो दुकानें ही नालों पर बनी हैं।
ऐसे में वर्षों से जमा सिल्ट, कूड़ा और प्लास्टिक की वजह से नालों में पानी आगे नहीं बढ़ पाता। बारिश शुरू होने पर इसी वजह से शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या होगी। गत वर्ष भी पनबाड़ी, छह सड़का, आवास विकास, शहबाजपुर, नेकपुर समेत बाजार में बारिश का पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया था, जिसकी वजह से बंद और अतिक्रमण नालों की सफाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी। इस बार भी नगर पालिका प्रशासन नालों की तलीझाड़ सफाई कराने का दावा कर रहा है।
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श्रमिकों के साथ हो सकता है हादसा
शहर में छह सड़क, जोगीपुरा, सुभाष चौक, अस्पताल रोड, रोडवेज बस स्टैंड समेत तमाम जगह ऐसी हैं जहां दुकानदारों ने नाला पूरी तरह पाट लिया है। ऐसे में जेसीबी से नालों की सफाई नहीं हो सकती है। इसके अलावा ऐसी जगहों पर श्रमिकों को नालों में उतराना खतरे से खाली नहीं है। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियां हादसे का कारण बन सकती हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून से पहले अतिक्रमण हटाकर नालों की गहराई तक सफाई नहीं कराई गई तो इस बार भी हल्की बारिश में सड़कें तालाब और मोहल्ले जलमग्न दिखाई देंगे।
यह प्रमुख समस्याएं
-अधिकांश बड़े नालों पर अतिक्रमण की समस्या।
-कई स्थानों पर मशीनों से सफाई संभव नहीं।
-नालों में जमा है सिल्ट और कूड़ा।
-बारिश में जलभराव का बढ़ सकता है खतरा।
-कर्मचारियों की सुरक्षा भी बनी बड़ी चुनौती।
प्रमुख नाले और उनकी लंबाई
-10 बड़े- आठ किलोमीटर
-14 मझोले- सात किलोमीटर
-46 छोटे- 13 किलोमीटर
शहर में कर्मचारियों की टीम लगाकर नालों की सफाई कराई जा रही है। मानसून आने से पहले सभी प्रमुख नालों की सफाई करा दी जाएगी। ताकि बारिश आने पर शहर में जलभराव की समस्या न हो। जहां नाले पाट दिए गए हैं वहां भी दुकानदारों पर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। -विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ
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शहर में हालात यह हैं कि कचहरी से परशुराम चौक पर सड़क किनारे नाले पर दुकानें बनी हैं। यही हाल रोडवेज स्टैंड के सामने का है। इसके अलावा परशुराम चौक से जोगीपुरा रोड, शिव चौक से पनबाड़ी होते हुए सुभाष चौक पर नाले पर पूरी तरह से अतिक्रमण है। यही हाल चूना मंडी, छह सड़का आदि का है। यहां पर तो दुकानें ही नालों पर बनी हैं।
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ऐसे में वर्षों से जमा सिल्ट, कूड़ा और प्लास्टिक की वजह से नालों में पानी आगे नहीं बढ़ पाता। बारिश शुरू होने पर इसी वजह से शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या होगी। गत वर्ष भी पनबाड़ी, छह सड़का, आवास विकास, शहबाजपुर, नेकपुर समेत बाजार में बारिश का पानी घरों और दुकानों तक पहुंच गया था, जिसकी वजह से बंद और अतिक्रमण नालों की सफाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी। इस बार भी नगर पालिका प्रशासन नालों की तलीझाड़ सफाई कराने का दावा कर रहा है।
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श्रमिकों के साथ हो सकता है हादसा
शहर में छह सड़क, जोगीपुरा, सुभाष चौक, अस्पताल रोड, रोडवेज बस स्टैंड समेत तमाम जगह ऐसी हैं जहां दुकानदारों ने नाला पूरी तरह पाट लिया है। ऐसे में जेसीबी से नालों की सफाई नहीं हो सकती है। इसके अलावा ऐसी जगहों पर श्रमिकों को नालों में उतराना खतरे से खाली नहीं है। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियां हादसे का कारण बन सकती हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून से पहले अतिक्रमण हटाकर नालों की गहराई तक सफाई नहीं कराई गई तो इस बार भी हल्की बारिश में सड़कें तालाब और मोहल्ले जलमग्न दिखाई देंगे।
यह प्रमुख समस्याएं
-अधिकांश बड़े नालों पर अतिक्रमण की समस्या।
-कई स्थानों पर मशीनों से सफाई संभव नहीं।
-नालों में जमा है सिल्ट और कूड़ा।
-बारिश में जलभराव का बढ़ सकता है खतरा।
-कर्मचारियों की सुरक्षा भी बनी बड़ी चुनौती।
प्रमुख नाले और उनकी लंबाई
-10 बड़े- आठ किलोमीटर
-14 मझोले- सात किलोमीटर
-46 छोटे- 13 किलोमीटर
शहर में कर्मचारियों की टीम लगाकर नालों की सफाई कराई जा रही है। मानसून आने से पहले सभी प्रमुख नालों की सफाई करा दी जाएगी। ताकि बारिश आने पर शहर में जलभराव की समस्या न हो। जहां नाले पाट दिए गए हैं वहां भी दुकानदारों पर कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। -विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ

नगर पालिका से छह सड़का तक बनी नाले पर दुकानें। संवाद- फोटो : 1

नगर पालिका से छह सड़का तक बनी नाले पर दुकानें। संवाद- फोटो : 1