{"_id":"5e498a568ebc3e6eba535240","slug":"dustbin-scam-badaun-news-bly3961897189","type":"story","status":"publish","title_hn":"कूड़े में चली गई कूड़ादान घोटाले के जांच... भूले अधिकारी, अब नये खरीदने की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कूड़े में चली गई कूड़ादान घोटाले के जांच... भूले अधिकारी, अब नये खरीदने की तैयारी
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बदायूं। केंद्र सरकार स्वच्छता को लेकर देशभर में अभियान चला रही है ताकि गांव साफ सुथरे रहें और लोग बीमारियों से दूर रहें। इसके लिए बाकायदा बजट भी जारी कर रही है, लेकिन स्वच्छता अभियान के नाम पर मिलने वाले धन का नेता कैसे बंदरबांट कर रहे हैं, इसकी बानगी बदायूं में देखने को मिली थी। ग्रामीण क्षेत्र के नेताओं के इशारे पर 800 रुपये कीमत वाले कूड़ेदान को 7200 रुपये में खरीदा गया। जानकारी मिलने पर तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने इस पर जांच बैठा दी थी। जांच में घोटाला साबित हो गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। मामला शांत हो जाने के बाद अब एक बार फिर कूड़दान खरीदने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक-दो जगह कूड़ेदान खरीद भी लिए गए हैं।
जिले की ग्राम पंचायतों में 2018-19 मेें कूूड़ेदान खरीदने के निर्देश दिए गए थे, ताकि गांव में जगह-जगह इनको लगाया जा सके। इसके पीछे मंशा थी कि ग्रामीण इन कूड़ेदानों में अपना कूड़ा डालेंगे और घर-गांव को साफ रखेंगे।
निर्देश मिलने के बाद में ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की खरीद शुरू हो गई। इसी बीच किसी ने तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह से ब्लॉक अंबियापुर की कुछ ग्राम पंचायतों द्वारा मानकों की अनदेखी करने और कूड़ेदानों की अधिक कीमत दर्शाए जाने की शिकायत की। शिकायत मिलने पर डीएम ने जांच कराई तो कूड़ेदान की कीमत अधिक निकली, साथ ही अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। ऐसे में डीएम ने जिन ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की खरीद हुई थी उन सभी में कूड़ेदान का पेमेंट करने पर रोक लगा दी। इसके बाद पूरे जिले की जांच के लिए तत्कालीन डीएम ने पांच सदस्यीय कमेटी बनाई। इस कमेटी मेें सीओ, वरिष्ठ कोषाधिकारी, डीपीआरओ, जिला बचत अधिकारी और डीआरडीए के एई को शामिल किया गया। इस टीम ने इसकी हर पहलू पर जांच की, साथ ही शिकायत को सही पाया और रिपोर्ट डीएम को दी। इसके बाद में डीएम दिनेश कुमार सिंह का स्थानांतरण हो गया। उनके स्थानांतरण के बाद सांठगांठ कर इस जांच को दबा दिया गया। अब तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। अब मामला जब थोड़ा शांत हो गया है तो ग्राम पंचायतों में फिर से कूड़ेदान खरीदने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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जांच में सामने आया था इतने का घोटाला
जगह------------घोटाला
खंडुआ- चार लाख आठ हजार रुपये
अहमद नगर असौली-तीन लाख 26 हजार 40 रुपये
राजबरौलिया-दो लाख 44 हजार 80 रुपये
अतरपुर-एक लाख 84 हजार 300 रुपये
शरह बरौलिया-एक लाख 32 हजार 600 रुपये
पीपरी रघुनाथपुर-एक लाख तीन हजार 400 रुपये
औरगाबाद माफी-96 हजार 240 रुपये
इमलिया-96 हजार 240 रुपये
मिर्चापुर सौहर-93 हजार 750 रुपये
हैवतपुर-93 हजार 750 रुपये
बक्सा खलसा-82 हजार 860 रुपये
रसूलापुर-82 हजार 860 रुपये
सगराय-82 हजार 860 रुपये
इतनी ग्राम पंचायत में हुई खरीद-114
कुल भुगतान- 96 लाख 14 हजार 850 रुपये
असल कीमत- 44 लाख 67 हजार 760 रुपये
कुल घोटाला- 51 लाख 47 हजार 90 रुपये का
अब टोंटपुर करसरी में खरीदे गए कूड़ेदान
जिले में कूड़ादान घोटाला पकड़ में आने के बाद में किसी भी ग्राम पंचायत में कूड़ेदान की खरीद नहीं की गई, क्योंकि मामले में अभी भी जांच ही चल रही है। लेकिन इसी बीच अब दोबारा से कूड़ेदान की खरीद की शुरूआत होने लगी है। सबसे पहले कूड़ेदान ग्राम पंचायत टोंटपुर करसरी में खरीदे गए हैं।
कूड़ेदान खरीद में हुए घोटाले की जांच की गई थी। उसकी पूरी जांच रिपोर्ट को शासन के लिए भेज दिया गया है। अब जो भी कार्रवाई होगी, वह वहीं से होगी।
- निशा अनंत, सीडीओ
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जिले की ग्राम पंचायतों में 2018-19 मेें कूूड़ेदान खरीदने के निर्देश दिए गए थे, ताकि गांव में जगह-जगह इनको लगाया जा सके। इसके पीछे मंशा थी कि ग्रामीण इन कूड़ेदानों में अपना कूड़ा डालेंगे और घर-गांव को साफ रखेंगे।
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निर्देश मिलने के बाद में ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की खरीद शुरू हो गई। इसी बीच किसी ने तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह से ब्लॉक अंबियापुर की कुछ ग्राम पंचायतों द्वारा मानकों की अनदेखी करने और कूड़ेदानों की अधिक कीमत दर्शाए जाने की शिकायत की। शिकायत मिलने पर डीएम ने जांच कराई तो कूड़ेदान की कीमत अधिक निकली, साथ ही अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं। ऐसे में डीएम ने जिन ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की खरीद हुई थी उन सभी में कूड़ेदान का पेमेंट करने पर रोक लगा दी। इसके बाद पूरे जिले की जांच के लिए तत्कालीन डीएम ने पांच सदस्यीय कमेटी बनाई। इस कमेटी मेें सीओ, वरिष्ठ कोषाधिकारी, डीपीआरओ, जिला बचत अधिकारी और डीआरडीए के एई को शामिल किया गया। इस टीम ने इसकी हर पहलू पर जांच की, साथ ही शिकायत को सही पाया और रिपोर्ट डीएम को दी। इसके बाद में डीएम दिनेश कुमार सिंह का स्थानांतरण हो गया। उनके स्थानांतरण के बाद सांठगांठ कर इस जांच को दबा दिया गया। अब तक इस मामले में कोई भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। अब मामला जब थोड़ा शांत हो गया है तो ग्राम पंचायतों में फिर से कूड़ेदान खरीदने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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जांच में सामने आया था इतने का घोटाला
जगह------------घोटाला
खंडुआ- चार लाख आठ हजार रुपये
अहमद नगर असौली-तीन लाख 26 हजार 40 रुपये
राजबरौलिया-दो लाख 44 हजार 80 रुपये
अतरपुर-एक लाख 84 हजार 300 रुपये
शरह बरौलिया-एक लाख 32 हजार 600 रुपये
पीपरी रघुनाथपुर-एक लाख तीन हजार 400 रुपये
औरगाबाद माफी-96 हजार 240 रुपये
इमलिया-96 हजार 240 रुपये
मिर्चापुर सौहर-93 हजार 750 रुपये
हैवतपुर-93 हजार 750 रुपये
बक्सा खलसा-82 हजार 860 रुपये
रसूलापुर-82 हजार 860 रुपये
सगराय-82 हजार 860 रुपये
इतनी ग्राम पंचायत में हुई खरीद-114
कुल भुगतान- 96 लाख 14 हजार 850 रुपये
असल कीमत- 44 लाख 67 हजार 760 रुपये
कुल घोटाला- 51 लाख 47 हजार 90 रुपये का
अब टोंटपुर करसरी में खरीदे गए कूड़ेदान
जिले में कूड़ादान घोटाला पकड़ में आने के बाद में किसी भी ग्राम पंचायत में कूड़ेदान की खरीद नहीं की गई, क्योंकि मामले में अभी भी जांच ही चल रही है। लेकिन इसी बीच अब दोबारा से कूड़ेदान की खरीद की शुरूआत होने लगी है। सबसे पहले कूड़ेदान ग्राम पंचायत टोंटपुर करसरी में खरीदे गए हैं।
कूड़ेदान खरीद में हुए घोटाले की जांच की गई थी। उसकी पूरी जांच रिपोर्ट को शासन के लिए भेज दिया गया है। अब जो भी कार्रवाई होगी, वह वहीं से होगी।
- निशा अनंत, सीडीओ