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बुखार का कहर जारी, पांच लोग और मरे
बदायूं।
Updated Wed, 23 Sep 2015 11:48 PM IST
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जिले में बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। 24 घंटों में बुखार ने पांच जानें ले लीं। मरने वालों की संख्या 55 तक पहुंच गई है। बुखार सबसे ज्यादा कहर ग्रामीण इलाकों में बरपा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशें काम नहीं आ रहीं। स्थिति लगातार काबू से बाहर हो रही है। बुखार से मौतों से ताजा मामले कुंवरगांव, अलापुर और शहर के हैं।
शहर के मोहल्ला जवाहरपुरी निवासी लेखपाल कमल सक्सेना के पुत्र मोहित को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले निजी डॉक्टर से मोहित का इलाज करा रहे थे। बुधवार को मोहित ने दम तोड़ दिया। परिवार वालों में कोहराम है।
कुंवरगांव। क्षेत्र के गांव दरामनगर निवासी अशर्फी मौर्य की बेटी मीना को कई दिन से बुखार आ रहा था। बुधवार को घर पर ही मीना की मौत हो गई। मीना अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। अशर्फी की माली हालत काफी खराब है। इससे वह बेहतर इलाज भी नहीं करा सके। गांव में कई लोग बुखार से पीड़ित हैं।
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अलापुर। जगत ब्लाक के गांव बसियानी में 24 घंटों के भीतर एक बालक समेत बुखार से तीन लोगों की मौत हो गई। गांव के प्रीतपाल के नौ वर्षीय पुत्र प्रतीक को चार दिन पहले बुखार आया था। मंगलवार रात प्रतीक की मौत हो गई। ध्यानपाल की 17 वर्षीय पुत्री सनोज को तीन दिन से बुखार आ रहा था। सनोज ने भी दम तोड़ दिया। पुत्तू सिंह की पत्नी हरप्यारी की भी बुखार से मौत हो गई। गांव में दो दर्जन से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। तीन मौतों के बाद गांव में दहशत का माहौल है।
दातागंज में डेंगू से भाई-बहन की मौत
निजी डॉक्टर ने पुष्टि की, कई दिन से थे पीड़ित
दातागंज। जिले में बुखार से मौतों के बीच डेंगू से मौतों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। दातागंज के गांव नवदिया जयलाल में डेंगू से भाई-बहन की मौत हो गई। इसके बाद परिवार में कोहराम है। गांव में एक दर्जन से ज्यादा लोग बुखार से बीमार हैं। दोनों बालकों को निजी डॉक्टर ने डेंगू होने की पुष्टि की है।
नवदिया जयलाल गांव निवासी मान सिंह की 10 वर्षीय पुत्री शिवानी और सात वर्षीय पुत्र सचिन को कई दिन से बुखार आ रहा था। मान सिंह दोनों बच्चों का इलाज कस्बे के ही एक निजी डॉक्टर से करा रहे थे। जांच में डॉक्टर ने दोनों बालकों को डेंगू कोने की पुष्टि की थी। बुधवार को शिवानी और सचिन ने दम तोड़ दिया। दोनों बालकों की मौत से परिवार में कोहराम है। डेंगू से दो मौतों के बाद गांव वाले भी खौफजदा हैं।
गांवों में गंदगी से फैल रहे संक्रामक रोग
सफाई कर्मियों पर सख्ती नहीं आ रही काम
बदायूं। गांवों में भीषण गंदगी अब मौतों की वजह बनने लगी है। मलेरिया, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां गंदगी की वजह से ही फैल रही हैं। गांवों में मच्छरों की भरमार है। पंचायती राज विभाग की सफाई कर्मचारियों पर सख्ती काम नहीं आ रही।
अगस्त के पहले सप्ताह में जगत ब्लाक के गांव उपरैला से बुखार ने कहर वरपाना शुरू किया था। यहां बुखार से सात लोगों की मौत से शासन भी हिल गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग चेता। पूरे जिले में अभियान शुरू किया गया। तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में मौतों का सिलसिला नहीं थमा। गौर करने वाली बात यह है कि बुखार से मौतों के लिए दोष स्वास्थ्य विभाग को दिया जा रहा है। जबकि मलेरिया और डेंगू फैलने की मुख्य वजह गांवों में गंदगी है। डीएम शंभूनाथ ने भी गांवों में सफाई व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया था, लेकिन सफाई कर्मचारियों की मनमानी खत्म नहीं हुई। इसका खामियाजा पूरा जिला भुगत रहा है।
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शहर के मोहल्ला जवाहरपुरी निवासी लेखपाल कमल सक्सेना के पुत्र मोहित को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले निजी डॉक्टर से मोहित का इलाज करा रहे थे। बुधवार को मोहित ने दम तोड़ दिया। परिवार वालों में कोहराम है।
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कुंवरगांव। क्षेत्र के गांव दरामनगर निवासी अशर्फी मौर्य की बेटी मीना को कई दिन से बुखार आ रहा था। बुधवार को घर पर ही मीना की मौत हो गई। मीना अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। अशर्फी की माली हालत काफी खराब है। इससे वह बेहतर इलाज भी नहीं करा सके। गांव में कई लोग बुखार से पीड़ित हैं।
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अलापुर। जगत ब्लाक के गांव बसियानी में 24 घंटों के भीतर एक बालक समेत बुखार से तीन लोगों की मौत हो गई। गांव के प्रीतपाल के नौ वर्षीय पुत्र प्रतीक को चार दिन पहले बुखार आया था। मंगलवार रात प्रतीक की मौत हो गई। ध्यानपाल की 17 वर्षीय पुत्री सनोज को तीन दिन से बुखार आ रहा था। सनोज ने भी दम तोड़ दिया। पुत्तू सिंह की पत्नी हरप्यारी की भी बुखार से मौत हो गई। गांव में दो दर्जन से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। तीन मौतों के बाद गांव में दहशत का माहौल है।
दातागंज में डेंगू से भाई-बहन की मौत
निजी डॉक्टर ने पुष्टि की, कई दिन से थे पीड़ित
दातागंज। जिले में बुखार से मौतों के बीच डेंगू से मौतों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। दातागंज के गांव नवदिया जयलाल में डेंगू से भाई-बहन की मौत हो गई। इसके बाद परिवार में कोहराम है। गांव में एक दर्जन से ज्यादा लोग बुखार से बीमार हैं। दोनों बालकों को निजी डॉक्टर ने डेंगू होने की पुष्टि की है।
नवदिया जयलाल गांव निवासी मान सिंह की 10 वर्षीय पुत्री शिवानी और सात वर्षीय पुत्र सचिन को कई दिन से बुखार आ रहा था। मान सिंह दोनों बच्चों का इलाज कस्बे के ही एक निजी डॉक्टर से करा रहे थे। जांच में डॉक्टर ने दोनों बालकों को डेंगू कोने की पुष्टि की थी। बुधवार को शिवानी और सचिन ने दम तोड़ दिया। दोनों बालकों की मौत से परिवार में कोहराम है। डेंगू से दो मौतों के बाद गांव वाले भी खौफजदा हैं।
गांवों में गंदगी से फैल रहे संक्रामक रोग
सफाई कर्मियों पर सख्ती नहीं आ रही काम
बदायूं। गांवों में भीषण गंदगी अब मौतों की वजह बनने लगी है। मलेरिया, डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां गंदगी की वजह से ही फैल रही हैं। गांवों में मच्छरों की भरमार है। पंचायती राज विभाग की सफाई कर्मचारियों पर सख्ती काम नहीं आ रही।
अगस्त के पहले सप्ताह में जगत ब्लाक के गांव उपरैला से बुखार ने कहर वरपाना शुरू किया था। यहां बुखार से सात लोगों की मौत से शासन भी हिल गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग चेता। पूरे जिले में अभियान शुरू किया गया। तमाम कोशिशों के बाद भी जिले में मौतों का सिलसिला नहीं थमा। गौर करने वाली बात यह है कि बुखार से मौतों के लिए दोष स्वास्थ्य विभाग को दिया जा रहा है। जबकि मलेरिया और डेंगू फैलने की मुख्य वजह गांवों में गंदगी है। डीएम शंभूनाथ ने भी गांवों में सफाई व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया था, लेकिन सफाई कर्मचारियों की मनमानी खत्म नहीं हुई। इसका खामियाजा पूरा जिला भुगत रहा है।