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1800 फायर, निशाने पर नहीं लगी एक भी गोली
बदायूं।
Updated Mon, 29 Dec 2014 08:24 PM IST
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पुलिस महकमे में निशानेबाजों की कमी हो गई है। अलीगढ़ पुलिस के पांच दर्जन जवानों की शूटिंग से यह साफ हो गया है। सोमवार को यह जवान निशाना साधने बदायूं की पुलिस शूटिंग रेंज पहुंचे थे। हरेक जवान को तीस-तीस बार निशाना भेदने का मौका दिया गया लेकिन किसी जवान की गोली लक्ष्य पर नहीं लगी। 1800 कारतूस खत्म करने के बावजूद कोई जवान निशानेबाजी में खुद को साबित नहीं कर सका। जाहिर है कि इस निशानेबाजी से अलीगढ़ ही नहीं पूरे सूबे की पुलिस की निशानेबाजी सवालों के घेरे में आ गई है।
बदायूं में पुलिस के पास शॉर्ट और लॉंग दोनों तरह की शूटिंग रेंज हैं। यहां पुलिस वाले अक्सर निशाना साधते हैं। पड़ोसी जिला अलीगढ़ में पुलिस के पास शूटिंग रेंज नहीं है। हालांकि अलीगढ़ में पीएसी की शार्ट शूटिंग रेंज है। अलीगढ़ पुलिस के जवानों को लॉंग शूटिंग के लिए बदायूं आना होता है। सोमवार को अलीगढ़ पुलिस के 60 जवान सीओ गभाना देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में निशाना सुधारने बदायूं के शेखूपुर स्थित पुलिस की लॉंग शूटिंग रेंज पहुंचे। पुलिस के 60 जवानों को निशाना साधने के लिए 1800 कारतूस दिए गए। प्रत्येक जवान ने 30-30 राउंड फायर किए लेकिन कोई भी जवान लक्ष्य भेदने में कामयाब नहीं हुआ। अलीगढ़ पुलिस के जवानों की शूूटिंग करीब पांच घंटे चली। गौर करने वाली बात यह है कि पांच घंटे में किसी भी जवान की गोली निशाने पर नहीं लगी।
अलीगढ़ में नहीं है शूटिंग रेंज
अलीगढ़ में पुलिस की शूटिंग रेंज नहीं है। हालांकि वहां पीएसी की शार्ट शूटिंग रेंज है। शार्ट शूटिंग अलीगढ़ में ही होती है लेकिन लॉंग शूटिंग के लिए अलीगढ़ पुलिस के जवानों को बदायूं आना होता है। सीओ गभाना देवेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि पुलिस में निशानेबाजों की कमी है। हालांकि शार्ट शूटिंग में तो पुलिस वालों का निशाना कामयाब हो जाता है लेकिन लॉंग शूटिंग में इनका निशाना फेल रहता है।
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बदायूं पुलिस में भी नहीं अच्छे निशानेबाज
अलीगढ़ पुलिस की बात छोड़ दें तो बदायूं पुलिस में भी अच्छे निशानेबाज नहीं हैं। हालांकि पुलिस के जवानों का निशाना सुधारने के लिए मोटा बजट खर्च होता है। बदायूं में पुलिस के पास शार्ट और लॉंग शूटिंग रेंज भी हैं। इसके बावजूद भी जिले में पुलिस कर्मियों का निशाना नहीं सुधर रहा है।
यह सच है कि पुलिस में निशानेबाजों की कमी है। इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत है। यह स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि पुलिस को अच्छे निशानेबाजों की जरूरत है। -देवेंद्र सिंह, सीओ गभाना सर्किल (अलीगढ़)
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बदायूं में पुलिस के पास शॉर्ट और लॉंग दोनों तरह की शूटिंग रेंज हैं। यहां पुलिस वाले अक्सर निशाना साधते हैं। पड़ोसी जिला अलीगढ़ में पुलिस के पास शूटिंग रेंज नहीं है। हालांकि अलीगढ़ में पीएसी की शार्ट शूटिंग रेंज है। अलीगढ़ पुलिस के जवानों को लॉंग शूटिंग के लिए बदायूं आना होता है। सोमवार को अलीगढ़ पुलिस के 60 जवान सीओ गभाना देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में निशाना सुधारने बदायूं के शेखूपुर स्थित पुलिस की लॉंग शूटिंग रेंज पहुंचे। पुलिस के 60 जवानों को निशाना साधने के लिए 1800 कारतूस दिए गए। प्रत्येक जवान ने 30-30 राउंड फायर किए लेकिन कोई भी जवान लक्ष्य भेदने में कामयाब नहीं हुआ। अलीगढ़ पुलिस के जवानों की शूूटिंग करीब पांच घंटे चली। गौर करने वाली बात यह है कि पांच घंटे में किसी भी जवान की गोली निशाने पर नहीं लगी।
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अलीगढ़ में नहीं है शूटिंग रेंज
अलीगढ़ में पुलिस की शूटिंग रेंज नहीं है। हालांकि वहां पीएसी की शार्ट शूटिंग रेंज है। शार्ट शूटिंग अलीगढ़ में ही होती है लेकिन लॉंग शूटिंग के लिए अलीगढ़ पुलिस के जवानों को बदायूं आना होता है। सीओ गभाना देवेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि पुलिस में निशानेबाजों की कमी है। हालांकि शार्ट शूटिंग में तो पुलिस वालों का निशाना कामयाब हो जाता है लेकिन लॉंग शूटिंग में इनका निशाना फेल रहता है।
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बदायूं पुलिस में भी नहीं अच्छे निशानेबाज
अलीगढ़ पुलिस की बात छोड़ दें तो बदायूं पुलिस में भी अच्छे निशानेबाज नहीं हैं। हालांकि पुलिस के जवानों का निशाना सुधारने के लिए मोटा बजट खर्च होता है। बदायूं में पुलिस के पास शार्ट और लॉंग शूटिंग रेंज भी हैं। इसके बावजूद भी जिले में पुलिस कर्मियों का निशाना नहीं सुधर रहा है।
यह सच है कि पुलिस में निशानेबाजों की कमी है। इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत है। यह स्वीकार करने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि पुलिस को अच्छे निशानेबाजों की जरूरत है। -देवेंद्र सिंह, सीओ गभाना सर्किल (अलीगढ़)