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खास के लिए नियम-कानून भी दरकिनार, मोरपाल को जेल में किया दाखिल
बदायूं, ब्यूरो
Updated Wed, 30 Mar 2016 11:57 PM IST
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जेल
- फोटो : अमर उजाला
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दर्जा राज्यमंत्री का रिश्तेदार 13 दिन तक करता रहा बाहर मौज
सिपाहियों ने लिखित में कहा इतने दिन अलीगढ़ के रैन बसेरा में रहे
अगर कोई आम आदमी है, तो उसके आगे तमाम नियम-कानून दिखाए-समझाए जाते हैं, लेकिन कोई रसूखदार या उसका रिश्तेदार है, तो उसके लिए बंदिशे कम, नियम नरम और लचीले हो जाते हैं। सपा के एमएलसी और दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के रिश्तेदार मोरपाल के मामले में आखिर यही हुआ। बुधवार को जेल प्रशासन ने गंभीर मामले में भी लीपा-पोती कर दी। 13 दिन बाद बिना डिस्चार्ज स्लिप के ही मोरपाल को जेल में दाखिल कर लिया गया। कैदी की अभिरक्षा में भेजे गए सिपाही दुर्गा सिंह और रामप्रसाद से लिखित में जवाब लिया गया है। दोनों का बड़ा ही हास्यास्पद सा जवाब है कि अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भीड़ होने की वजह से उसे भर्ती नहीं किया जा सका था। इसलिए वह मोरपाल के साथ मेडिकल कॉलेज के कैंपस में ही बने रैन बसेरा में इतने दिनों रहे। गौर करने वाली बात है कि इन दिनों उन्होंने भर्ती होने की जरूरत भी नहीं समझी।
याद दिलाते चलें कि सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव के छोटे भाई का समधी नवदिया नवादा सुलरा निवासी पूर्व प्रधान मोरपाल है। उसको हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। मोरपाल के एक पैर में तकलीफ है। वह बैसाखी लेकर चलता है। जेल अस्पताल से उसे डॉ. एमके गुप्ता ने 16 मार्च को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया था। मोरपाल की अभिरक्षा में सिपाही दुर्गा सिंह और रामप्रसाद को भेजा गया था। मोरपाल अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती ही नहीं हुआ। इस दौरान जेल प्रशासन और पुलिस ने भी उसकी सुध नहीं ली। गत सोमवार को मोरपाल दोनों सिपाहियों के साथ जेल पहुंचा। उसके पास मेडिकल कॉलेज की डिस्चार्ज स्लिप नहीं थी। जेल अधीक्षक एनएल दोहरे ने उसे जेल में दाखिल नहीं किया। इस बारे में जब पुलिस के अफसरों को पता लगा तो विभाग में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी अनिल यादव ने आरआई लाइन सुरेश बाबू यादव से सिपाहियों के संबंध में रिपोर्ट तलब कर ली। दोनों सिपाहियों के खिलाफ जीडी में तस्करा भी दाखिल किया गया।
बुधवार को यह खबर अखबारों की सुर्खियां बनी, तो मोरपाल सुबह फिर से जेल पहुंचा। उसके पास सिर्फ अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की ओपीडी का पर्चा था। सत्ता के दबाव में जेल प्रशासन ने भी घुटने टेक दिए और पूरे मामले में लीपा-पोती शुरू हो गई। दोनों सिपाहियों से लिखित तौर पर ये बयान लिया गया कि मोरपाल इतने दिन तक उनके साथ मेडिकल कॉलेज के रैन बसेरा में रहा। इसके बाद मोरपाल को जेल में दाखिल कर लिया गया।
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मोरपाल को जेल में दाखिल कर लिया गया है। उसके पास मेडिकल कॉलेज का ओपीडी पर्चा था। अभिरक्षा के गए दोनों सिपाहियों ने लिखित में दिया है कि इतने दिन वह मेडिकल कॉलेज के रैन बसेरा में रहे। भीड़ होने की वजह से उसको वहां भर्ती नहीं कराया जा सका। अब बाकी पड़ताल का काम पुलिस का है। इस संबंध में एसएसपी को लिख दिया गया है।
-एनएल दोहरे, जेल अधीक्षक
दोनों सिपाहियों के खिलाफ जांच कराई जा रही है। फिलहाल जीडी में तस्करा दाखिल कर दिया गया है। आरआई की रिपोर्ट आ गई है। इसका अवलोकन करने के बाद सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल यादव, एसपी सिटी
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बार-बार करा रहा जेल प्रशासन किरकिरी
जेल में पूर्वांचल के कई कुख्यात अपराधी
नवंबर 2013 में बंदी ने किया था डबल मर्डर
जिला जेल प्रशासन बार-बार किरकिरी करा रहा है। पहले तो मोरपाल को जेल से अलीगढ़ रेफर करके जेल प्रशासन ने किरकिरी कराई। अब बिना डिस्चार्ज स्लिप के उसे जेल में दाखिल करके। सवाल उठता है कि अगर ऐसा ही करना था, तो सोमवार को जब मोरपाल जेल पहुंचा तो उसी समय उसे जेल में दाखिल किया जा सकता था। जेल प्रशासन ने उसे दो दिन जेल के बाहर मौज करने का वक्त दे दिया। इससे पहले नवंबर 2013 में जिला जेल का बंदी हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा डबल मर्डर कर चुका है।
जिला जेल में पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई माफिया, डॉन और शातिर अपराधी भी बंद हैं। जेल प्रशासन की इन कारगुजारियों से सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ज्ञात रहे कि जेल प्रशासन ने बिना किसी बीमारी के नवंबर 2013 में हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। यहां वह 25 दिन भर्ती रहा। इसी दौरान उसने मोहल्ला खंडसारी में डबल मर्डर की वारदात को अंजाम दिया था। मामले में मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। ताजा मामला मोरपाल का है। यहां भी जेल प्रशासन ने लीपापोती कर दी है।
जिला जज, डीएम, एसएसपी ने किया जेल का निरीक्षण
बदायूं। दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के रिश्तेदार मोरपाल के कई दिन तक जेल से गायब रहने के बाद बुधवार को प्रभारी जिला जज प्रमोद कुमार पंचम, प्रभारी डीएम प्रताप सिंह भदौरिया और एसएसपी सौमित्र यादव ने जिला जेल का निरीक्षण किया। हालांकि यह रुटीन निरीक्षण बताया जा रहा है, लेकिन निरीक्षण के दौरान अधिकारी मोरपाल मामले में ही पड़ताल करते रहे। इस दौरान बंदियों और कैदियों से उनकी समस्याओं के बारे में भी पूछा गया। कई बंदियों ने जेल में दवाएं न मिलने की शिकायत की।
जिला अस्पताल में भी तीन महीने कर चुका है मौज
बदायूं। जिला अस्पताल के रिकार्ड पर गौर करें तो मोरपाल इससे पहले सितंबर 15 से जनवरी 16 तक जिला अस्पताल में भर्ती रहा था। तीन महीने से ज्यादा समय तक वह अस्पताल में रहा। इस दौरान दो दिन के लिए उसे अलीगढ़ रेफर भी किया गया था। जिला अस्पताल में इस दौरान उसका क्या इलाज हुआ? अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं है। खास बात ये है कि जिला कारागार के डॉक्टर को सीधे हायर सेंटर रेफर करने का अधिकार नहीं है। जेल का डॉक्टर रोगी को जिला अस्पताल ही भेज सकता है। इस मामले में पहले से ही खेल चल रहा है। मोरपाल ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों से पहले ही ये लिखवा रखा है कि अगर कोई परेशानी होती है, तो वह सीधे यहां आ सकता है। डा. एमके गुप्ता ने इसी आधार पर उसको सीधे मेडिकल कॉलेज भेज दिया।
सिपाहियों ने लिखित में कहा इतने दिन अलीगढ़ के रैन बसेरा में रहे
अगर कोई आम आदमी है, तो उसके आगे तमाम नियम-कानून दिखाए-समझाए जाते हैं, लेकिन कोई रसूखदार या उसका रिश्तेदार है, तो उसके लिए बंदिशे कम, नियम नरम और लचीले हो जाते हैं। सपा के एमएलसी और दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के रिश्तेदार मोरपाल के मामले में आखिर यही हुआ। बुधवार को जेल प्रशासन ने गंभीर मामले में भी लीपा-पोती कर दी। 13 दिन बाद बिना डिस्चार्ज स्लिप के ही मोरपाल को जेल में दाखिल कर लिया गया। कैदी की अभिरक्षा में भेजे गए सिपाही दुर्गा सिंह और रामप्रसाद से लिखित में जवाब लिया गया है। दोनों का बड़ा ही हास्यास्पद सा जवाब है कि अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भीड़ होने की वजह से उसे भर्ती नहीं किया जा सका था। इसलिए वह मोरपाल के साथ मेडिकल कॉलेज के कैंपस में ही बने रैन बसेरा में इतने दिनों रहे। गौर करने वाली बात है कि इन दिनों उन्होंने भर्ती होने की जरूरत भी नहीं समझी।
याद दिलाते चलें कि सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव के छोटे भाई का समधी नवदिया नवादा सुलरा निवासी पूर्व प्रधान मोरपाल है। उसको हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। मोरपाल के एक पैर में तकलीफ है। वह बैसाखी लेकर चलता है। जेल अस्पताल से उसे डॉ. एमके गुप्ता ने 16 मार्च को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया था। मोरपाल की अभिरक्षा में सिपाही दुर्गा सिंह और रामप्रसाद को भेजा गया था। मोरपाल अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती ही नहीं हुआ। इस दौरान जेल प्रशासन और पुलिस ने भी उसकी सुध नहीं ली। गत सोमवार को मोरपाल दोनों सिपाहियों के साथ जेल पहुंचा। उसके पास मेडिकल कॉलेज की डिस्चार्ज स्लिप नहीं थी। जेल अधीक्षक एनएल दोहरे ने उसे जेल में दाखिल नहीं किया। इस बारे में जब पुलिस के अफसरों को पता लगा तो विभाग में हड़कंप मच गया। एसपी सिटी अनिल यादव ने आरआई लाइन सुरेश बाबू यादव से सिपाहियों के संबंध में रिपोर्ट तलब कर ली। दोनों सिपाहियों के खिलाफ जीडी में तस्करा भी दाखिल किया गया।
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बुधवार को यह खबर अखबारों की सुर्खियां बनी, तो मोरपाल सुबह फिर से जेल पहुंचा। उसके पास सिर्फ अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज की ओपीडी का पर्चा था। सत्ता के दबाव में जेल प्रशासन ने भी घुटने टेक दिए और पूरे मामले में लीपा-पोती शुरू हो गई। दोनों सिपाहियों से लिखित तौर पर ये बयान लिया गया कि मोरपाल इतने दिन तक उनके साथ मेडिकल कॉलेज के रैन बसेरा में रहा। इसके बाद मोरपाल को जेल में दाखिल कर लिया गया।
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मोरपाल को जेल में दाखिल कर लिया गया है। उसके पास मेडिकल कॉलेज का ओपीडी पर्चा था। अभिरक्षा के गए दोनों सिपाहियों ने लिखित में दिया है कि इतने दिन वह मेडिकल कॉलेज के रैन बसेरा में रहे। भीड़ होने की वजह से उसको वहां भर्ती नहीं कराया जा सका। अब बाकी पड़ताल का काम पुलिस का है। इस संबंध में एसएसपी को लिख दिया गया है।
-एनएल दोहरे, जेल अधीक्षक
दोनों सिपाहियों के खिलाफ जांच कराई जा रही है। फिलहाल जीडी में तस्करा दाखिल कर दिया गया है। आरआई की रिपोर्ट आ गई है। इसका अवलोकन करने के बाद सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल यादव, एसपी सिटी
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बार-बार करा रहा जेल प्रशासन किरकिरी
जेल में पूर्वांचल के कई कुख्यात अपराधी
नवंबर 2013 में बंदी ने किया था डबल मर्डर
जिला जेल प्रशासन बार-बार किरकिरी करा रहा है। पहले तो मोरपाल को जेल से अलीगढ़ रेफर करके जेल प्रशासन ने किरकिरी कराई। अब बिना डिस्चार्ज स्लिप के उसे जेल में दाखिल करके। सवाल उठता है कि अगर ऐसा ही करना था, तो सोमवार को जब मोरपाल जेल पहुंचा तो उसी समय उसे जेल में दाखिल किया जा सकता था। जेल प्रशासन ने उसे दो दिन जेल के बाहर मौज करने का वक्त दे दिया। इससे पहले नवंबर 2013 में जिला जेल का बंदी हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा डबल मर्डर कर चुका है।
जिला जेल में पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई माफिया, डॉन और शातिर अपराधी भी बंद हैं। जेल प्रशासन की इन कारगुजारियों से सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। ज्ञात रहे कि जेल प्रशासन ने बिना किसी बीमारी के नवंबर 2013 में हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा को जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया था। यहां वह 25 दिन भर्ती रहा। इसी दौरान उसने मोहल्ला खंडसारी में डबल मर्डर की वारदात को अंजाम दिया था। मामले में मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। ताजा मामला मोरपाल का है। यहां भी जेल प्रशासन ने लीपापोती कर दी है।
जिला जज, डीएम, एसएसपी ने किया जेल का निरीक्षण
बदायूं। दर्जा राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के रिश्तेदार मोरपाल के कई दिन तक जेल से गायब रहने के बाद बुधवार को प्रभारी जिला जज प्रमोद कुमार पंचम, प्रभारी डीएम प्रताप सिंह भदौरिया और एसएसपी सौमित्र यादव ने जिला जेल का निरीक्षण किया। हालांकि यह रुटीन निरीक्षण बताया जा रहा है, लेकिन निरीक्षण के दौरान अधिकारी मोरपाल मामले में ही पड़ताल करते रहे। इस दौरान बंदियों और कैदियों से उनकी समस्याओं के बारे में भी पूछा गया। कई बंदियों ने जेल में दवाएं न मिलने की शिकायत की।
जिला अस्पताल में भी तीन महीने कर चुका है मौज
बदायूं। जिला अस्पताल के रिकार्ड पर गौर करें तो मोरपाल इससे पहले सितंबर 15 से जनवरी 16 तक जिला अस्पताल में भर्ती रहा था। तीन महीने से ज्यादा समय तक वह अस्पताल में रहा। इस दौरान दो दिन के लिए उसे अलीगढ़ रेफर भी किया गया था। जिला अस्पताल में इस दौरान उसका क्या इलाज हुआ? अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं है। खास बात ये है कि जिला कारागार के डॉक्टर को सीधे हायर सेंटर रेफर करने का अधिकार नहीं है। जेल का डॉक्टर रोगी को जिला अस्पताल ही भेज सकता है। इस मामले में पहले से ही खेल चल रहा है। मोरपाल ने अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों से पहले ही ये लिखवा रखा है कि अगर कोई परेशानी होती है, तो वह सीधे यहां आ सकता है। डा. एमके गुप्ता ने इसी आधार पर उसको सीधे मेडिकल कॉलेज भेज दिया।