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प्रवचन के माध्यम से कृष्ण की बाल लीला का कराया दर्शन
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बिल्सी। माहेश्वरी भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा पुराण के पांचवें दिन रामचंद्राचार्य महाराज ने बाल कृष्ण की लीलाओं का दर्शन कराते हुए कहा कि भगवान की अनूठी बाल लीलाओं के माध्यम से ही जीव अपना कल्याण कर सकता है।
मंगलवार को प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि यद्यपि भगवान कृष्ण ने जन्म से लेकर अपने स्वधाम गमन पर्यंत जो लीलाएं की वह सब श्रवण कीर्तन और स्मरण करने योग्य हैं। उनके द्वारा जो बाल लीलाएं की गई वह सब जीव मात्र के कल्याण करने में और वास्तविक परमानंद की प्राप्ति कराने में सक्षम हैं। छठी वाले दिन भगवान ने पूतना जैसी दुर्दांत राक्षसी का वध खेल-खेल में ही कर दिया। मानव इन लीलाओं का दर्शन श्रवण कीर्तन और मनन करते हुए परमानंद अनुभूति प्राप्त करके भगवत प्राप्ति के लिए अपना मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
उन्होंने कहा कि विद्यावान व्यक्ति ही भगवत प्राप्ति करने में सक्षम होता है। विद्या का अर्थ मात्र पढ़ने लिखने से ही नहीं अपितु विद्या के माध्यम से अशिक्षित कबीर दास जैसे महापुरुषों ने भी भक्तों का दर्शन किया। इस मौके पर महंत मटरूमल शर्मा, प्रदीप शर्मा, शांति देवी, संजीव शर्मा, मंजुला शर्मा, दीपक माहेश्वरी, सरिता माहेश्वरी, मुकेश गुप्ता, आदि मौजूद रहे।
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मंगलवार को प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि यद्यपि भगवान कृष्ण ने जन्म से लेकर अपने स्वधाम गमन पर्यंत जो लीलाएं की वह सब श्रवण कीर्तन और स्मरण करने योग्य हैं। उनके द्वारा जो बाल लीलाएं की गई वह सब जीव मात्र के कल्याण करने में और वास्तविक परमानंद की प्राप्ति कराने में सक्षम हैं। छठी वाले दिन भगवान ने पूतना जैसी दुर्दांत राक्षसी का वध खेल-खेल में ही कर दिया। मानव इन लीलाओं का दर्शन श्रवण कीर्तन और मनन करते हुए परमानंद अनुभूति प्राप्त करके भगवत प्राप्ति के लिए अपना मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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उन्होंने कहा कि विद्यावान व्यक्ति ही भगवत प्राप्ति करने में सक्षम होता है। विद्या का अर्थ मात्र पढ़ने लिखने से ही नहीं अपितु विद्या के माध्यम से अशिक्षित कबीर दास जैसे महापुरुषों ने भी भक्तों का दर्शन किया। इस मौके पर महंत मटरूमल शर्मा, प्रदीप शर्मा, शांति देवी, संजीव शर्मा, मंजुला शर्मा, दीपक माहेश्वरी, सरिता माहेश्वरी, मुकेश गुप्ता, आदि मौजूद रहे।
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