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बंदी रक्षक ने रचा था अपहरण का ड्रामा

Fri, 26 Dec 2014 08:34 PM IST
बदायूं।
बदायूं। Updated Fri, 26 Dec 2014 08:34 PM IST
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अपहरण का ड्रामा करने वाला बंदीरक्षक तीन दिन बाद घर लौट आया है। पुलिस और जेल प्रशासन पहले ही घटना को संदिग्ध मान रहे थे। बदायूं में अपने सरकारी क्वाटर पर आने के बाद यह परिवार वालों के साथ अपने घर एटा के लिए रवाना हो गया। इधर बंदी रक्षक की ओर से जेलर पर आरोप लगाते हुए लिखी गई पर्ची भी फर्जी निकली है। यह भी पता चला है कि पहले भी यह बंदी रक्षक कई बार ड्यूटी से गायब होकर इसी तरह का ड्रामा कर चुका है।
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एटा के मोहल्ला कटरा निवासी सौरभ पुंडीर जिला जेल में बंदी रक्षक के पद पर तैनात है। 23 दिसंबर को यह डीआईजी जेल से अवकाश मांगने बरेली गया था। वहां से दोपहर करीब साढे़ बारहा बजे यह बदायूं आने के लिए बरेली से रोडवेज बस में सवार हुआ था। इसके बाद यह घर नहीं पहुंचा। 24 दिसंबर को इसने परिवार वालों को फोन करके बताया कि तीन लोग उसको पुलिस लाइंस के पास से मारूती वैन में अगवा करके ले गए हैं। उसके रुपये, मोबाइल आदि सब कुछ छीन लिया है। बंदी रक्षक मोबाइल बदल-बदल कर अपने परिवार वालों से बात करता रहा। गुरुवार को परिवार वालों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। शुक्रवार को बंदी रक्षक अपने घर लौट आया है। बात करने पर इसने बताया कि वैन सवार लोगों ने उसे गोरखपुर के पास छोड़ दिया था। वहां से वह ट्रेन में बैठकर सीतापुर आया और सीतापुर में जीआरपी को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। गुरुवार रात में ही परिवार वाले सीतापुर पहुंच गए। यहां जीआरपी ने उसे परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया।
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बरेली सेंट्रल जेल में भी रहा विवादित
बदायूं। करीब दो साल पहले सौरभ पुंडीर बरेली सेंट्रल जेल में तैनात था। यहां जेल में इसने होमगार्ड से मारपीट की थी। यहां भी यह एक बार बिना किसी सूचना के ड्यूटी से गायब हो गया था। इसके बाद इसका तबादला बदायूं कर दिया गया। बदायूं में कई बार इसने अनुशासनहीनता की। जेल प्रशासन की ओर से इसके खिलाफ उच्च अधिकारियों को लिखा भी गया। कई बार यहां से भी यह बिना सूचना ड्यूटी से गायब हो चुका है।
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कार्रवाई से बचने के लिए रचा ड्रामा
बदायूं। सौरभ पुंडीर ने कार्रवाई से बचने के लिए पूरा ड्रामा रचा था। यह 22 दिसंबर को डीएम के पास अवकाश मांगने गया था। यहां अवकाश नहीं मिला तो अगले दिन डीआईजी जेल के पास पहुंच गया। बिना बताए यह ड्यूटी से गायब था। जेलर अरविंद पांडेय ने इसे नोटिस जारी कर दिया था। ऐसे में इसने यह ड्रामा रचा। जेलर पर दबाव बनाने की नीयत से इसके परिवार वालों ने एक पर्ची तैयार की इस पर लिखा था कि मेरी मौत के जिम्मेदार जेलर अरविंद पांडेय हैं।


मैंने पहले ही कहा था कि बंदी रक्षक बिना सूचना के ड्यूटी से गायब है। इसके अपहरण के संबंध में सिविल लाइंस थाने से भी जानकारी ली गई। पुलिस ने ऐसा कोई केस दर्ज नहीं किया है। बंदी रक्षक के खिलाफ दहेज एक्ट का मुकदमा भी चल रहा है। पहले भी यह इस तरह से गायब हो चुका है। -अरविंद पांडेय, जेलर
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