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नए कोर्स का इंतजार.. बच्चे फटी-पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 11 Jul 2022 12:52 AM IST
उझानी के कुड़ानरसिंहपुर विद्यालय में पुरानी किताबें दिखाते बच्चे। संवाद
उझानी के कुड़ानरसिंहपुर विद्यालय में पुरानी किताबें दिखाते बच्चे। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं/उझानी। परिषदीय स्कूलों में एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो चुका है। इस बार नई शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार सिलेबस से पढ़ाई होनी थी। तैयारी भी पूरी थी, लेकिन स्कूलों तक नए सिलेबस की किताब ही नहीं पहुंचीं। ऐसे में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों का पुरानी किताबों से पढ़ना मजबूरी हो गया है।

प्रधानाध्यापकों और अध्यापकों ने सीनियर कक्षाओं में दाखिला ले चुके बच्चों की पुरानी किताबें जूनियर बच्चों को मुहैया जरूर करा दी हैं, लेकिन वह भी सभी बच्चों के लिए नहीं मिल पाईं। बच्चे फटी-पुरानी किताबों से ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जिले में कोई भी ऐसा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय नहीं है, जहां सभी बच्चों को पुरानी किताबें मिल गईं हों। फटी-पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रहे बच्चों के अभिभावक बुटला के हरिओम और कुड़ा नरसिंहपुर निवासी प्रेमपाल कहते हैं कि एक अप्रैल को शैक्षिक सत्र शुरू हुआ। नियमानुसार सत्र शुरू होते ही बच्चों को नया कोर्स उपलब्ध हो जाना चाहिए। पुरानी किताबों से वैकल्पिक व्यवस्था कर ली जाए, लेकिन कॉपियां तो पुरानी नहीं चल सकतीं। पुरानी किताबें मिल जाने के बाद अभिभावकों के लिए बच्चों को मार्केट से कॉपियां खरीदनी पड़ी हैं। विभागीय जानकारी के मुताबिक- सत्र शुरू होने से पहले ही अध्यापकों को आभास हो गया था कि जुलाई के अंतिम सप्ताह या फिर अगस्त शुरुआत से पहले तक नया कोर्स उपलब्ध नहीं हो पाएगा। इसीलिए अध्यापकों ने कक्षा-पांच पास कर अगली कक्षा में दाखिला ले चुके बच्चों की किताबें लेकर उन्हें जूनियर बच्चों को मुहैया करा दिया। ऐसी कोई कक्षा नहीं है, जिसमें नौ-दस या फिर इससे अधिक बच्चे पुरानी किताबों से वंचित न हों। अध्यापक भी उन्हें जुगाड़ से पढ़ा रहे हैं।

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छुट्टियों में भी नहीं मिला तैयारी करने का मौका
एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद 30 मई से 15 जून तक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां हो गईं। शैक्षिक सत्र शुरू होने के आठ-नौ दिनों बाद भी बच्चों को नया कोर्स नहीं मिल पाया तो अभिभावकों ने पड़ोसी बच्चों की पुरानी किताबों की जुगाड़ शुरू कर दी लेकिन उन्हें किताबें नहीं मिल पाईं। इसके चलते बच्चे घरों पर तैयारी करने की बजाय खेलकूद में लगे रहे। किताबें चूंकि विभागीय स्तर से उपलब्ध कराई जाती हैं, सो मार्केट में उनकी उपलब्धता नहीं रहती।
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ये भी जानें
-कुल छात्र-छात्राओ की संख्या- चार लाख 912
-प्राथमिक स्कूल की संख्या- 1504
-उच्च प्राथमिक/ कंपोजिट विद्यालय-653
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किताबों का आवंटन शासन स्तर से किया जाना है। उम्मीद है कि जल्द ही किताबें आ जाएंगी। उसके बाद में उनका वितरण कराया जाएगा।
-आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए

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