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जहरखुरानों ने युवक को बनाया शिकार
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उझानी (बदायूं)। होली नजदीक आते ही रोडवेज बसों और ट्रेनों में जहरखुरानी गिरोह ने दस्तक दे दी है। जहरखुरानों का शिकार युवक सोमवार सुबह बाईपास पर बेहोश पड़ा मिला। बेहोशी की हालत में लोगों ने पुलिस को बुलाकर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचाया। इलाज के बाद होश आने पर उसने बताया कि बस में उसे बराबर सीट पर बैठे व्यक्ति ने बिस्कुट खिला दिया। पास में रखा बैग वह कब उठा ले गया, इसका अहसास ही नहीं हो पाया।
जहरखुरानों का शिकार बना राकेश कश्यप (18) कोतवाली क्षेत्र के गांव नरऊ का निवासी है। वह दिल्ली में काम करता है। महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने वह रविवार शाम को दिल्ली के आनंद बिहार बस अड्डे से रोडवेज बस में सवार हुआ। बुलंदशहर तक वह ठीक था। बुलंदशहर से आगे उसे बराबर सीट पर बैठे व्यक्ति ने झांसे में लेकर बिस्कुट खिला दिया, जिसके बाद उसे होश नहीं रहा। उसके बैग में कपड़े, पर्स और जरूरी सामान रखा था। पर्स में करीब पांच हजार रुपये भी थे। सूचना के बाद घरवाले अस्पताल पहुंचे और इलाज कराकर घर ले गए।
बुलंदशहर और गुन्नौर जहरखुरानों का मेन प्वाइंट
उझानी। दिल्ली से बदायूं की ओर आने वाली रोडवेज बसों में जहरखुरानों से जुड़ी पिछले कुछ साल की प्रमुख घटनाओं पर गौर करें तो जो भी सवारियां उनकी शिकार बनीं, उनमें से कई ने होश आने पर यही बताया कि संभल जिले में गुन्नौर चौराहे या फिर उससे पहले बुलंदशहर में बस अड्डे के पास किसी ने कुछ खिला दिया था। एक बार तो गिरोह में युवती के शामिल होने की बात भी सामने आई थी। महिला होने के नाते वह अच्छी तरह शिकार को अपने जाल में फंसाकर गिरोह के काम को आसान कर देती थी।
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...पर रोडवेज स्टॉफ क्यों नहीं करता गौर
उझानी। रोडवेज बसों में सफर के दौरान जहरखुरानों की शिकार सवारियों को बस स्टॉफ से कोई सहयोग नहीं मिलता। यह बात राकेश ने भी बताई। राकेश की माने तो जब वह बस में बैठा तो उसके पास बैग था। यह बात परिचालक को तो जरूर पता रही होगी लेकिन परिचालक उसे बेहोशी की हालत में उतारकर चला गया।
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जहरखुरानों का शिकार बना राकेश कश्यप (18) कोतवाली क्षेत्र के गांव नरऊ का निवासी है। वह दिल्ली में काम करता है। महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक करने वह रविवार शाम को दिल्ली के आनंद बिहार बस अड्डे से रोडवेज बस में सवार हुआ। बुलंदशहर तक वह ठीक था। बुलंदशहर से आगे उसे बराबर सीट पर बैठे व्यक्ति ने झांसे में लेकर बिस्कुट खिला दिया, जिसके बाद उसे होश नहीं रहा। उसके बैग में कपड़े, पर्स और जरूरी सामान रखा था। पर्स में करीब पांच हजार रुपये भी थे। सूचना के बाद घरवाले अस्पताल पहुंचे और इलाज कराकर घर ले गए।
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बुलंदशहर और गुन्नौर जहरखुरानों का मेन प्वाइंट
उझानी। दिल्ली से बदायूं की ओर आने वाली रोडवेज बसों में जहरखुरानों से जुड़ी पिछले कुछ साल की प्रमुख घटनाओं पर गौर करें तो जो भी सवारियां उनकी शिकार बनीं, उनमें से कई ने होश आने पर यही बताया कि संभल जिले में गुन्नौर चौराहे या फिर उससे पहले बुलंदशहर में बस अड्डे के पास किसी ने कुछ खिला दिया था। एक बार तो गिरोह में युवती के शामिल होने की बात भी सामने आई थी। महिला होने के नाते वह अच्छी तरह शिकार को अपने जाल में फंसाकर गिरोह के काम को आसान कर देती थी।
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...पर रोडवेज स्टॉफ क्यों नहीं करता गौर
उझानी। रोडवेज बसों में सफर के दौरान जहरखुरानों की शिकार सवारियों को बस स्टॉफ से कोई सहयोग नहीं मिलता। यह बात राकेश ने भी बताई। राकेश की माने तो जब वह बस में बैठा तो उसके पास बैग था। यह बात परिचालक को तो जरूर पता रही होगी लेकिन परिचालक उसे बेहोशी की हालत में उतारकर चला गया।