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‘मां तो मां होती है, उसमें चालाकी कहां होती है’
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बिल्सी में आयोजित काव्य कुंभ में कवियों को सम्मानित करते कमेटी के लोग। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बिल्सी। नगर के एक बरातघर में चल रहे दो दिवसीय काव्य कुंभ का रविवार को समापन हो गया। इस मौके पर काशीपुर से आए प्रतोश मिश्रा ने पढ़ा- मां तो मां होती है, उसमें चालाकी कहां होती है।
दिल्ली से आईं रीता अदा ने पढ़ा-
तुम्हारे लम्स की खुशबू बदन में रक्स करती है। तुम्हारी याद के गुल जब भी जुल्फों में लगाती हूं।
अमरोहा से आईं शशि त्यागी ने कहा- यूं आंसू न बहा, मैंने क़ुरबानी दी है। देश के चैन ओ अमन शीश निशानी दी है।
बदायूं के ललितेश ने कहा-
शीतल मंद पवन बहती है मेरे प्यारे गांव में। आ जाना जब फुर्सत हो तो पीपल की इस छांव में।
शाहजहांपुर से आए महेंद्रपाल सिंह ने कहा-
हुआ स्वतंत्र स्वदेश, धर्म की हो रही बर्बादी इसे आजादी कहते हैं।
सीतापुर से आए हरिओम दीक्षित ने कहा-
बहेगी काव्य की सरिता यहां रसधार बोलेगी, दुश्मन के गले पर हिंद की तलवार बोलेगी
गाजियाबाद से आईं प्रतिभा प्रीत ने कहा-
सुकूते शाम से दिल दुख रहा है कि अब आराम से दिल दुख रहा है
वो जो कल तक सुकूने जिंदगी था, अब उसके नाम से दिल दुख रहा है
हरदोई से आए कृतार्थ पाठक ने कहा-
लौटकर गांव चल नहीं पाए। तुमने रास्ता बदल लिया जबसे, एक भी पांव चल नहीं पाए।
औरैया से आए प्रमोद तिवारी ने पढ़ा- रक्त पिपासा अभी बुझी नहीं और कितना रक्त बहाओगे, केसर की प्यारी घाटी को क्या बंजर भूमि बनाओगे।
इनके अलावा शकुन सेंडे, कुमार हरीश, विक्रांत राजपूत, जिया हिंदवाल, बाल कवि निहारिका शर्मा, चंद्रभान सिंह चांद, नकुल शर्मा, राजबाला धैर्य, कुमार विवेक मानस, राजकुमार सिसोदिया, अशोक कृष्ण, पारो चौधरी, अतुल शर्मा, नरेंद्र गरल ने भी काव्य पाठ किया।
रविवार का कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के मुख्य प्रवर्तक हरिप्रताप सिंह राठौड़, विशिष्ट अतिथि पंडित मटरूमल शर्मा रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री शशि त्यागी ने की। लाफ्टर फेम अमित गुप्ता ने भी लोगों को यहां खूब हंसाया।
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इस मौके पर सोमेंद्र सोम, मोहनलाल मक्कार, विष्णु असावा, अचिन मासूम, पवन शंखधार, आकाश पाठक, शैलेंद्र देव मिश्र, प्रेम दक्ष, हर्षवर्धन मिश्रा, प्रशांत जैन व ललितेश कुमार सिंह का विशेष सहयोग रहा। संवाद
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दिल्ली से आईं रीता अदा ने पढ़ा-
तुम्हारे लम्स की खुशबू बदन में रक्स करती है। तुम्हारी याद के गुल जब भी जुल्फों में लगाती हूं।
अमरोहा से आईं शशि त्यागी ने कहा- यूं आंसू न बहा, मैंने क़ुरबानी दी है। देश के चैन ओ अमन शीश निशानी दी है।
बदायूं के ललितेश ने कहा-
शीतल मंद पवन बहती है मेरे प्यारे गांव में। आ जाना जब फुर्सत हो तो पीपल की इस छांव में।
शाहजहांपुर से आए महेंद्रपाल सिंह ने कहा-
हुआ स्वतंत्र स्वदेश, धर्म की हो रही बर्बादी इसे आजादी कहते हैं।
सीतापुर से आए हरिओम दीक्षित ने कहा-
बहेगी काव्य की सरिता यहां रसधार बोलेगी, दुश्मन के गले पर हिंद की तलवार बोलेगी
गाजियाबाद से आईं प्रतिभा प्रीत ने कहा-
सुकूते शाम से दिल दुख रहा है कि अब आराम से दिल दुख रहा है
वो जो कल तक सुकूने जिंदगी था, अब उसके नाम से दिल दुख रहा है
हरदोई से आए कृतार्थ पाठक ने कहा-
लौटकर गांव चल नहीं पाए। तुमने रास्ता बदल लिया जबसे, एक भी पांव चल नहीं पाए।
औरैया से आए प्रमोद तिवारी ने पढ़ा- रक्त पिपासा अभी बुझी नहीं और कितना रक्त बहाओगे, केसर की प्यारी घाटी को क्या बंजर भूमि बनाओगे।
इनके अलावा शकुन सेंडे, कुमार हरीश, विक्रांत राजपूत, जिया हिंदवाल, बाल कवि निहारिका शर्मा, चंद्रभान सिंह चांद, नकुल शर्मा, राजबाला धैर्य, कुमार विवेक मानस, राजकुमार सिसोदिया, अशोक कृष्ण, पारो चौधरी, अतुल शर्मा, नरेंद्र गरल ने भी काव्य पाठ किया।
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रविवार का कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भ्रष्टाचार मुक्ति अभियान के मुख्य प्रवर्तक हरिप्रताप सिंह राठौड़, विशिष्ट अतिथि पंडित मटरूमल शर्मा रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री शशि त्यागी ने की। लाफ्टर फेम अमित गुप्ता ने भी लोगों को यहां खूब हंसाया।
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इस मौके पर सोमेंद्र सोम, मोहनलाल मक्कार, विष्णु असावा, अचिन मासूम, पवन शंखधार, आकाश पाठक, शैलेंद्र देव मिश्र, प्रेम दक्ष, हर्षवर्धन मिश्रा, प्रशांत जैन व ललितेश कुमार सिंह का विशेष सहयोग रहा। संवाद