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Budaun News: त्रिस्पर्शी योग में 2 नवंबर को होगी देव जागृति एकादशी
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ज्योतिषविद राजेश कुमार शर्मा
बदायूं। बीती छह जुलाई को देवशयनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य प्रतिबंधित हो गए थे, जो देव उठनी एकादशी से ही प्रारंभ होंगे।
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार देवोत्थान एकादशी का प्रारंभ एक नवंबर शनिवार को सुबह 9:14 बजे पर होगा। समापन दो नवंबर रविवार को सुबह 7:33 बजे होगा। उन्होंने बताया कि शास्त्र वर्णित एकादशी का व्रत पूजन उदया तिथि में किया जाता है, अतः यह पूर्णत: कहा जा सकता है कि देवोत्थान एकादशी का पर्व दो नवंबर को ही मान्य है। शेष जातकों की अपनी मर्जी रहेगी।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं पद्म पुराण में वर्णित एक विशेष योग त्रिस्पर्शी, जो कि एक दुर्लभ संयोग है, इस दिन प्राप्त हो रहा है। इसमें एक ही दिन में एकादशी, द्वादशी और रात्रि के अंतिम पहर में त्रयोदशी प्राप्त हो रही है। जातकों के लिए अत्यंत फलदाई और शुभ कारक सिद्ध होगी। इस एकादशी को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। इस दिन तुलसी से शालिग्रामजी का विवाह भी कराया जाता है, इस कारण से भारी संख्या में विवाह शादी भी होते हैं। एकादशी के पश्चात 15 दिसंबर तक विवाह शादियों की खूब धूम मची रहेगी। 15 दिसंबर से खरमास प्रारंभ होने के कारण मांगलिक कार्यों पर 15 जनवरी तक रोक लग जाएगी।
विवाह मुहूर्त
नवंबर में 02, 03, 05, 08, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25, और 30।
दिसंबर में 04, 05, 06, 08 और 15।
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ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार देवोत्थान एकादशी का प्रारंभ एक नवंबर शनिवार को सुबह 9:14 बजे पर होगा। समापन दो नवंबर रविवार को सुबह 7:33 बजे होगा। उन्होंने बताया कि शास्त्र वर्णित एकादशी का व्रत पूजन उदया तिथि में किया जाता है, अतः यह पूर्णत: कहा जा सकता है कि देवोत्थान एकादशी का पर्व दो नवंबर को ही मान्य है। शेष जातकों की अपनी मर्जी रहेगी।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं पद्म पुराण में वर्णित एक विशेष योग त्रिस्पर्शी, जो कि एक दुर्लभ संयोग है, इस दिन प्राप्त हो रहा है। इसमें एक ही दिन में एकादशी, द्वादशी और रात्रि के अंतिम पहर में त्रयोदशी प्राप्त हो रही है। जातकों के लिए अत्यंत फलदाई और शुभ कारक सिद्ध होगी। इस एकादशी को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है। इस दिन तुलसी से शालिग्रामजी का विवाह भी कराया जाता है, इस कारण से भारी संख्या में विवाह शादी भी होते हैं। एकादशी के पश्चात 15 दिसंबर तक विवाह शादियों की खूब धूम मची रहेगी। 15 दिसंबर से खरमास प्रारंभ होने के कारण मांगलिक कार्यों पर 15 जनवरी तक रोक लग जाएगी।
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विवाह मुहूर्त
नवंबर में 02, 03, 05, 08, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25, और 30।
दिसंबर में 04, 05, 06, 08 और 15।