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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Rakesh Gupta ration scam so big !

तो बड़ा राशन घोटाला किया राकेश गुप्ता ने!

Mon, 20 Jun 2016 11:28 PM IST
Updated Mon, 20 Jun 2016 11:28 PM IST
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जवाहर बाग कांड के बाद सुर्खियों में आए राकेश गुप्ता के खिलाफ विभाग ने कोऑपरेटिव एक्ट की धारा-37 के तहत नोटिस जारी कर दिया है। यह कार्रवाई राकेश गुप्ता की तैनाती वाली प्रसिद्धपुर सहकारी समिति के रिकॉर्ड गायब होने के मामले में की गई है। राकेश गुप्ता यहां बतौर सचिव तैनात था। पाया जा रहा है कि समिति का सारा रिकॉर्ड गायब है। इससे बड़े घोटाले की आशंका जाहिर की जा रही है।
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दो जून को जवाहर बाग में हुई घटना के बाद से फरार चल रहे राकेश गुप्ता को 17 जून को उसहैत पुलिस ने अटैना घाट के पास से गिरफ्तार कर लिया था। सचिव पद से राकेश गुप्ता को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है। आशंका है कि सचिव रहते राकेश गुप्ता ने यहां बड़ा घोटाला किया है। समिति के सभी रिकार्ड भी गायब हैं। ऐसे में एआर कोऑपरेटिव एपीएस यादव ने समिति के रिकार्ड का अधिग्रहण करने के लिए राकेश गुप्ता के खिलाफ कोऑपरेटिव एक्ट की धारा 37 के तहत नोटिस जारी किया है। नोटिस उसके घर पर चस्पा किया जाएगा। इसके बाद भी अगर रिकार्ड नहीं मिलता है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
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इसी सप्ताह आ सकती है  जांच रिपोर्ट
बदायूं। राकेश गुप्ता की तैनाती वाली प्रसिद्धपुर सहकारी समिति की जांच के लिए बनाई गई दो सदस्यों की कमेटी इसी सप्ताह अपनी जांच रिपोर्ट सौंप सकती है। राकेश गुप्ता को बर्खास्त किए जाने के बाद एआर कोऑपरेटिव ने समिति की जांच के लिए दो सदस्यों की कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद साफ हो जाएगा कि प्रसिद्धपुर समिति पर कितना गोलमाल हुआ है।
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नक्सली कनेक्शन पर खुफिया एजेंसियां सतर्क
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। जवाहर बाग के खलनायक रामवृक्ष यादव के नक्सली कनेक्शन को लेकर छिड़ी बहस के बीच खुफिया एजेंसियों की नजर बदायूं पर टिक गई है। रामवृक्ष यादव का बदायूं में भी बड़ा नेटवर्क था। जवाहर बाग कांड में बदायूं के राकेश गुप्ता और वीरेश के नाम आने के बाद खुफिया एजेंसियां इनके मददगारों को ट्रेस करने की कोशिश कर रही हैं।

जवाहर बाग कांड के टॉप 20 आरोपियों में से दो राकेश गुप्ता और वीरेश बदायूं के हैं। मुख्य खलनायक रामवृक्ष यादव कई बार बदायूं आया था। उसे यहां से मदद भी मिलती थी। जवाहर बाग की घटना के बाद से बहस छिड़ी हुई है कि रामवृक्ष के नक्सलियों से कहीं कनेक्शन तो नहीं थे। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियों को इस संबंध में ठोस सुराग नहीं मिला है, लेकिन रामवृक्ष के बदायूं के मददगारों और नक्सली कनेक्शन को लेकर बदायूं खुफिया एजेंसियों के रडार पर आ गया है। इधर, राकेश गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद उझानी के गांव रियोनइया निवासी वीरेश यादव की गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।
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