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हाथी चला खूब लेकिन लड़खड़ा गया

Sat, 11 Mar 2017 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं। Updated Sat, 11 Mar 2017 11:13 PM IST
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Elephant has run
counting - फोटो : amar ujala
तीन मुस्लिम चेहरों पर दांव लगाने के बाद भी वोट न साध सकी बसपा
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिमों के ध्रुवीकरण का दांव खेलने के लिए जिले की तीन सीटों पर मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया था लेकिन उनकी यह रणनीति कामयाब नहीं हो सकी। नतीजतन, बिल्सी से बसपा के निवर्तमान विधायक हाजी मुर्सरत अली बिट्टन को भी हार का मुंह देखना पड़ा। दरअसल, मुस्लिम वोट बंट गया। हालांकि बसपा के मुस्लिम चेहरों को वोट काफी मिला। बिल्सी, सहसवान में बसपा के दोनों प्रत्याशी खूब लड़े और नजदीकी से हारे। अनुमान तो यह भी लगाया जा रहा है कि बसपा का परंपरागत वोट भी कुछ हद तक मोदी लहर में बह गया।

बसपा ने बिल्सी से हाजी बिट्टन के अलावा सहसवान से अरशद अली को और शेखूपुर से काजी रिजवान को चुनाव मैदान में उतारा था। इस तरह सपा से भी ज्यादा मायावती ने मुस्लिम चेहरे जिले में उतारकर मुस्लिमों का ध्रुवीकरण करने का दांव चला था। सोचा था कि इसका असर जिले की बाकी तीन सीटों पर भी होगा लेकिन मुस्लिम वोटर अच्छी-खासी तादाद में सपा की ओर चले गए। सहसवान में सपा प्रत्याशी ओमकार सिंह यादव की जीत इसी वजह से हो सकी। बिल्सी में बसपा की रणनीति भांपकर ही सपा ने कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व सांसद सलीम शेरवानी समेत कई मुस्लिम चेहरों को विमलकृष्ण अग्रवाल के पक्ष में चुनाव प्रचार को जुटाया। सांसद धर्मेंद्र यादव ने बाकायदा इसकी रणनीति बनाई थी कि मुस्लिम किसी भी तरह से बसपा की ओर जाने से रोके जा सकें लेकिन सारी कवायद बेअसर रही। मुस्लिम सपा और बसपा दोनों में बंट गया, जिसका लाभ बिल्सी में भी भाजपा को हुआ। शेखूपुर में भी बसपा की रणनीति सपा की ओर मुस्लिम वोटरों के रुझान ने फेल कर दी। इसका असर दूसरी विधानसभा सीटों पर भी पड़ा। बदायूं सदर सीट पर बसपा प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह दद्दा भी बहुत अधिक वोट हासिल नहीं कर पाए। चुनाव के दौरान शहर में हुई जनसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम वोटरों को सपा के साथ जाने पर भाजपा के जीतने का खौफ भी दिखाया था लेकिन उनके जादू चल नहीं सका। नतीजतन, बसपा को जिले में अपनी दो सीटें भी खोनी पड़ीं।
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