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समाजवाद बदला और कविता का दौर भी: उदय प्रताप

Tue, 26 Apr 2022 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 26 Apr 2022 01:21 AM IST
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cultural
डा उदय प्रताप सिंह।संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। मुलायम सिंह यादव के गुरु पूर्व सांसद व वरिष्ठ कवि साहित्यकार उदय प्रताप सिंह आचमन संस्था से सम्मानित होने बदायूं पहुंचे थे। समारोह के बाद उन्होंने खास बातचीत में राजनीति व काव्य जगत दोनों ही विषयों पर दिल की बात कही। कहा कि समाजवाद पूरी जीवनशैली थी, लोग बहुत साधारण जीवन जीते थे। अब वक्त के साथ काफी कुछ बदला है तो समाजवाद इससे अछूता कैसे रह सकता है।
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समाजवादी पार्टी व मुलायम कुनबे में मची खींचतान को लेकर सपा के पूर्व राज्यसभा सांसद उदय प्रताप सिंह से सवाल दागा तो उन्होंने साफगोई से स्वीकार किया कि वक्त के साथ सपा में भी बदलाव हुआ है। कहा कि वह जनेश्वर मिश्र के साथ रहे जो सफेद कपड़े पहनते थे और बेहद सादगी से रहते थे। उनकी और मेरी पत्नियों का देहांत हो चुका था। एक दिन मैं चटख कुर्ता पहनकर कवि सम्मेलन से आया तो मिश्र ने कटाक्ष किया कि शायद पत्नी अपने कपड़े आपको दे गईं। इस प्रयोजन से वह चाहते थे कि मैं भी साधारण ही रहा करूं। कहा कि गांधी जी से समाजवाद काफी प्रेरित रहा और यह विचारधारा व जीवनशैली बन गया। खानपान, आचार व्यवहार सब साधारण था। हालांकि वक्त के साथ बदलाव जरूरी है।
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पहले मुलायम सिंह साइकिल से चुनाव प्रचार कर लेते थे पर अब नई पीढ़ी हेलिकॉप्टर से परहेज करेगी तो काम कैसे चलेगा। कहा कि दूसरे दलों की तरह समाजवाद और सपा भी बदली है।
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काव्य क्षेत्र में बदलाव पर उनका कहना था पहले जब हम लोगों को कवि सम्मेलन का निमंत्रण मिलता था तो पूछते थे कि मंच पर और कौन व किस स्तर के कवि रहेंगे, अब कवि केवल अपने पारितोषिक की बात पूछते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि नए कवियों में कई बहुत ऊर्जावान हैं। हम सोचते थे कि नई पीढ़ी कैसे नई चुनौतियों के लिए तैयार होगी पर कई नए कवि शानदार काम कर रहे हैं। उनका कहना था कि कवि, पत्रकार व लेखक को खुद्दार होना ही चाहिए। कई बड़े लोग हमसे प्रभावित होकर हमें किसी न किसी तरह उपकृत कर सकते हैं पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता की हमसे क्या अपेक्षा है। उन्होंने अपना एक शेर कहकर बात खत्म की।
जो सिर से लेकर पांव तक खुद्दार नहीं है, हाथों में कलम लेने का हकदार नहीं है।
बेहद करम है आपका पर दिल को क्या कहें, इंसा को खुदा कहने को तैयार नहीं है।
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