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हत्या में महिला और उसके साथी को उम्रकैद, जुर्माना
बदायूं, ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:14 PM IST
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-आरोपी महिला के पति की हुई थी हत्या
-साढ़े सात साल पहले जवाहरपुरी में हुई थी वारदात
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम रईस अहमद ने पति की हत्या में नामजद पत्नी और उसके साथी को दोषी करार देते हुए दोनों को उम्रकैद की कड़ी सजा सहित 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
वारदात करीब साढे़ सात साल पहले सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मोहल्ला जवाहरपुरी में हुई थी। बरेली के कस्बा बहेड़ी निवासी जयंती प्रसाद सक्सेना ने सीजेएम कोर्ट में 156(3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया था कि उसका पुत्र राजीव कुमार मोहल्ला जवाहरपुरी में किराए पर रहता था। उसके घर पर मोहल्ला शहबाजपुर निवासी मुकेश साहू पुत्र रामनिवास का आना-जाना था। 11 जून 2009 को शाम करीब छह-सात बजे आरोपी मुकेश ने उसे फोन करके बताया कि उसके पुत्र की मृत्यु हो गई है। वह जब बदायूं पहुंचा तो उसने देखा कि उसके पुत्र का शव कमरे में तख्त पर पड़ा था, जिसके नाक, मुंह से खून निकल रहा था। मृतक की पत्नी प्रीति सक्सेना व उसकी सास कमलिनी सक्सेना तथा ससुर प्रमोद कुमार वहीं मौजूद थे। सीजेएम ने परिवादी का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष सिविल लाइन को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिया। विवेचना में आरोपी मुकेश साहू और मृतक की पत्नी प्रीति का नाम उजागर हुआ। विद्वान न्यायाधीश रईस अहमद ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद आरोपी पत्नी और उसके साथी को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की कड़ी सजा सहित दोनों को 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
-साढ़े सात साल पहले जवाहरपुरी में हुई थी वारदात
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम रईस अहमद ने पति की हत्या में नामजद पत्नी और उसके साथी को दोषी करार देते हुए दोनों को उम्रकैद की कड़ी सजा सहित 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
वारदात करीब साढे़ सात साल पहले सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मोहल्ला जवाहरपुरी में हुई थी। बरेली के कस्बा बहेड़ी निवासी जयंती प्रसाद सक्सेना ने सीजेएम कोर्ट में 156(3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया था कि उसका पुत्र राजीव कुमार मोहल्ला जवाहरपुरी में किराए पर रहता था। उसके घर पर मोहल्ला शहबाजपुर निवासी मुकेश साहू पुत्र रामनिवास का आना-जाना था। 11 जून 2009 को शाम करीब छह-सात बजे आरोपी मुकेश ने उसे फोन करके बताया कि उसके पुत्र की मृत्यु हो गई है। वह जब बदायूं पहुंचा तो उसने देखा कि उसके पुत्र का शव कमरे में तख्त पर पड़ा था, जिसके नाक, मुंह से खून निकल रहा था। मृतक की पत्नी प्रीति सक्सेना व उसकी सास कमलिनी सक्सेना तथा ससुर प्रमोद कुमार वहीं मौजूद थे। सीजेएम ने परिवादी का प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष सिविल लाइन को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिया। विवेचना में आरोपी मुकेश साहू और मृतक की पत्नी प्रीति का नाम उजागर हुआ। विद्वान न्यायाधीश रईस अहमद ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। अभियोजन की ओर से एडीजीसी जगत सिंह यादव और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद आरोपी पत्नी और उसके साथी को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की कड़ी सजा सहित दोनों को 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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