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क्या-क्या हुआ विद्यालय में काम, प्रधानाध्यापक दें हिसाब
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बदायूं। शासन सरकारी विद्यालयों को कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर बेहतर करना चाहता है, इसके तहत परिषदीय विद्यालयों के एसएमसी के खातों में कंपोजिट ग्रांट भेजी गई थी, ताकि विद्यालय अच्छे दिखें। अब शासन ने विद्यालयों में भेजी गई कंपोजिट ग्रांट के बारे में जानकारी मांगी है। इसको लेकर बीएसए ने सभी प्रधानाध्यापकों से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद यह सूची शासन को उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार स्वच्छता अभियान पर अधिक ध्यान दे रही है। इसके चलते बीते वर्ष से कंपोजिट ग्रांट में भी बदलाव किया गया। पहले यह बजट स्कूल की रंगाई-पुताई व मरम्मत तक ही सीमित था, लेकिन अब छात्र संख्या के हिसाब से बजट दिया जा रहा है। इस बजट से परिषदीय स्कूल में हाथ धोने का साबुन, फिनायल, चूना, बाल्टी, मग, टायलेट ब्रश, टायलेट क्लीनर, नेल कटर आदि सामग्री बजट से मंगवाई जाए ताकि विद्यालय व बच्चे साफ नजर आएं। इसके तहत सरकार जनपद को कंपोजिट ग्रांट की धनराशि जनपद को उपलब्ध कराईं। बीएसए कार्यालय से सभी स्कूलों के कंपोजिट ग्रांट को भेज दिया गया, जिसके बाद प्रधानाध्यापकों की तरफ से काम कराये गए। अब शासन ने 2018-19, 2019-20 में भेजी गई कंपोजिट ग्रांट का हिसाब मांगा है कि किस विद्यालय में कितने रुपये किस काम पर खर्च किये गए हैं। इसको लेकर बीएसए ने सभी प्रधानाध्यापकों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
शासन ने दो साल की कंपोजिट ग्रांट के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। इसके बारे में सभी बीईओ और प्रधानाध्यापकों को बता दिया गया है कि वह जल्द ही संपूर्ण डाटा उपलब्ध करा दें।
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- रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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सरकार स्वच्छता अभियान पर अधिक ध्यान दे रही है। इसके चलते बीते वर्ष से कंपोजिट ग्रांट में भी बदलाव किया गया। पहले यह बजट स्कूल की रंगाई-पुताई व मरम्मत तक ही सीमित था, लेकिन अब छात्र संख्या के हिसाब से बजट दिया जा रहा है। इस बजट से परिषदीय स्कूल में हाथ धोने का साबुन, फिनायल, चूना, बाल्टी, मग, टायलेट ब्रश, टायलेट क्लीनर, नेल कटर आदि सामग्री बजट से मंगवाई जाए ताकि विद्यालय व बच्चे साफ नजर आएं। इसके तहत सरकार जनपद को कंपोजिट ग्रांट की धनराशि जनपद को उपलब्ध कराईं। बीएसए कार्यालय से सभी स्कूलों के कंपोजिट ग्रांट को भेज दिया गया, जिसके बाद प्रधानाध्यापकों की तरफ से काम कराये गए। अब शासन ने 2018-19, 2019-20 में भेजी गई कंपोजिट ग्रांट का हिसाब मांगा है कि किस विद्यालय में कितने रुपये किस काम पर खर्च किये गए हैं। इसको लेकर बीएसए ने सभी प्रधानाध्यापकों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
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शासन ने दो साल की कंपोजिट ग्रांट के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। इसके बारे में सभी बीईओ और प्रधानाध्यापकों को बता दिया गया है कि वह जल्द ही संपूर्ण डाटा उपलब्ध करा दें।
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- रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए