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अज्ञात महिला के शव की भी दुर्दशा, मानवता शर्मसार

Mon, 18 Jan 2016 10:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं Updated Mon, 18 Jan 2016 10:47 PM IST
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an unknown dead body was raped
पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस के पास दफनाया, तो कुत्तों ने खींच ली लाश
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दो दिन मुजरिया में भी पड़ा रहा था शव, वहां भी कुत्तों ने घसीटा था



मुजरिया थाना क्षेत्र के गांव भीकमपुर हरदोपट्टी में 10 जनवरी को एक बाग में अज्ञात महिला का शव मिला था। इसे हत्या कर यहां फेंका गया था। गांव वालों ने उसी दिन तत्कालीन एसओ रामलखन यादव को खबर दी। पुलिस ने फिर भी शव नहीं उठाया। इसको जब कुत्ते नोचने लगे तो गांव वालों ने मानवता के नाते 11 जनवरी को गड्डा खोदकर उसे दफन कर दिया। 12 जनवरी को जब ये खबर अखबारों की सुर्खियां बनीं तो 13 जनवरी को पुलिस ने शव गड्ढे से निकलवाकर कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उसकी शिनाख्त की ठीक से कोशिश भी नहीं की गई। पोस्टमार्टम में महिला की हत्या गला दबाकर किए जाने की पुष्टि भी हुई थी। महिला बुर्का पहने थी। इससे लग रहा था कि वह मुस्लिम समाज की थी। इस शव को पहले ही कुत्ते नोंच चुके थे। मुजरिया थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद मानवता को ताक में रखकर पोस्टमार्टम हाउस के पास ही शव को दफन कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देेशों के अनुसार लाश को शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक रखना भी मुनासिब नहीं समझा गया। इस गड्ढे से फिर कुत्तों ने शव बाहर निकाल लिया, तो अज्ञात शवों का धर्म के मुताबिक अंतिम संस्कार करने वाले समाजसेवी मोहम्मद शरीफ ने इसे दफन कराया। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी डीएम शंभूनाथ का भी दी है। एसओ मुजरिया राजेश कुमार ने कहा कि शव का अंतिम संस्कार करने वाले मोहम्मद शरीफ से संपर्क किया गया था। उन्होंने शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। महिला मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती थी। इसके बाद सिपाहियों ने उसको दफन करवा दिया था। समाजसेवी मोहम्मद शरीफ ने बताया कि मुजरिया थाना पुलिस ने शव के अंतिम संस्कार के लिए मुझसे संपर्क किया था। मैंने इसके लिए कुछ वक्त मांगा था। इससे पहले ही सिपाहियों ने शव गड्ढे में दफन करवा दिया। हालांकि पोस्टमार्टम के बाद शव को 72 घंटे तक शिनाख्त के लिए रखे जाने का प्रावधान है। यहां ऐसा नहीं हुआ। एसएसपी सौमित्र यादव ने बताया कि यह गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण में जांच कराई जाएगी। शव के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी जिन सिपाहियों पर थी जांच में अगर वह दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे तो नहीं सुलझेगी अज्ञात शवों की पहेली
बदायूं। अज्ञात शव पुलिस के लिए पहेली बने हुए हैं। इनकी शिनाख्त के लिए पुलिस प्रयास ही नहीं करती। अखबारों में सूचनाएं प्रकाशित नहीं कराई जातीं। इतना ही नहीं शवों को पोस्टमार्टम के बाद 72 घंटे तक शिनाख्त के लिए भी नहीं रखा जाता। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें, तो जिले में डेढ़ साल के दौरान 35 अज्ञात शव मिले। इनमें 10 शव की अब तक शिनाख्त नहीं हो सकी है। इसकी मुख्य वजह पुलिस की लापरवाही है। अज्ञात शव की सूचनाएं पुलिस फोटो के साथ अखबारों में प्रकाशित नहीं करा रही है। इस कारण इनकी शिनाख्त नहीं हो पा रही है। खबर छपने पर अफसर सफाई जरूर देते हैं, लेकिन वह लोगों के गले नहीं उतरती।  
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अंतिम संस्कार के लिए मिलते हैं 1500 रुपये
बदायूं। एक अज्ञात शव का उसके धर्म के मुताबिक अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस विभाग को शासन 1500 रुपये देता है। पहले यह राशि काफी कम थी। 1500 रुपये मिलने के बाद भी पुलिस अज्ञात शव के अंतिम संस्कार में भी लापरवाही बरत रही है। ताजा मामला सभी के सामने है।
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अज्ञात शवों के ताजा मामले
28 जुलाई 2015 आसफपुर में रेलवे आउटर पर अज्ञात महिला का शव मिला।
03 अगस्त 2015 फैजगंज बेहटा के गांव मन्नू नगर में अज्ञात महिला का शव मिला। रेप के बाद हत्या की पुष्टि।
27 अक्तूबर 2015 वजीरगंज के गांव बेहटरा में युवती का लाश मिली। रेप के बाद हत्या की पुष्टि।
15 नवंबर 2015 वजीरगंज के गांव सैदपुर के पास युवती का शव मिला। रेप के बाद हुई थी हत्या।
10 जनवरी 2016 मुजरिया के गांव भीकमपुर हरदोपट्टी में अज्ञात महिला का शव मिला।
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