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बूस्टर डोज लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे निजी अस्पताल, गिर रही रैंक
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बदायूं। कोरोना टीकाकरण में बदायूं की रैंक नहीं सुधर रही। बूस्टर डोज के मामले में तो बदायूं प्रदेश स्तर पर 74 वें स्थान पर है। प्रदेश स्तर पर 30 मई को जारी आंकड़ों पर गौर करें तो बदायूं में अब तक 60 वर्ष से अधिक वाले 11017 लोगों को ही बूस्टर डोज दी जा सकी है।
हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर्स को छोड़ दें तो अन्य आयु वर्ग में बूस्टर डोज एक भी व्यक्ति को नहीं दी जा सकी है। निजी अस्पताल भी बूस्टर डोज में सहयोग नहीं कर रहे।
दरअसल, 60 वर्ष आयु से कम के लोगों को बूस्टर डोज के लिए कीमत चुकानी है और यह निजी अस्पताल में ही लगनी है। 60 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को बूस्टर डोज मुफ्त में सरकारी अस्पतालों में दी जा रही है। जिले के निजी अस्पतालों में बूस्टर डोज की सुविधा शुरू ही नहीं हो सकी है। लोग बूस्टर डोज लगवाना चाहते हैं पर निजी अस्पताल संचालक इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। पिछले दिनों सरकार ने टीकाकरण और बूस्टर डोज को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी।
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नई व्यवस्था के तहत दो डोज निशुल्क लगाई जाएंगी और बूस्टर डोज का शुल्क लिया जाएगा। हालांकि स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन कर्मियों और 60 वर्ष से अधिक आयु वालों को बूस्टर डोज भी निशुल्क लगेगी। 60 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को बूस्टर डोज के बदले 386.25 रुपये शुल्क तय किया गया है, इसमें 150 रुपये निजी अस्पताल को भी मिलेंगे। निजी अस्पतालों को टीकाकरण के लिए वैक्सीन खरीदनी है।
जिले में 40 पंजीकृत निजी अस्पताल ऐसे हैं जो कोरोना टीकाकरण के मानकों को पूरा करते हैं, लेकिन यह अस्पताल भी बूस्टर डोज के लिए आगे नहीं आ रहे। ऐसे में बूस्टर डोज के मामले में बदायूं बुरी तरह से पिछड़ रहा है। अन्य जिलों में 60 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को भी बूस्टर डोज का काम शुरू हो गया है, लेकिन बदायूं में हालात इसके विपरीत हैं।
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बूस्टर डोज में जिले की स्थिति
- स्वास्थ्य कर्मी- 8044
- फ्रंटलाइन वर्कर- 14096
- 60 वर्ष से अधिक आयु- 11017
- 12-14 आयु वर्ग- शून्य
- 15-17 आयु वर्ग- शून्य
- 18-44 आयु वर्ग- शून्य
- 45-59 आयु वर्ग- शून्य
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जिन निजी अस्पतालों के पास कोल्ड चेन है वहां टीकाकरण, खासकर बूस्टर डोज की व्यवस्था की गई है। 60 वर्ष से कम आयु के लोग निजी अस्पतालों में बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। इसके लिए उनको शुल्क देना होगा। निजी अस्पताल बूस्टर डोज लगाने को आगे नहीं आ रहे। कारण यह भी है कि अस्पताल संचालकों को लग रहा है कि अगर कम ही लोग डोज लगवाने आते हैं तो उनको नुकसान होगा। वायल खुलने के चार घर घंटे बाद वैक्सीन खराब हो जाती है। ऐसे में निजी अस्पताल संचालकों से बात की जा रही है।
-डॉ. मोहम्मद असलम, नोडल अधिकारी टीकाकरण
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हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर्स को छोड़ दें तो अन्य आयु वर्ग में बूस्टर डोज एक भी व्यक्ति को नहीं दी जा सकी है। निजी अस्पताल भी बूस्टर डोज में सहयोग नहीं कर रहे।
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दरअसल, 60 वर्ष आयु से कम के लोगों को बूस्टर डोज के लिए कीमत चुकानी है और यह निजी अस्पताल में ही लगनी है। 60 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को बूस्टर डोज मुफ्त में सरकारी अस्पतालों में दी जा रही है। जिले के निजी अस्पतालों में बूस्टर डोज की सुविधा शुरू ही नहीं हो सकी है। लोग बूस्टर डोज लगवाना चाहते हैं पर निजी अस्पताल संचालक इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। पिछले दिनों सरकार ने टीकाकरण और बूस्टर डोज को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी।
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नई व्यवस्था के तहत दो डोज निशुल्क लगाई जाएंगी और बूस्टर डोज का शुल्क लिया जाएगा। हालांकि स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन कर्मियों और 60 वर्ष से अधिक आयु वालों को बूस्टर डोज भी निशुल्क लगेगी। 60 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को बूस्टर डोज के बदले 386.25 रुपये शुल्क तय किया गया है, इसमें 150 रुपये निजी अस्पताल को भी मिलेंगे। निजी अस्पतालों को टीकाकरण के लिए वैक्सीन खरीदनी है।
जिले में 40 पंजीकृत निजी अस्पताल ऐसे हैं जो कोरोना टीकाकरण के मानकों को पूरा करते हैं, लेकिन यह अस्पताल भी बूस्टर डोज के लिए आगे नहीं आ रहे। ऐसे में बूस्टर डोज के मामले में बदायूं बुरी तरह से पिछड़ रहा है। अन्य जिलों में 60 वर्ष से कम आयु वाले लोगों को भी बूस्टर डोज का काम शुरू हो गया है, लेकिन बदायूं में हालात इसके विपरीत हैं।
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बूस्टर डोज में जिले की स्थिति
- स्वास्थ्य कर्मी- 8044
- फ्रंटलाइन वर्कर- 14096
- 60 वर्ष से अधिक आयु- 11017
- 12-14 आयु वर्ग- शून्य
- 15-17 आयु वर्ग- शून्य
- 18-44 आयु वर्ग- शून्य
- 45-59 आयु वर्ग- शून्य
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जिन निजी अस्पतालों के पास कोल्ड चेन है वहां टीकाकरण, खासकर बूस्टर डोज की व्यवस्था की गई है। 60 वर्ष से कम आयु के लोग निजी अस्पतालों में बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। इसके लिए उनको शुल्क देना होगा। निजी अस्पताल बूस्टर डोज लगाने को आगे नहीं आ रहे। कारण यह भी है कि अस्पताल संचालकों को लग रहा है कि अगर कम ही लोग डोज लगवाने आते हैं तो उनको नुकसान होगा। वायल खुलने के चार घर घंटे बाद वैक्सीन खराब हो जाती है। ऐसे में निजी अस्पताल संचालकों से बात की जा रही है।
-डॉ. मोहम्मद असलम, नोडल अधिकारी टीकाकरण