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Budaun News: डीएम से मिले बर्खास्त कर्मचारी, कहा नियम विरूद्ध की गई कार्रवाई
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बदायूं। संविदा समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने शनिवार को 11 बजे कलक्ट्रेट पहुंचकर शिकायती पत्र दिया। उन्होंने नियम विरुद्ध कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने कहा दस नामों में जो दोषी थे उनको कार्रवाई से बचाया गया है, जो लोग दोषी नहीं थे उन पर कार्रवाई की गई है।
कर्मचारी लता चौहान का कहना है कि वह तीनों कर्मचारी एनएचएम के द्वारा सेवारत थे। अगर कोई लापरवाही पाई जाती है तो पहले 15 दिन का वेतन काटने का नियम है। कमेटी एक साल की वेतन वृद्धि रोक सकती थी। दूसरे जनपद में स्थानांतरण करने का अधिकारी भी कमेटी को है। गंभीर आरोपों में ही सेवा समाप्त की जाती है। लेकिन यहां पहली बार में ही सेवा समाप्त कर दी गई जो नियम के खिलाफ है।
कर्मचारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में वह तीनों लोग सीसीटीवी कैमरे में नहीं दिखाई दिए। उसकी डयूटी भी खत्म हो चुकी थी। इसके बाद भी सेवा समाप्त कर दी गई।
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कर्मचारी मुकेश का कहना है कि स्टटी मजिस्ट्रेट ने अपनी जांच में दस नाम दिए थे। जिसमें सबको अलग- अलग दोषी भी बताया गया था। लेकिन डीएम मनोज कुमार की स्वास्थ्य समिति की टीम ने दोषियों को बचाने का काम किया और निर्दोष कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। अगर यहां सुनवाई नहीं हुई तो वह कोर्ट जाने को मजबूर होंगे।
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गर्भवती महिला को भर्ती न करना और अस्पताल गेट पर प्रसव होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। - मनोज कुमार , डीएम बदायूं
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कर्मचारी लता चौहान का कहना है कि वह तीनों कर्मचारी एनएचएम के द्वारा सेवारत थे। अगर कोई लापरवाही पाई जाती है तो पहले 15 दिन का वेतन काटने का नियम है। कमेटी एक साल की वेतन वृद्धि रोक सकती थी। दूसरे जनपद में स्थानांतरण करने का अधिकारी भी कमेटी को है। गंभीर आरोपों में ही सेवा समाप्त की जाती है। लेकिन यहां पहली बार में ही सेवा समाप्त कर दी गई जो नियम के खिलाफ है।
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कर्मचारी जितेंद्र कुमार का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में वह तीनों लोग सीसीटीवी कैमरे में नहीं दिखाई दिए। उसकी डयूटी भी खत्म हो चुकी थी। इसके बाद भी सेवा समाप्त कर दी गई।
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कर्मचारी मुकेश का कहना है कि स्टटी मजिस्ट्रेट ने अपनी जांच में दस नाम दिए थे। जिसमें सबको अलग- अलग दोषी भी बताया गया था। लेकिन डीएम मनोज कुमार की स्वास्थ्य समिति की टीम ने दोषियों को बचाने का काम किया और निर्दोष कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। अगर यहां सुनवाई नहीं हुई तो वह कोर्ट जाने को मजबूर होंगे।
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गर्भवती महिला को भर्ती न करना और अस्पताल गेट पर प्रसव होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। - मनोज कुमार , डीएम बदायूं