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Budaun News: 17 पत्राचार के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं
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जिला अस्पताल। संवाद
- फोटो : बस अड्डा पर एटा के यात्रियों को बस में चढ़ने से रोकता बस स्टाफ।
बदायूं। शासन से 17 पत्राचार के बाद भी जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। इससे गंभीर रोगियों को चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल पा रहीं। सर्जन व बाल रोग विशेषज्ञ न होने से मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा। बिना देखे ही इमरजेंसी से उन्हें रेफर कर दिया जा रहा है।
सीएमओ और सीएमएस स्तर से डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए अब तक शासन स्तर पर 17 बार पत्राचार किया गया, लेकिन डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी। दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होती जा रहीं हैं। डॉक्टरों की भर्ती के लिए सीएमओ कार्यालय में तीन बार साक्षात्कार भी हुआ, लेकिन जिला अस्पताल के लिए एक भी डॉक्टर नहीं मिल सका। डॉक्टरों की कमी पूरी हो तब कहीं जाकर व्यवस्थाओं में सुधार आए।
ओपीडी में आते हैं रोजाना
1200 के करीब मरीज
जिला अस्पताल में 234 बेड हैं। यहां रोगियों को भर्ती करने की व्यवस्था है। साथ ही ओपीडी में हर रोज औसतन 1200 रोगी आते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष तैनाती 10 पदों पर ही है। डॉक्टरों के 19 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। जिला अस्पताल में लेवल दो के नौ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें दो पर ही तैनाती है। लेवल तीन पर नौ पदों में सिर्फ एक पद और लेवल चार के नौ पदों में सात पर तैनाती है।
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-- -- तीमारदारों की व्यथा-- -
दो साल के बेटे को जिला अस्पताल से लौटाया
बेहटा निवासी राजकुमार ने बताया कि दो साल के बालक रिषभ को जिला अस्पताल लेकर आए हैं। यहां इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी है। बच्चे को न तो देखा और न ही दवा दी। पूछने पर बताया कि यहां कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है।
जनरल सर्जन ही नहीं, ऑपरेशन के लिए मरीज को ले गए बरेली
चंदपुरा निवासी रामप्रकाश ने बताया कि पथरी के ऑपरेशन के लिए चाची को अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन यहां तो डॉक्टर ही नहीं है। मौजूद स्टाफ ने जनरल सर्जन न होने की बात कही तो मरीज को अब परिजन बरेली ले गए हैं।
-- -ये डॉक्टर नहीं-- -
बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, जनरल सर्जन, चर्म रोग विशेषज्ञ,
डॉक्टरों और विशेषज्ञों की तैनाती के लिए लगातार शासन को लिखा जा रहा है। जितने डॉक्टर हैं उनसे ही बेहतर काम कराने की कोशिश की जा रही है। मरीजों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए प्रयास लगातार प्रयास जारी है। -डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
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सीएमओ और सीएमएस स्तर से डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए अब तक शासन स्तर पर 17 बार पत्राचार किया गया, लेकिन डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी। दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होती जा रहीं हैं। डॉक्टरों की भर्ती के लिए सीएमओ कार्यालय में तीन बार साक्षात्कार भी हुआ, लेकिन जिला अस्पताल के लिए एक भी डॉक्टर नहीं मिल सका। डॉक्टरों की कमी पूरी हो तब कहीं जाकर व्यवस्थाओं में सुधार आए।
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ओपीडी में आते हैं रोजाना
1200 के करीब मरीज
जिला अस्पताल में 234 बेड हैं। यहां रोगियों को भर्ती करने की व्यवस्था है। साथ ही ओपीडी में हर रोज औसतन 1200 रोगी आते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष तैनाती 10 पदों पर ही है। डॉक्टरों के 19 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। जिला अस्पताल में लेवल दो के नौ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें दो पर ही तैनाती है। लेवल तीन पर नौ पदों में सिर्फ एक पद और लेवल चार के नौ पदों में सात पर तैनाती है।
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दो साल के बेटे को जिला अस्पताल से लौटाया
बेहटा निवासी राजकुमार ने बताया कि दो साल के बालक रिषभ को जिला अस्पताल लेकर आए हैं। यहां इमरजेंसी में तैनात स्टाफ ने मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी है। बच्चे को न तो देखा और न ही दवा दी। पूछने पर बताया कि यहां कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है।
जनरल सर्जन ही नहीं, ऑपरेशन के लिए मरीज को ले गए बरेली
चंदपुरा निवासी रामप्रकाश ने बताया कि पथरी के ऑपरेशन के लिए चाची को अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन यहां तो डॉक्टर ही नहीं है। मौजूद स्टाफ ने जनरल सर्जन न होने की बात कही तो मरीज को अब परिजन बरेली ले गए हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, जनरल सर्जन, चर्म रोग विशेषज्ञ,
डॉक्टरों और विशेषज्ञों की तैनाती के लिए लगातार शासन को लिखा जा रहा है। जितने डॉक्टर हैं उनसे ही बेहतर काम कराने की कोशिश की जा रही है। मरीजों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए प्रयास लगातार प्रयास जारी है। -डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल