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हत्यारों से खूब जूझीं बहनें पर हार गईं
Updated Sun, 04 Feb 2018 10:00 AM IST
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हत्यारों से खूब जूझीं बहनें पर हार गईं
पंद्रह मिनट में पड़ोसियों ने कई बार मिलाया 100 नंबर
रोडवेज पुलिस चौकी खाली मिली, इंदिरा चौक पर मिली मदद
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
रामनाथ कॉलोनी में सरेशाम हुई वारदात से पड़ोसियों के चेहरे पीले पड़ गए हैं। उनकी आंखों के सामने परिचित हत्यारोपी से दोनों बहनें खूब जूझीं पर गोलियों की बौछार के आगे हार गईं। पड़ोसियों ने भी पुलिस की मदद लेने का हर जतन किया पर कहीं नेटवर्क नहीं मिला तो कहीं पुलिस। पुलिस मौके पर आती तो हत्यारोपी पकड़े जा सकते थे।
घर के अंदर करीब आधा घंटे तक तकरार और मारपीट चलती रही। इससे घर के दूसरी ओर रह रहा मकान मालिक की पत्नी और मां परेशान थीं तो आसपास के लोग भी। इनमें से घर के सामने रहने वाले एक शख्स ने तो अपनी छत से डांटकर इन लोगों को शांत कराने की भी कोशिश की पर उस वक्त तक उन्हें नहीं मालूम था कि थोड़ी ही देर में यहां हत्या हो जाएगी। ताले में किए गए पहले फायर के बाद पड़ोसियों को स्थिति गंभीर होने का अहसास हुआ और वे घरों से निकल आए। इसके बाद दो और फायरों ने उन्हें हिला दिया। पड़ोसियों ने तत्काल ही अपने मोबाइल से यूपी 100 को कॉल करने की कोशिश की। पंद्रह मिनट में तीन लोगों ने कई बार कॉल की पर 100 नंबर नहीं मिला। इस बीच अमित घर से निकलकर जाने लगा। इस दौरान श्यामदीन और पड़ोसियों ने उसे पकड़ने का साहस जुटाया पर उसके हाथ में लोड तमंचा देखकर वह ठंडे पड़ गए। अमित के निकलते ही पड़ोसी भागकर रोडवेज चौकी पर पुलिस की मदद लेने आए पर यहां पुलिस नहीं थी। इनमें से ही कुछ लोग इंदिरा चौक पहुंचे तो वहां एक दरोगा मिले। उन्हें वाकया बताया तो वह साथ चले आए। इस बीच मौके से श्यामदीन की कॉल भी 100 नंबर पर लग गई और वहां से भी पीआरवी पहुंच गई। घायल नीरज को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं।
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मोबाइल खोलेगा हत्या का राज
बदायूं। घटना के बाद मौके पर पड़ा ईलू का मोबाइल पुलिस ने सील कर दिया है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल की कॉल डिटेल और चैटिंग से वह जानकारी जुटाएगी कि इन लोगों का आपस में कैसा रिश्ता था। इससे आरोपियों के मोबाइल की लोकेशन और परिचितों के बारे में भी जानकारी आसानी से हो सकेगी जिससे उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
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शोरूम कर्मी हत्यारे के सिर सवार था खून
बदायूं। आरोपी अमित और उसका भाई सुमित मूल रूप से छात्रा के ही गांव के निवासी हैं और यहां जवाहरपुरी में किराए पर कमरा लेकर रह रहे थे। इनमें अमित शहर के एक प्रतिष्ठित इलेक्ट्रानिक प्रॉडक्ट शोरूम का कर्मचारी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अक्सर इनका यहां आना-जाना लगा रहता था। बताते हैं कि दोनों में सात साल से दोस्ती थी। चर्चा है कि हत्यारोपी अमित ने ईलू को किसी से बातचीत करते देख लिया था जिसके बाद से उसका मूड खराब था। वह शोरूम मालिक से बोलकर आया था कि अब उनकी नौकरी नहीं करेगा।
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मधुबन कॉलोनी में रहते हैं भाई-बहन
बदायूं। ईलू और नीरज की एक और बहन रीमा भी है जो शहर की मधुवन कॉलोनी में ब्याही है। रीमा के पास ही ईलू का छोटा भाई विक्की भी रहकर पढ़ाई करता है। बताया गया कि इनके चाचा श्यामदीन मिश्रा अविवाहित हैं। वह पहले रोडवेज के ड्राइवर थे और अब प्राइवेट ड्राइविंग करते हैं। वह भाई की बेटी को साथ रखकर पढ़ा रहे हैं।
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पंद्रह मिनट में पड़ोसियों ने कई बार मिलाया 100 नंबर
रोडवेज पुलिस चौकी खाली मिली, इंदिरा चौक पर मिली मदद
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं।
रामनाथ कॉलोनी में सरेशाम हुई वारदात से पड़ोसियों के चेहरे पीले पड़ गए हैं। उनकी आंखों के सामने परिचित हत्यारोपी से दोनों बहनें खूब जूझीं पर गोलियों की बौछार के आगे हार गईं। पड़ोसियों ने भी पुलिस की मदद लेने का हर जतन किया पर कहीं नेटवर्क नहीं मिला तो कहीं पुलिस। पुलिस मौके पर आती तो हत्यारोपी पकड़े जा सकते थे।
घर के अंदर करीब आधा घंटे तक तकरार और मारपीट चलती रही। इससे घर के दूसरी ओर रह रहा मकान मालिक की पत्नी और मां परेशान थीं तो आसपास के लोग भी। इनमें से घर के सामने रहने वाले एक शख्स ने तो अपनी छत से डांटकर इन लोगों को शांत कराने की भी कोशिश की पर उस वक्त तक उन्हें नहीं मालूम था कि थोड़ी ही देर में यहां हत्या हो जाएगी। ताले में किए गए पहले फायर के बाद पड़ोसियों को स्थिति गंभीर होने का अहसास हुआ और वे घरों से निकल आए। इसके बाद दो और फायरों ने उन्हें हिला दिया। पड़ोसियों ने तत्काल ही अपने मोबाइल से यूपी 100 को कॉल करने की कोशिश की। पंद्रह मिनट में तीन लोगों ने कई बार कॉल की पर 100 नंबर नहीं मिला। इस बीच अमित घर से निकलकर जाने लगा। इस दौरान श्यामदीन और पड़ोसियों ने उसे पकड़ने का साहस जुटाया पर उसके हाथ में लोड तमंचा देखकर वह ठंडे पड़ गए। अमित के निकलते ही पड़ोसी भागकर रोडवेज चौकी पर पुलिस की मदद लेने आए पर यहां पुलिस नहीं थी। इनमें से ही कुछ लोग इंदिरा चौक पहुंचे तो वहां एक दरोगा मिले। उन्हें वाकया बताया तो वह साथ चले आए। इस बीच मौके से श्यामदीन की कॉल भी 100 नंबर पर लग गई और वहां से भी पीआरवी पहुंच गई। घायल नीरज को तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद तरह-तरह की चर्चाएं हो रही थीं।
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मोबाइल खोलेगा हत्या का राज
बदायूं। घटना के बाद मौके पर पड़ा ईलू का मोबाइल पुलिस ने सील कर दिया है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल की कॉल डिटेल और चैटिंग से वह जानकारी जुटाएगी कि इन लोगों का आपस में कैसा रिश्ता था। इससे आरोपियों के मोबाइल की लोकेशन और परिचितों के बारे में भी जानकारी आसानी से हो सकेगी जिससे उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
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शोरूम कर्मी हत्यारे के सिर सवार था खून
बदायूं। आरोपी अमित और उसका भाई सुमित मूल रूप से छात्रा के ही गांव के निवासी हैं और यहां जवाहरपुरी में किराए पर कमरा लेकर रह रहे थे। इनमें अमित शहर के एक प्रतिष्ठित इलेक्ट्रानिक प्रॉडक्ट शोरूम का कर्मचारी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि अक्सर इनका यहां आना-जाना लगा रहता था। बताते हैं कि दोनों में सात साल से दोस्ती थी। चर्चा है कि हत्यारोपी अमित ने ईलू को किसी से बातचीत करते देख लिया था जिसके बाद से उसका मूड खराब था। वह शोरूम मालिक से बोलकर आया था कि अब उनकी नौकरी नहीं करेगा।
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मधुबन कॉलोनी में रहते हैं भाई-बहन
बदायूं। ईलू और नीरज की एक और बहन रीमा भी है जो शहर की मधुवन कॉलोनी में ब्याही है। रीमा के पास ही ईलू का छोटा भाई विक्की भी रहकर पढ़ाई करता है। बताया गया कि इनके चाचा श्यामदीन मिश्रा अविवाहित हैं। वह पहले रोडवेज के ड्राइवर थे और अब प्राइवेट ड्राइविंग करते हैं। वह भाई की बेटी को साथ रखकर पढ़ा रहे हैं।