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स्कूल वाले डीआइओएस की भी नहीं सुनते
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं।
Updated Wed, 08 Mar 2017 11:19 PM IST
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-16 वित्तविहीन स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधक नहीं दे रहे शिक्षकों का डाटा
-कई नोटिस दे चुके डीआईओएस ने मान्यता खत्म करने को चेताया
जिले के कई वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय खुद को जिला विद्यालय निरीक्षक के दायरे से बाहर मानकर उनके आदेशों को नजरंदाज किए हुए हैं। हठधर्मिता इस हद तक है कि पांच बार नोटिस देने के बाद भी 16 विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने अपने यहां कार्यरत अंशकालिक शिक्षकों का डाटा उपलब्ध नहीं कराया है, जिसके आधार पर इन शिक्षकों को प्रदेश सरकार की योजना के तहत विशेष प्रोत्साहन मानदेय दिया जाना है। इससे इन शिक्षकों का भी नुकसान हो रहा है।
डीआईओएस राकेश कुमार ने पिछले साल 22 सितंबर को जिले के सारे वित्तविहीन विद्यालयों से उनमें कार्यरत शिक्षकों का डाटा उनके अभिलेखों के साथ मांगा था लेकिन बहुत सारे विद्यालयों ने डाटा नहीं दिया तो 15 अक्तूबर को दोबारा डाटा मांगा। इसके बाद भी जिले के 18 विद्यालयों की हठधर्मिता जारी रही। इस पर डीआईओएस ने 12 नवंबर और पांच दिसंबर को इन विद्यालयों के प्रबंधकों तथा प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी की। दो मार्च को भी नोटिस जारी किया गया तो सिर्फ दो विद्यालयों ने ही डाटा दिया। अब भी 16 विद्यालयों ने डीआईओएस के नोटिस को हवा में उड़ा दिया है। इन विद्यालयों के लिए डीआईओएस ने अंतिम नोटिस जारी करके नौ मार्च तक शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराने का मौका दिया है। उन्होंने चेताया है कि अगर डाटा नहीं मिला तो वे सभी 16 विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति शासन को कर देंगे। डीआईओएस राकेश कुमार का कहना है कि शिक्षकों का डाटा न देकर इन विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य शासकीय योजना के प्रति उदासीनता प्रकट कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई शासन स्तर से भी की जाएगी।
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-कई नोटिस दे चुके डीआईओएस ने मान्यता खत्म करने को चेताया
जिले के कई वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय खुद को जिला विद्यालय निरीक्षक के दायरे से बाहर मानकर उनके आदेशों को नजरंदाज किए हुए हैं। हठधर्मिता इस हद तक है कि पांच बार नोटिस देने के बाद भी 16 विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने अपने यहां कार्यरत अंशकालिक शिक्षकों का डाटा उपलब्ध नहीं कराया है, जिसके आधार पर इन शिक्षकों को प्रदेश सरकार की योजना के तहत विशेष प्रोत्साहन मानदेय दिया जाना है। इससे इन शिक्षकों का भी नुकसान हो रहा है।
डीआईओएस राकेश कुमार ने पिछले साल 22 सितंबर को जिले के सारे वित्तविहीन विद्यालयों से उनमें कार्यरत शिक्षकों का डाटा उनके अभिलेखों के साथ मांगा था लेकिन बहुत सारे विद्यालयों ने डाटा नहीं दिया तो 15 अक्तूबर को दोबारा डाटा मांगा। इसके बाद भी जिले के 18 विद्यालयों की हठधर्मिता जारी रही। इस पर डीआईओएस ने 12 नवंबर और पांच दिसंबर को इन विद्यालयों के प्रबंधकों तथा प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी की। दो मार्च को भी नोटिस जारी किया गया तो सिर्फ दो विद्यालयों ने ही डाटा दिया। अब भी 16 विद्यालयों ने डीआईओएस के नोटिस को हवा में उड़ा दिया है। इन विद्यालयों के लिए डीआईओएस ने अंतिम नोटिस जारी करके नौ मार्च तक शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराने का मौका दिया है। उन्होंने चेताया है कि अगर डाटा नहीं मिला तो वे सभी 16 विद्यालयों की मान्यता प्रत्याहरण की संस्तुति शासन को कर देंगे। डीआईओएस राकेश कुमार का कहना है कि शिक्षकों का डाटा न देकर इन विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य शासकीय योजना के प्रति उदासीनता प्रकट कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई शासन स्तर से भी की जाएगी।
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