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पुलिस से उलट निकला सीबीआई जांच का निष्कर्ष

Thu, 11 Dec 2014 11:34 PM IST
रजनीश पांडेय /बदायूं
रजनीश पांडेय /बदायूं Updated Thu, 11 Dec 2014 11:34 PM IST
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कटरा सआदतगंज कांड में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के साथ ही स्पष्ट हो गया है कि मामले की एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच की दिशा सही नहीं थी। आठ जून को डीजीपी एएल बनर्जी ने कहा था कि ये ऑनर किलिंग हो सकती है। इसके बाद लड़कियों के परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी। जल्दबाजी में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। अब सीबीआई के खुलासे से साफ है कि अगर मामले में पुलिस जांच होती तो लड़कियोें के परिवार वालों का फंसना तय था।
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सीबीआई ने पूरे मामले का आत्महत्या का जरूर बताया है लेकिन पीड़ित परिवार, आरोपी और गवाहों के बयान के साथ पुलिस की जांच पर गौर करें तो मामले में अब भी तमाम झोल हैं। पुलिस ने दवाब के चलते मामले में पांच नामजद समेत दो अज्ञात लोगों के खिलाफ रेप और हत्या की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली थी लेकिन जांच में इशारा ऑनर किलिंग की ओर किया था। सीबीआई की रिपोर्ट आने के बाद तत्कालीन एसएसपी अतुल सक्सेना और एसपी सिटी मानसिंह चौहान सीबीआई की जांच रिपोर्ट को सही बता रहे हैं। दूसरी ओर स्थानीय पुलिस और एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर ही डीजीपी ने इसे ऑनर किलिंग बताया था। सीबीआई का दावा है कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट, पॉलीग्राफी टेस्ट समेत करीब दो दर्जन जांचों के आधार पर निष्कर्ष निकला है कि दोनों लड़कियों ने आत्महत्या की थी। छह महीने चली जांच के दौरान सीबीआई ने पीड़ित पक्ष के 243 और आरोपी पक्ष के 30 लोगों से पूछताछ भी की थी। हालांकि लड़कियों के आत्महत्या की बात किसी के गले नहीं उतर रही है लेकिन सीबीआई का दावा है कि उसके पास इसके पुख्ता सबूत हैं।
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कटरा सआदतगंज कांड एक नजर में
27 मई: रात करीब 8:30 बजे दोनों लड़कियां घर से निकलीं।
27 मई: रात करीब 9:15 बजे नजरू ने लड़कियों को पप्पू के साथ देखा।
27 मई: रात 10:30 बजे से परिवार वालों ने लड़कियों की खोज शुरू की। रात में ही परिवार वाले करीब 1.30 बजे थाने पहुंचे।
28 मई: सुबह पांच बजे लड़कियों के शव आम के बाग में पेड़ पर लटके मिले। पुलिस ने पप्पू यादव, अवधेश यादव, उरवेश यादव, छत्रपाल गंगवार और सर्वेश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
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28 मई: शाम पांच बजे शव पेड़ से उतारे गए। इसी दिन रात में दस बजे शवों का तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया।
29 मई: कटरा कांड पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट तलब की।
29 मई: पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
30 मई: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी गांव पहुंचे।
1 जून: पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और सांसद धर्मेंद्र यादव गांव पहुंचे।
2 जून: घटना पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान कटरा पहुंचे। बसपा विधायक सिनोद शाक्य ने पीड़ित परिवार को सहायता राशि भेंट की।
2 जून: आरोपियों और लड़कियों के डीएनए सैंपल जांच के लिए हैदराबाद भेजे गए।
3 जून: पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कटरा पहुंचे। डीजीपी एएल बनर्जी ने भी घटनास्थल का मौका-मुआयना किया
4 जून: बरेली मंडल के कमिश्नर गांव पहुंचे। महिला आयोग ने रिपोर्ट तलब की।
5 जून: घटना की जांच एसआईटी को सौंपी गई। नवागत डीएम शंभूनाथ कटरा पहुंचे।
6 जून: एसआईटी ने जांच शुरू की। पीड़ित के घर पुलिस तैनात।
7 जून: स्टेट फॉरेंसिक लैब की टीम गांव पहुंची। तत्कालीन प्रभारी डीएम उदयराज और एसएसपी अतुल सक्सेना को शासन सस्पेंड।
8 जून: फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का जायजा लिया। दो अज्ञात आरोपियों के स्केच बनने का काम शुरू। पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की। इसी दिन डीजीपी ने बयान दिया कि ये ऑनर किलिंग है।
9 जून: पीड़ित पक्ष का सीबीआई जांच की मांग को लेकर धरना। देर रात तत्कालीन एसपी सिटी को शासन की ओर से केंद्र सरकार को भेजी गई सीबीआई जांच की सिफारिश की जानकारी दी गई।
12 जून: सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज की।
13 जून: सीबीआई की एक टीम बदायूं पहुंची।
14 जून: सीबीआई ने पीड़ित पक्ष और आरोपियों के बयान लिए।
15 जून: सीबीआई ने पॉलीग्राफी टेस्ट का फैसला लिया।
17 जून: सीबीआई ने आरोपियों का पॉलीग्राफी टेस्ट कराया।
19 जून: पीड़ित पक्ष के पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए कोर्ट से अनुमति मिली।
3 जुलाई: पीड़ित पक्ष और गवाहों का दिल्ली में पॉलीग्राफी टेस्ट शुरू हुआ।
4 जुलाई: सीबीआई ने शवों का दोबारा पीएम कराने की बात कही। इसके लिए मेडिकल बोर्ड बनाया गया।
5 जुलाई: कटरा कांड में हाईकोर्ट ने रिपोर्ट तलब की।
19 जुलाई: सीबीआई ने अटैना घाट पर दफन लड़कियों के शव निकालने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
16 अगस्त: सीबीआई को डीएनए जांच रिपोर्ट मिली।
20 अगस्त: सीबीआई के मेडिकल बोर्ड ने माना, लड़कियों के साथ रेप नहीं हुआ।
6 अक्तूबर: सीबीआई सूत्रों ने कहा, यह आत्महत्या का ममला है।
20 नवंबर: सीबीआई को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिली।
27 नवंबर: सीबीआई निदेशक का बयान आया कि लड़कियों ने आत्महत्या की थी।
11 दिसंबर: सीबीआई ने स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) के कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
कैसे खारिज कर दी रेप की बात
बदायूं। कटरा सआदतगंज में मरने वाली दोनों लड़कियों का पोस्टमार्टम डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. अवधेश कुमार और डॉ. पुष्पापंत त्रिपाठी ने किया था। डॉक्टरों के इस पैनल ने लड़कियों के साथ रेप के बाद उनकी हैंगिंग से मौत की बात कही थी। बाद में सीबीआई ने पैनल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को खारिज कर दिया। सीबीआई ने शवों को दोबारा पोस्टमार्टम कराने की कवायद की लेकिन पोस्टमार्टम नहीं कराया। बाद में शवों के बिना दोबारा पोस्टमार्टम के सीबीआई के मेडिकल बोर्ड ने लड़कियों के साथ रेप और उनकी हत्या की बात को खारिज कर दिया। हालांकि पैनल के तीनों डॉक्टर अब भी अपनी रिपोर्ट पर कायम हैं।
दोनों लड़कियों ने आत्महत्या की थी: कुमार रजत
बदायूं। कटरा सआदतगंज कांड में चार्जशीट दाखिल करने के बाद सीबीआई अधिवक्ता कुमार रजत ने मीडिया से कहा कि यह गैंगरेप, हत्या का मामला नहीं बल्कि आत्महत्या का मामला था। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जांच पूरी कर ली है। मामले में क्लोचर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। कोर्ट ने वादी पक्ष के लिए नोटिस जारी कर दिया है। मामले में अगली सुनवाई अब छह जनवरी के लिए होगी। हालांकि इस दौरान सीबीआई के अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते रहे।
इसी लाइन पर पुलिस की जांच: सक्सेना
बदायूं। तत्कालीन एसएसपी अतुल सक्सेना ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को सही बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस शुरू से ही मान रही थी कि यह गैंगरेप और हत्या का मामला नहीं है। उस समय मीडिया ने घटना को तूल दे दिया। पुलिस को ज्यादा काम करने का मौका नहीं मिला। घटनाक्रम, एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहीं पर मेल नहीं खा रहे थे। सक्सेना ने कहा कि वह सीबीआई की रिपोर्ट से सहमत हैं।

बता दें कि कटरा सआदतगंज कांड के बाद सात जून को सस्पेंड किए गए अतुल सक्सेना इस समय संभल के एसएसपी हैं।
सीबीआई की रिपोर्ट से सहमत: मानसिंह
बदायूं। तत्कालीन एसपी सिटी और घटना वाले दिन प्रभारी एसएसपी रहे मानसिंह चौहान का कहना है कि वह सीबीआई की रिपोर्ट से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस शुरू से ही इस मामले को गैंगरेप के बाद हत्या नहीं मान रही थी। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में इस तरह के तथ्य सामने आ गए थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि सीबीआई भी पुलिस के तथ्यों पर ही निष्कर्ष तक पहुंची है।
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