फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Two months later there Killers took the clue

दो माह बाद भी नहीं लगा हत्यारों का सुराग

Mon, 08 Jun 2015 07:44 PM IST
badaun
badaun Updated Mon, 08 Jun 2015 07:44 PM IST
विज्ञापन

रिटायर्ड इंजीनियर दंपति हत्याकांड ठंडे बस्ते में चला गया है। दो महीने के बाद भी पुलिस और एसटीएफ को पड़ताल आगे बढ़ाने के लिए कोई लाइन नहीं मिली है। जांच उलझी हुई है। पुलिस के साथ एसटीएफ का खुफिया तंत्र भी फेल हो गया है। हत्याकांड में तफ्तीश की समीक्षा खुद आईजी जोन और डीआईजी रेंज कर रहे हैं। डीजीपी ने हत्यारों की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बावजूद इसके नतीजा सिफर है।

विज्ञापन

शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला ब्राह्मपुर निवासी पीडब्लूडी के रिटायर्ड इंजीनियर विजेंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी सन्नो के शव आठ अप्रैल को उनके घर की रसोई में मिले थे। बुजुर्ग दंपति की नृशंस हत्या की गई थी। नौ अप्रैल को आईजी जोन विजय मीणा और डीआईजी रेंज आरकेएस राठौर ने घटनास्थल का मुआयना किया। फारेंसिक एक्सपर्ट ने भी मौके से सैंपल जुटाए। आईजी ने सनसनीखेज वारदात का खुलासा करने के लिए एसटीएफ के साथ लोकल पुलिस की चार टीमों को लगाया था। हत्याकांड में अलीगढ़ के एसएसपी जे रविंद्र गौड़ का नाम भी उछला। दरअसल, विजेंद्र गुप्ता के पुत्र मुकुल गुप्ता को सात साल पहले पुलिस ने बरेली में एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था। फर्जी मुठभेड़ में ट्रेनी आईपीएस जे रविंद्र गौड़ पर भी आरोप लगे थे।
विज्ञापन

फर्जी मुठभेड़ में मारे गए मुकुल गुप्ता के पिता सिस्टम के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे थे। मुकुल गुप्ता के माता-पिता की हत्या हुई तो पूरा सिस्टम हिल गया। दावे जल्द खुलासा करने के हुए, लेकिन धीरे-धीरे डबल मर्डर डंडे बस्ते में चला गया। एसटीएफ के साथ लोकल पुलिस की चार टीमें भी दो महीने में हत्यारों की सुरागरसी नहीं कर सकी हैं। इतना ही नहीं अब तक पुलिस को तफ्तीश आगे बढ़ाने के लिए कोई लाइन नहीं मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सिस्टम पर सवालिया निशान
विजेंद्र गुप्ता के पुत्र मुकुल गुप्ता को 30 जून 2007 को बरेली में पुलिए ने एक फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था। मुकुल एक दवा कंपनी में काम करता था। मुकुल का कोई क्राइम रिकार्ड भी नहीं था। विजेंद्र गुप्ता ने दोषी पुलिस वालों को सजा दिलाने के लिए इस फर्जी मुठभेड़ में लंबी पैरवी की। 2010 में केस सीबीआई को सौंप दिया गया। फर्जी मुठभेड़ में ट्रेनी आईपीएफ जे रविंद्र गौड़ समेत 10 पुलिसकर्मी आरोपी बनाए गए थे। यूपी सरकार ने रविंद्र गौड़ के खिलाफ केस चलाने की अनुमति नहीं दी थी। विजेंद्र गुप्ता इसके लिए सिस्टम से लड़ रहे थे। मुकुल के माता-पिता की हत्या और दो महीने बाद भी इसका खुलासा न होना सिस्टम पर सवालिया निशान है।

आईपीएस रविंद्र गौड़ बोले, नो कमेंट
मुकुल गुप्ता फर्जी एनकाउंटर के आरोपों से घिरे वर्तमान में अलीगढ़ के एसएसपी जे रविंद्र गौड़ ने हत्याकांड और अब तक हत्यारों की गिरफ्तारी न होने की बात को नो कमेंट कह कर टाल दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है। कोई निर्दोष नहीं फंसना चाहिए। उम्मीद है कि जल्द हत्यारे पुलिस गिरफ्त में होंगे। अब तक की पड़ताल और हत्याकांड की उलझी गुत्थी पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। बता दें कि मुकुल गुप्ता के फर्जी एनकाउंटर के वक्त गौड़ बरेली में बतौर ट्रेनी आईपीएस तैनात थे। फर्जी एनकाउंटर में उनको भी आरोपी बनाया गया था।



हत्याकांड को जिसने भी अंजाम दिया वह काफी शातिर थे। मौके पर कोई सबूत नहीं छोड़ा। एसटीएफ और पुलिस अपना काम कर रही है। कुछ क्लू मिले हैं। फारेंसिक एक्सपर्ट की रिपोर्ट भी मिलने वाली है। हत्याकांड का जल्द खुलासा हो जाएगा। -आरकेएस राठौर, डीआईजी रेंज

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed