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नार्मल डिलीवरी हो सकती है आपरेशन को बदायूं जाइए
उझानी (बदायूं)।
Updated Fri, 12 Dec 2014 11:57 PM IST
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सरकार कहती है कि गर्भवती महिलाओं को घर से लेकर अस्पताल तक हर वह सुविधा मिले जो उनके और नवजात शिशु के लिए जरूरी हो लेकिन यहां सरकारी अस्पताल में तो आम सहूलियतों का भी अकाल है। 102 नंबर पर कॉल की तो एंबुलेंस घर से अस्पताल तक जरूर पहुंचा देगी। प्रसव को अगर आपरेशन की जरूरत हुई तो घरवालों को जननी सुरक्षा योजना की सुविधा के नाम पर यही सुनने को मिलेगा कि बदायूं ले जाइए यहां तो सिर्फ नार्मल डिलीवरी ही हो सकती है।
फर्स्ट रिफरल यूनिट (एफआरयू) की चिकित्सकीय सुविधा का दावा करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डिलीवरी केस के मामले में विभागीय उदासीनता की शिकायत कोई चार-छह दिन से नहीं बल्कि तीन महीना से है। डॉ. कृति सिंह सितंबर से लंबे अवकाश पर हैं। उनकी गैर मौजूदगी में गर्भवती महिलाएं प्रसव में दिक्कत पर आपरेशन की सुविधा हासिल नहीं कर सकतीं। उस वक्त मौत के मुहाने पर खड़ी गर्भवती महिलाआें के घरवालों के सामने उन्हें बदायूं ले जाकर महिला अस्पताल या प्राइवेट नर्सिंग होम भर्ती कराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। गर्भवती महिला के घरवाले आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराने को मजबूर हो जाते हैं।
आखिर क्यों नहीं नौकरी करना चाहते डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले कुछेक साल में तैनात डॉक्टरों में से बाल रोग विशेषज्ञ एके अवस्थी और डॉ. मुकेश सक्सेना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हासिल कर चुके हैं। मौजूदा डॉक्टरों में विकास मिश्र ने बीआरएस मांगा था लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। कृति सिंह के मामले में सूत्रों की मानें तो उन्हें अभी बीआरएस नहीं मिल सकता। वजह नौकरी कम हुई है।
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कैंपस में ही निवास करती हैं कृति सिंह
करीब तीन माह से अवकाश पर चल रहीं कृति सिंह को विभागीय अफसरों का संरक्षण प्राप्त है। वह अस्पताल परिसर में अपने सरकारी निवास में रहती हैं। बताते तो यहां तक हैं कि वह घर बैठे की मरीजों को ऑफ रिकार्ड ट्रीटमेंट मुहैया कराती हैं। बताने की जरूरत नहीं कि ऑफ रिकार्ड इलाज करने के पीछे डॉक्टर का फायदा क्या होता है। यह तो अफसर भी अच्छी तरह जानते हैं।
यह बात सही है कि जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आपरेशन की सुविधा मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। कृति सिंह अवकाश पर हैं। हिना सबदर के जरिए नार्मल डिलीवरी करा ली जाती है। वह अफसरों के सामने लेडी डॉक्टर की डिमांड रखेंगे। -डॉ. विश्वास अग्रवाल, चिकित्साधीक्षक।
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फर्स्ट रिफरल यूनिट (एफआरयू) की चिकित्सकीय सुविधा का दावा करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डिलीवरी केस के मामले में विभागीय उदासीनता की शिकायत कोई चार-छह दिन से नहीं बल्कि तीन महीना से है। डॉ. कृति सिंह सितंबर से लंबे अवकाश पर हैं। उनकी गैर मौजूदगी में गर्भवती महिलाएं प्रसव में दिक्कत पर आपरेशन की सुविधा हासिल नहीं कर सकतीं। उस वक्त मौत के मुहाने पर खड़ी गर्भवती महिलाआें के घरवालों के सामने उन्हें बदायूं ले जाकर महिला अस्पताल या प्राइवेट नर्सिंग होम भर्ती कराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता। गर्भवती महिला के घरवाले आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो प्राइवेट अस्पताल में प्रसव कराने को मजबूर हो जाते हैं।
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आखिर क्यों नहीं नौकरी करना चाहते डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले कुछेक साल में तैनात डॉक्टरों में से बाल रोग विशेषज्ञ एके अवस्थी और डॉ. मुकेश सक्सेना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हासिल कर चुके हैं। मौजूदा डॉक्टरों में विकास मिश्र ने बीआरएस मांगा था लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। कृति सिंह के मामले में सूत्रों की मानें तो उन्हें अभी बीआरएस नहीं मिल सकता। वजह नौकरी कम हुई है।
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कैंपस में ही निवास करती हैं कृति सिंह
करीब तीन माह से अवकाश पर चल रहीं कृति सिंह को विभागीय अफसरों का संरक्षण प्राप्त है। वह अस्पताल परिसर में अपने सरकारी निवास में रहती हैं। बताते तो यहां तक हैं कि वह घर बैठे की मरीजों को ऑफ रिकार्ड ट्रीटमेंट मुहैया कराती हैं। बताने की जरूरत नहीं कि ऑफ रिकार्ड इलाज करने के पीछे डॉक्टर का फायदा क्या होता है। यह तो अफसर भी अच्छी तरह जानते हैं।
यह बात सही है कि जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आपरेशन की सुविधा मुहैया नहीं करा पा रहे हैं। कृति सिंह अवकाश पर हैं। हिना सबदर के जरिए नार्मल डिलीवरी करा ली जाती है। वह अफसरों के सामने लेडी डॉक्टर की डिमांड रखेंगे। -डॉ. विश्वास अग्रवाल, चिकित्साधीक्षक।