फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   The missing man was found in Ujani Jharkhand

उझानी में मिला झारखंड का लापता हुआ युवक

Sat, 24 Oct 2015 11:27 PM IST
उझानी
उझानी Updated Sat, 24 Oct 2015 11:27 PM IST
विज्ञापन
The missing man was found in Ujani Jharkhand
साल का आदिवासी रमेशचंद्र शनिवार को अपने मां-बाप और बहन के सामने आया तो तीनों की आंखों से आंसू टपक पड़े। खुशी के ये आंसू टपकते क्यों नहीं, उसकी एक झलक पाने के लिए घरवालों ने क्या-क्या न किया। लेकिन छह साल के लंबे अंतराल के बाद आए मिलन के लम्हे ने झारखंड निवासी मोतीलाल के परिवार के लिए बेशुमार खुशियों से सराबोर कर दिया।
विज्ञापन

रमेशचंद्र झारखंड की राजधानी रांची के बसिया थाना क्षेत्र में गुमला निवासी मोतीलाल का इकलौता बेटा है। मोतीलाल को दिल्ली के एनजीओ के जरिए पता लगा कि रमेश उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव सकरीजंगल निवासी मुगीश के पास है। मुगीश ने ही एनजीओ को रमेश के बारे में अवगत कराया था। मोतीलाल, उसकी पत्नी नागी और बेटी नानू तड़के एनजीओ के साथ सकरीजंगल पहुंचा तो उन्हें रमेश से मिलवा दिया गया। मां-बाप और बहन से मिलन के साक्षी बने ग्रामीणों में प्रधान रिजवान अहमद ने बताया कि मुगीश दिल्ली में व्यापार करता है। करीब दो साल पहले रमेश उसे दिल्ली में मिल गया था। बाद में वह मुगीश के साथ ही रहने लगा।
विज्ञापन

मुगीश के संपर्क में आने से पहले रमेश ने दिल्ली के एक होटल में काम किया। बकौल रमेश, होटल में उसे बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया। मालिक उसे बाहर निकलने नहीं देता था। तीन साल तक रमेश ने होटल में काम किया। शुरूआती साल में वह दिल्ली के किसी दबंग के चंगुल में रहा। इधर, मुगीश ने रमेश को उसके परिवार को सौंपे जाने की अभिलेखीय औपचारिकता कोतवाली आकर पूरी कराई। दोपहर में रमेश को लेकर एनजीओ के साथ उसके घरवाले चले गए लेकिन कोतवाली में रमेश से उके परिजनों के मिलन का जो भी साक्षी बना, वह भावुक हो उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन

नक्सली हमलों से डरा रहता था रमेशचंद्र
उझानी।
छह साल मिले बेटे रमेश के बारे में मोतीलाल की मानें तो झारखंड के कुछेक इलाकों में नक्सली हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। जब भी कोई घटना होती, तब-तब रमेश सहम जाता था। एक घटना के बारे में सुनकर छह साल पहले वह गायब हो गया। उसे किसी ने अगवा नहीं किया था। वह तो स्वेच्छा से ही घर छोड़कर निकल पड़ा था। पिता को शक है कि उसके दिलो-दिमाग पर नक्सली घटनाओं को खौफ छा गया। मोतीलाल के साथ पहुंचे एनजीओ से जुड़े कार्यकर्ता ने नाम गोपनीय रखने की कहकर बताया कि रमेश को उसके घरवालों से मिलाने में उसे एक महीना तक मशक्कत करनी पड़ी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed