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दातागंज के चार लड़के वृंदावन यमुना में डूबे
दातागंज
Updated Wed, 20 May 2015 12:12 AM IST
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मजदूरी करने को गुजरात जा रहे कस्बे के तीन लड़के वृंदावन (मथुरा) में यमुना में डूब गए। एक को सुरक्षित निकाल लिया गया। तीन लड़कों की डूबने की खबर से कस्बे में मातम छा गया। पीड़ित परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
कोतवाली क्षेत्र के गांव डहरपुर निवासी दीपक उर्फ भोले सोमवार को कस्बा के वार्ड संख्या दो निवासी विजय (16) पुत्र सप्पू उर्फ जितेंद्र, अंकित कश्यप (15) पुत्र मुनेंद्र कश्यप और वाल्मीकि बस्ती निवासी वीरू (18) पुत्र स्वर्गीय पप्पू वाल्मीकि के अलावा क्षेत्र निवासी रोहित और नन्हें मजदूरी करने को गुजरात के लिए गए थे। बताया जाता है कि वह सोमवार की रात में सभी छह लड़के वृंदावन में रुके थे। मंगलवार सुबह रोहित और नन्हे को छोड़कर बाकी चारों नहाने को यमुना में गए थे। पानी के तेज बहाव के कारण चारों गहरे पानी में डूब गए। बताते हैं कि उनके डूबने की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग बचाने दौड़ पड़े। उन्होंने भोले को किसी तरह निकाल लिया किंतु विजय, वीरू और अंकित का कोई पता नहीं चला। काफी देर तक गोताखोर और बाकी लोग उन तीनों की तलाश करते रहे। शाम करीब चार बजे यहां पर उक्त तीनों के डूबने की खबर उनके परिवारीजनों को मिली। तो उनमें कोहराम मच गया। कस्बे के तमाम लोग भी पीड़ित परिजनों के घरों को पहुंच गए। पीड़ित परिजन निजी गाड़ी से वृंदावन को रवाना हो गए। इस हादसे से कस्बे में मातम छाया हुआ है।
सिर पर सेहरा बांधने की हसरत रह गई अधूरी
दातागंज। वीरु की मां सुनीता नगर पंचायत में सफाई कर्मचारी के पद पर काम करती हैं। बेटे की डूबने से मौत की खबर सुनकर वह होशहवास ही खो बैठी हैं। रोते-रोते सुनीता ने बताया कि उन्होंने वीरु की शादी तय कर दी थी। जल्द ही शादी होने वाली थी। इसके लिए वह बस को भी किराए पर कर रहीं थीं, उन्हें क्या पता था कि ऐसा वक्त भी उनके सामने आएगा, जो बेटे के सिर पर सेहरा बांधने की हसरत भी उनकी पूरी नहीं हो सकेगी। वह इस बात को बार-बार दोहरा रही थीं, सो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो रहीं थीं।
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गाड़ी वालों ने दिखाई संवेदनशून्यता
दातागंज। जैसे ही डूबकर मरने की खबर पीड़ित के परिजनों को मिली तो वह मथुरा जाने के लिए निजी कार या अन्य गाड़ी करने को निकल पड़े थे। कई गाड़ी वालों से चलने को कहा गया किंतु सभी ने जाने से इंकार कर दिया। इस पर नगर पंचायत चेयरमैन राजीव गुप्ता ने कड़ी नाराजगी जताई। तब कहीं जाकर एक गाड़ी वाला वहां जाने को राजी हुआ। इस बात को लेकर भी कस्बे के लोगों में गाड़ी वालों के प्रति नाराजगी थी।
नानी ने पाला था विजय को
दातागंज। विजय जिस समय एक साल का था, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। वह मूल रूप से उझानी का रहने वाला था। उसके मामा मोहित ने बताया कि मां के निधन के बाद विजय को वह अपने घर ले आए। नानी ने उसका पालन-पोषण किया। विजय के पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। आज जब विजय की मौत की खबर नानी को मिली तो उन्हें इस खबर पर एतबार नहीं हुआ। पर जब औरों से जानकारी लगी तो वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहीं थीं।
हर समय पीड़ित परिजनों संग रहे चेयरमैन
दातागंज। नगर पंचायत चेयरमैन राजीव गुप्ता को जब इस हादसे की खबर मिली तैसे ही वह सभी पीड़ित परिजनों के यहां पहुंच गए। देर शाम तक वह उन्हीं के साथ रहे और हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
मुनेंद्र को नहीं पता उसका बेटा गुजरात गया
दातागंज। अंकित के पिता मुनेंद्र को यह भी पता नहीं है कि उनका बेटा मजूदरी करने को गुजरात गया है। इस बात को वह बार-बार दोहरा रहे थे। मुनेंद्र ने बताया कि कि चालक हैं सो जो गाड़ी मिल जाती है उसे ही चला लेते हैं। बेटे के यमुना में डूबने की खबर से वह काफी परेशान हैं। लोग उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव डहरपुर निवासी दीपक उर्फ भोले सोमवार को कस्बा के वार्ड संख्या दो निवासी विजय (16) पुत्र सप्पू उर्फ जितेंद्र, अंकित कश्यप (15) पुत्र मुनेंद्र कश्यप और वाल्मीकि बस्ती निवासी वीरू (18) पुत्र स्वर्गीय पप्पू वाल्मीकि के अलावा क्षेत्र निवासी रोहित और नन्हें मजदूरी करने को गुजरात के लिए गए थे। बताया जाता है कि वह सोमवार की रात में सभी छह लड़के वृंदावन में रुके थे। मंगलवार सुबह रोहित और नन्हे को छोड़कर बाकी चारों नहाने को यमुना में गए थे। पानी के तेज बहाव के कारण चारों गहरे पानी में डूब गए। बताते हैं कि उनके डूबने की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग बचाने दौड़ पड़े। उन्होंने भोले को किसी तरह निकाल लिया किंतु विजय, वीरू और अंकित का कोई पता नहीं चला। काफी देर तक गोताखोर और बाकी लोग उन तीनों की तलाश करते रहे। शाम करीब चार बजे यहां पर उक्त तीनों के डूबने की खबर उनके परिवारीजनों को मिली। तो उनमें कोहराम मच गया। कस्बे के तमाम लोग भी पीड़ित परिजनों के घरों को पहुंच गए। पीड़ित परिजन निजी गाड़ी से वृंदावन को रवाना हो गए। इस हादसे से कस्बे में मातम छाया हुआ है।
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सिर पर सेहरा बांधने की हसरत रह गई अधूरी
दातागंज। वीरु की मां सुनीता नगर पंचायत में सफाई कर्मचारी के पद पर काम करती हैं। बेटे की डूबने से मौत की खबर सुनकर वह होशहवास ही खो बैठी हैं। रोते-रोते सुनीता ने बताया कि उन्होंने वीरु की शादी तय कर दी थी। जल्द ही शादी होने वाली थी। इसके लिए वह बस को भी किराए पर कर रहीं थीं, उन्हें क्या पता था कि ऐसा वक्त भी उनके सामने आएगा, जो बेटे के सिर पर सेहरा बांधने की हसरत भी उनकी पूरी नहीं हो सकेगी। वह इस बात को बार-बार दोहरा रही थीं, सो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो रहीं थीं।
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गाड़ी वालों ने दिखाई संवेदनशून्यता
दातागंज। जैसे ही डूबकर मरने की खबर पीड़ित के परिजनों को मिली तो वह मथुरा जाने के लिए निजी कार या अन्य गाड़ी करने को निकल पड़े थे। कई गाड़ी वालों से चलने को कहा गया किंतु सभी ने जाने से इंकार कर दिया। इस पर नगर पंचायत चेयरमैन राजीव गुप्ता ने कड़ी नाराजगी जताई। तब कहीं जाकर एक गाड़ी वाला वहां जाने को राजी हुआ। इस बात को लेकर भी कस्बे के लोगों में गाड़ी वालों के प्रति नाराजगी थी।
नानी ने पाला था विजय को
दातागंज। विजय जिस समय एक साल का था, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। वह मूल रूप से उझानी का रहने वाला था। उसके मामा मोहित ने बताया कि मां के निधन के बाद विजय को वह अपने घर ले आए। नानी ने उसका पालन-पोषण किया। विजय के पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। आज जब विजय की मौत की खबर नानी को मिली तो उन्हें इस खबर पर एतबार नहीं हुआ। पर जब औरों से जानकारी लगी तो वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पा रहीं थीं।
हर समय पीड़ित परिजनों संग रहे चेयरमैन
दातागंज। नगर पंचायत चेयरमैन राजीव गुप्ता को जब इस हादसे की खबर मिली तैसे ही वह सभी पीड़ित परिजनों के यहां पहुंच गए। देर शाम तक वह उन्हीं के साथ रहे और हर संभव सहायता का भरोसा दिया।
मुनेंद्र को नहीं पता उसका बेटा गुजरात गया
दातागंज। अंकित के पिता मुनेंद्र को यह भी पता नहीं है कि उनका बेटा मजूदरी करने को गुजरात गया है। इस बात को वह बार-बार दोहरा रहे थे। मुनेंद्र ने बताया कि कि चालक हैं सो जो गाड़ी मिल जाती है उसे ही चला लेते हैं। बेटे के यमुना में डूबने की खबर से वह काफी परेशान हैं। लोग उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे।