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निकाह में दहेज, नाच-गाना, आतिशबाजी पर पाबंदी

Mon, 04 May 2015 12:23 AM IST
badaun
badaun Updated Mon, 04 May 2015 12:23 AM IST
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Dowry in marriage , dancing and music , Fireworks ban

ग्राम बेहटा डंबर नगर/मुहम्मद गंज में एक अजीमुश्शान इस्लाहे मुआशराह (समाज सुधार) कांफ्रेंस में मेहमाने खुसूसी निजामिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद के हजरत अल्लामा मुफ्ती जिआउद्दीन नक्शबंदी ने निकाह का इस्लामी तरीका बताया और कहा कि निकाह में खुतबा इसलिए रखा गया है कि निकाह कोई आम दुनिया का काम नहीं है। यह एक इबादत है दहेज, बारात, नाच-गाना, डीजे, डांस, ढोल-ताशा, बाजा और शराबखोरी का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है। यह सख्त नाजायजो हराम व जहन्नमी और शैतानी काम हैं। यहां मौजूद 70 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने हाथ उठाकर वादा किया कि वे इस बात पर पूरा अमल करेंगे।

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कांफ्रें स के सरपस्त हजरत शाह मुहम्मद सकलैन मियां और हजरत शेख सालिम कादरी ने वादा लिया कि इलाकेे में शादी के मौके पर नाच-गाना, डीजे-डांस और शराबखोरी नहीं करेंगे, तमाम मुसलमानों ने हाथ उठाकर कसम खाई कि वे ऐसा हरगिज नहीं करेंगे। हजरत शाह सकलैन मियां और हजरत सालिम मियां ने नेपाल में आए भूकंप पीड़ितों की मदद करने को कहा और कौम की सलामती, मुल्क में अमन के लिए दुआएं कीं।
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कांफ्रेंस का आगाज कारी मजहर हसन अशरफ ी संभल ने कु रआन की तिलावत पाक से किया। हाफि ज आमिल सकलैनी, हाफि ज दिलशाद सकलैन, हाफिज मुनफिक सालिमी और हसीब रौनक ने अपनी नात शरीफ  से कान्फ्रें स की रौनक बढ़ाई। मुफ्ती जाकिर हुसैन अशरफ ी ने कहा कि इस्लाम में सबसे बड़ी अहमियत दिल की है, इसलिए इंसान को अपना दिल साफ  रखना चाहिए। जिससे समाज में कोई बुराई पैदा न हो। मौलाना मकसूद सालिमी ने कहा कि हम तमाम लागों को दरगाह और खानकाहों के सूफ ी संतों से जुड़कर रहना चाहिए। यह हमें दुनिया में अमन की शिक्षा देते हैं। पैगंबर मुहम्मद साहब ने समाज सुधार और समाजसेवा पर बहुत जोर दिया है। कमेटी के सदर मौलाना सूफ ी रिफाकत सकलैनी ने अपने पूरे इलाके के लोगों से अपील की कि गांव-गांव मदरसे कायम करें। शिक्षा और एकता के बगैर दुनिया का कोई इंसान तरक्की नहीं कर सकता।
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली के रिसर्च स्कालर मौलाना अब्दुल मुईद अजहरी ने इस्लाम में पड़ोसी का हक बताया और कहा कि पड़ोसी की जात-पात, धर्म नहीं देखा जाता। इंसानाें को अपने-अपने पड़ोसी का खयाल रखना चाहिए। जिसके नतीजे में एक अच्छा समाज पैदा होगा। हमदर्द यूनीवर्सिटी देहली के डॉ. जफरूद्दीन बरकाती ने कहा अगर, हम सही मायने में मुसलमान हो जाएं और असली खानकाही तालीम पर अमल करें तो दुनिया में हर तरफ  अमन कायम हो जाएगा।
इस मौके पर मुमताज मियां सकलैनी, मौलाना राशिद सकलैनी, मौलाना तसनीम कादरी, महबूब सकलैनी, मौलाना मुजफ्फर मियां अशरफी, मौलाना युनूस, मौलाना सिद्दीक, मौलाना अकबर अली, मौलाना नूर खान, मौलाना असद सकलैनी, मौलाना जाफ र वामकी, हाफि ज शहजाद सकलैनी, मौलाना खालिद, मौलाना शमीम के अलावा दो सौ से ज्यादा उलेमा हुफ्फ ाज और इमामों ने शिरकत की।


मेहमान नवाजी में जुटे रहे लोग
मौलाना हाशिम, मौलाना सरवर, मौलाना रईस, शाने आलम की निगरानी में गांव बेहटा के तमाम लोगों ने मेहमान नवाजी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए पानी, शरबत और कई तरीके की खाने पीने की चीजों का इंतजाम किया गया। निजामत मौलाना फ हीम सकलैनी अजहरी ने की और तमाम लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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