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जिपं कार्यालय में सदस्यों और एएमए के बीच हाथापाई
बदायूं, ब्यूरो
Updated Thu, 04 Aug 2016 11:37 PM IST
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जिपं कार्यालय में सदस्यों और एएमए के बीच हाथापाई
- फोटो : अमर उजाला
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संदिग्ध फाइलों के चक्कर में छीनाझपटी पर बढ़ा विवाद
मौके पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को साथ ले गई थाने
निर्माण कार्यों की निविदाएं अखबारों में छपने के बाद और बिना शासन से अनुमति लिए एस्टीमेट तैयार कराने का आरोप लगाते हुए जिला पंचायत सदस्यों ने निर्माण कार्यों की फाइलों को शाम चार बजे अपने कब्जे में ले लिया। इन संदिग्ध फाइलों को लेने के चक्कर में जिला पंचायत कार्यालय गुरुवार शाम चार बजे अखाड़ा बन गया। जमकर हाथापाई हुई। मौके पर पहुंची पुलिस ने फाइलें कर्मचारियों को दिला दीं। जिला पंचायत सदस्यों एवं अपर मुख्य अधिकारी समेत कई कर्मचारियों को सिविल लाइंस थाने ले गई।
बृहस्पतिवार शाम चार बजे जिला पंचायत सदस्य धीरज सक्सेना, दमयंती वर्मा, प्रेमपाल, अनीता भारती, ओमप्रकाश सिंह, राजवती वर्मा, वीरप्रताप, विराट दुबे आदि जिला पंचायत सदस्यों ने निर्माण कार्यों का एस्टीमेट बाद में नियम विरुद्ध तरीके से बनाने का आरोप लगाते हुए फाइलों को कब्जे में लेने का प्रयास किया। पहले ही फाइलें कर्मचारियों ने अपने कब्जे ले ली थीं, लेकिन करीब 27 फाइल भाजपा सदस्यों के कब्जे में थीं।
इन फाइलों को छीनने का आरोप लगाते हुए कार्यालय में गुंडागर्दी फैलाने की सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर गई पुलिस के सामने अपर मुख्य अधिकारी और कर्मचारी जिला पंचायत सदस्यों से फाइलें लेने लगे। इससे दोनों पक्षों में पुलिस के सामने झगड़ा होने लगा। पुलिस फाइलें कर्मचारियों को दिलाकर दोनों पक्षों को थाने ले गई। इस दौरान एसएसआई संजय कुमार सिंह की भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों से तीखी नोकझोंक हो गई। बाद में दोनों पक्षों का सिविल लाइंस थाने में समझौता हो गया। जिला पंचायत सदस्यों ने इसकी शिकायत डीएम से करने की बात कही है।
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यह था पूरा मामला
बदायूं। जिला पंचायत बोर्ड बैठक में करोड़ों रुपये के 273 प्रस्ताव पास किए गए थे, जिनके निर्माण कार्यों का विज्ञापन दो समाचार पत्रों में 19 जुलाई को निकला था। इसमें तमाम कार्य 10 लाख रुपये से ऊपर के थे, जिनकी अनुमति नियमानुसार शासन से पहले लेनी होती है। जिला पंचायत सदस्यों का आरोप था, इन फाइलों पर शासन की अनुमति लेने से पहले ही अखबारों में विज्ञप्ति छाप दी गई थी, जबकि इनका एस्टीमेट अभी तक तैयार नहीं हुआ था। यह नियम विरुद्ध है, यह कहते हुए फाइलों को भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने अपने कब्जे में ले लिया था, जिससे कि उन्हें डीएम और अन्य अधिकारियों को दिखाकर कार्रवाई करवा सकें। इन्हीं फाइलों को सदस्यों और कर्मचारियों में छीनाझपटी मच गई थी, जिसमें 27 फाइल सदस्यों के कब्जे में आ गई थीं, जिन्हें पुलिस ने वापस करा दिया था।
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जिला पंचायत सदस्यों ने कर्मचारियों से निर्माण कार्यों से संबंधित फाइलें छीनने की कोशिश की। इससे कर्मचारियों में भय का माहौल है। उन्हें फाइलें चाहिए हैं, तो जिला पंचायत अध्यक्ष से अनुमति लें। फाइल दे दी जाएंगी। उपद्रव करने से कार्यालय का माहौल खराब हुआ है। इन सदस्यों के आरोप पूरी तरह से गलत है। 19 जुलाई को शासन को इस प्रस्ताव की कॉपी ई-मेल से भेजी गई थी। साथ ही हार्ड कॉपी भी यहां से भेजी जा चुकी है।
-हरिपाल सिंह, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत
मौके पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को साथ ले गई थाने
निर्माण कार्यों की निविदाएं अखबारों में छपने के बाद और बिना शासन से अनुमति लिए एस्टीमेट तैयार कराने का आरोप लगाते हुए जिला पंचायत सदस्यों ने निर्माण कार्यों की फाइलों को शाम चार बजे अपने कब्जे में ले लिया। इन संदिग्ध फाइलों को लेने के चक्कर में जिला पंचायत कार्यालय गुरुवार शाम चार बजे अखाड़ा बन गया। जमकर हाथापाई हुई। मौके पर पहुंची पुलिस ने फाइलें कर्मचारियों को दिला दीं। जिला पंचायत सदस्यों एवं अपर मुख्य अधिकारी समेत कई कर्मचारियों को सिविल लाइंस थाने ले गई।
बृहस्पतिवार शाम चार बजे जिला पंचायत सदस्य धीरज सक्सेना, दमयंती वर्मा, प्रेमपाल, अनीता भारती, ओमप्रकाश सिंह, राजवती वर्मा, वीरप्रताप, विराट दुबे आदि जिला पंचायत सदस्यों ने निर्माण कार्यों का एस्टीमेट बाद में नियम विरुद्ध तरीके से बनाने का आरोप लगाते हुए फाइलों को कब्जे में लेने का प्रयास किया। पहले ही फाइलें कर्मचारियों ने अपने कब्जे ले ली थीं, लेकिन करीब 27 फाइल भाजपा सदस्यों के कब्जे में थीं।
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इन फाइलों को छीनने का आरोप लगाते हुए कार्यालय में गुंडागर्दी फैलाने की सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर गई पुलिस के सामने अपर मुख्य अधिकारी और कर्मचारी जिला पंचायत सदस्यों से फाइलें लेने लगे। इससे दोनों पक्षों में पुलिस के सामने झगड़ा होने लगा। पुलिस फाइलें कर्मचारियों को दिलाकर दोनों पक्षों को थाने ले गई। इस दौरान एसएसआई संजय कुमार सिंह की भाजपा के जिला पंचायत सदस्यों से तीखी नोकझोंक हो गई। बाद में दोनों पक्षों का सिविल लाइंस थाने में समझौता हो गया। जिला पंचायत सदस्यों ने इसकी शिकायत डीएम से करने की बात कही है।
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यह था पूरा मामला
बदायूं। जिला पंचायत बोर्ड बैठक में करोड़ों रुपये के 273 प्रस्ताव पास किए गए थे, जिनके निर्माण कार्यों का विज्ञापन दो समाचार पत्रों में 19 जुलाई को निकला था। इसमें तमाम कार्य 10 लाख रुपये से ऊपर के थे, जिनकी अनुमति नियमानुसार शासन से पहले लेनी होती है। जिला पंचायत सदस्यों का आरोप था, इन फाइलों पर शासन की अनुमति लेने से पहले ही अखबारों में विज्ञप्ति छाप दी गई थी, जबकि इनका एस्टीमेट अभी तक तैयार नहीं हुआ था। यह नियम विरुद्ध है, यह कहते हुए फाइलों को भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने अपने कब्जे में ले लिया था, जिससे कि उन्हें डीएम और अन्य अधिकारियों को दिखाकर कार्रवाई करवा सकें। इन्हीं फाइलों को सदस्यों और कर्मचारियों में छीनाझपटी मच गई थी, जिसमें 27 फाइल सदस्यों के कब्जे में आ गई थीं, जिन्हें पुलिस ने वापस करा दिया था।
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जिला पंचायत सदस्यों ने कर्मचारियों से निर्माण कार्यों से संबंधित फाइलें छीनने की कोशिश की। इससे कर्मचारियों में भय का माहौल है। उन्हें फाइलें चाहिए हैं, तो जिला पंचायत अध्यक्ष से अनुमति लें। फाइल दे दी जाएंगी। उपद्रव करने से कार्यालय का माहौल खराब हुआ है। इन सदस्यों के आरोप पूरी तरह से गलत है। 19 जुलाई को शासन को इस प्रस्ताव की कॉपी ई-मेल से भेजी गई थी। साथ ही हार्ड कॉपी भी यहां से भेजी जा चुकी है।
-हरिपाल सिंह, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत